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कोरोना संकट: बिन पानी कैसे होती कोरोना से जंग हमारी
Wed, 15 Apr 2020 07:38 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 15 Apr 2020 07:38 AM IST
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पानी
- फोटो : अमर उजाला
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औपनिषद काल से ही हमारे ऋषियों एवं मनीषियों ने इस तथ्य को जाना और माना कि जल जीवन का आधार है और संपूर्ण सृष्टि का जीवन प्रदाता भी। आज जब कोरोना संकट से दुनिया के अधिकांश देश जूझ रहे हैं और पूरी मानवता डरी-सहमी है, तो स्वच्छता हमारा सबसे बड़ा हथियार है। जल जीवन रक्षक के साथ स्वच्छता के लिए भी महत्वपूर्ण है। समय की मांग है कि अब सोच-विचार से कहीं आगे बढ़कर मजबूत व सख्त कार्यशैली अपनाई जाए ताकि लंबे समय तक हम ऐसी बीमारियों को दूर रख सकें।
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स्वच्छता ही हमारा सबसे अहम हथियार है, ऐसे में पानी को ही मुख्य किरदार में रखना होगा। आखिर कोरोना से बचने की जंग भी हम इसी पानी के भरोसे ही तो लड़ रहे है। लिहाजा, पानी का मूल्य आंकने में हमने जो भूल पहले कर दी है, आज उसे सुधारना ही होगा तभी हम आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ भविष्य दे पाएंगे। पानी जिस सम्मान का हकदार है, हमें खुद उसे वह सम्मान देना ही होगा। आने वाली पीढ़ी भी यह सम्मान उसे दे, ऐसे संस्कार देने होंगे। कोरोना के खिलाफ पानी एक दवा है जिसके भरोसे हमारी जीत निश्चित हो सकती है।
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पानी पर्यावरण का महत्वपूर्ण अंग है। पर्यावरण से ही हमें साफ हवा मिल रही है। जब हम निरोगी रहेंगे तो हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत रहेगा तो कोरोना जैसे वायरस हमसे दूर रहेंगे। हम गंगा जल को अमृत मानकर सहेजते हैं लेकिन वही गंगा जल जब तटीय नगरों में नल से निकलता है तो उसे व्यर्थ बहने देते हैं जबकि दोनों ही गंगा जल हैं। ठीक यही दर्शन इस्लाम में भी है। फ़ारसी में पानी को आब कहा गया है और आब को बदस्तूर बर्बाद करने में हम हिचकते तक नहीं है। लेकिन जब यही पानी मक्का के पवित्र कुएं जमजम का हो तो आब—ए—जमजम हो जाता है।
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तब उसकी हर बूंद का सारी दुनिया के मुसलमान उतना ही सम्मान करते हैं जितना हिंदू पवित्र गंगा जल का। यू कहें कि हमारा जल के साथ व्यवहार उसके स्त्रोत के साथ पूरी तरह से बदल जाता है। पानी की जरूरत हर पथ, मत, मजहब, संप्रदाय, धर्म को है। आज जब कोरोना ने पूरे विश्व को घरों में कैद कर दिया है, तो दूसरी तरफ पर्यावरण राहत की सांस ले रहा है। हवा शुद्ध हो गई है। आसमान भी नीला और साफ दिखाई दे रहा है। नदियों का पानी भी स्वच्छ होने लगा है। कोरोना संकट में लॉकडाउन के बीच यह सब बदल रहा है। यदि हम इस कठिन समय में अपने मित्र जल को पहचान लें तो आगे अपना और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर पाएंगे।
(गजेंद्र सिंह शेखावत, जलशक्ति मंत्री)