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आनुवंशिक कमी की वजह से युवाओं में कोरोना का संक्रमण ज्यादा- शोध
Sun, 26 Jul 2020 09:11 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sun, 26 Jul 2020 09:11 AM IST
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
हाल ही में देखा गया है कि कुछ युवा लोग जिन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं रही है, कोविड-19 के संपर्क में आने पर उनकी हालत काफी ज्यादा खराब हुई है। एक शोध के मुताबिक इसका कारण आनुवंशिक खराबी या मुख्य तौर पर रोगप्रतिरोधक कमी हो सकती है, जिससे इंटरफेरॉन बनाने में कमी आती है। ये कोरोना से लड़ने में मुख्य घटक है।
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इंटरफेरॉन एक तरह के प्रोटीन होते हैंं, जो वायरस के हमला करने पर होस्ट सेल्स के जरिए बनाए और निकाले जाते हैं। एक वायरस संक्रमित कोशिका इंटरफेरॉन्स निकालती है ताकि आस-पास की कोशिकाएं अपनी एंटी वायरल डिफेंस मजबूत कर लें। जर्नल ऑफ अमेरिका मेडिकल एसोसिएशन में ये शोध छापा गया है।
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इस शोध में बताया गया है कि दो अनजान परिवारों के कोरोना से गंभीर रूप से पीड़ित चार युवा बच्चों को लिया गया, जिनमें एक्स-क्रोमोसोमल टीएलआर7 पाया गया। युवाओं में इंटरफेरॉन उत्पत्ति के टाइप-1 और टाइप-2 में रोगप्रतिरोधक कमी भी पाई गई। इन चारों मरीजों को आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया और इसमें से एक मरीज की मौत भी हो गई।
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जानकारों का कहना है कि ये ये शोध काफी सीमित है, इसलिए पर और जानकारी जुटाने की जरूरत है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि युवाओं में कोरोना इतना गंभीर रूप कैसे ले रहा है। फोर्टिस अस्पताल के चेयरमैन डॉ अनूप मिसरा का कहना है कि अगर ऐसे मामले सामने आते हैं तो इसके लिए हमें पहले दवाई पर जोर देना होगा और ये जानना होगा कि कैसे किसी युवा में जीन प्रोडक्शन में दिक्कतें आ रही हैं।
भारत में कोरोना से होने वाली मृत्यु दर की बात करें तो 45 उम्र के ऊपर के बुजुर्ग लोगों में ज्यादा खतरा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 30-44 और 45-59 आयु के 43 फीसदी मरीज कोरोना वायरस की वजह से अपनी जान गंवा बैठे हैं।