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तीसरी लहर : बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने के संकेत नहीं
Tue, 25 May 2021 07:55 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 25 May 2021 07:55 AM IST
सार
- एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना वायरस का सिर्फ बच्चों पर असर होने की बात कहना गलत है। ऐसे अभी तक वैज्ञानिक सबूत नहीं मिले हैं जिसके आधार पर कोई कह सके कि तीसरी या चौथी लहर में बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे।
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- फोटो : istock
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विस्तार
एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोरोना वायरस के चलते बच्चे पहले से ही काफी तनाव में हैं। इनकी शिक्षा पर बुरा असर पड़ा है। साथ ही स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। जिसका प्रभाव बच्चों के व्यवहार में देखने को मिल रहा है। ऐसे में तीसरी लहर से बच्चों को बचाने जैसी थ्योरी से लोगों को बचाना चाहिए। तीसरी लहर में बच्चों के गंभीर या ज्यादा प्रभावित होने के संकेत नहीं।
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डॉ गुलेरिया ने कहा कि कोरोना वायरस का सिर्फ बच्चों पर असर होने की बात कहना गलत है। क्योंकि सालभर से देखने को मिल रहा है कि संक्रमण हर आयु वर्ग में है लेकिन जानलेवा 45 वर्ष से अधिक आयु खासतौर पर बुजुर्गों में है।
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इनके बचाव के तरीके भी वही हैं जो हम सभी के लिए हैं। जैसे चेहरे पर मास्क लगाना, भीड़ से दूरी और बार-बार हाथ धोने की आदत। ऐसे अभी तक वैज्ञानिक सबूत नहीं मिले हैं जिसके आधार पर कोई कह सके कि तीसरी या चौथी लहर में बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे, बड़े नहीं। यह पूरी तरह से गलत है। इस तरह की बातें करने से लोगों में घबराहट होती है।
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इन चर्चाओं से हम सभी को तत्काल बचने की आवश्यकता है। हालांकि बच्चों या अपने परिवार की सुरक्षा पर ध्यान जरूर देना है। हम इतने भी बेपरवाह न हो जाएं कि सुरक्षा उपाय भी भूल जाएं।
तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण के सबूत नहीं
एम्स दिल्ली के निदेशक डॉक्टर गुलेरिया ने बताया कोरोना की पहली और दूसरी लहर में बच्चों में संक्रमण बहुत कम देखा गया है। ऐसे में अब तक ऐसा नहीं लगता है कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों में कोविड संक्रमण देखा जाएगा।
बच्चों को कोरोना का खतरा वयस्कों के समान
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल ने कहा कि बच्चों में कोरोना का खतरा वयस्कों के समान है। आईसीएमआर ने पिछले महीने ही अध्ययन के जरिए इसकी जानकारी दी थी। इससे पहले इंडियन अकेडमी ऑफ पीडिएट्रिक्स संगठन भी देश में तीसरी लहर से ऐसे बच्चों को अधिक खतरा होने की बात से इंकार कर चुका है।
रोक सकते हैं तीसरी और चौथी लहर
डॉ गुलेरिया का कहना है कि कोरोना महामारी का संकट अभी भी देश में है। आगे इसकी तीसरी और फिर चौथी लहर भी आ सकती है। लेकिन इसे रोकने के लिए हम सभी प्रयास कर सकते हैं। अगर आम जनता कोविड सतर्कता नियमों का ध्यान रखें।
जिला स्तर पर निगरानी और कंटेनमेंट जोन की रणनीति पर सख्ती से काम हो और अस्पतालों में उपचार सेवा बाधित न हो तो अगली भयावह लहर को रोक सकते हैं। अगर दोबारा से नए मामले बढ़ते भी हैं तो भी योजनाओं के जरिए हम महामारी को देश बहुत अधिक फैलने से रोकने में जरूर कामयाब होंगे।