कोरोना वायरस: डॉक्टरों को हो रही खाने की किल्लत, पीएम मोदी से लगाई मदद की गुहार
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कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने पूरे देश को 21 दिनों के लिए लॉकडाउन कर दिया है। उन्होंने भारतवासियों से अनुरोध किया है कि जो जहां है, वहीं रहे। दूसरी तरफ इस महामारी का मुकाबला करने की जंग में विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ ही डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, पायलट, क्रू मेंबर और दूसरे कई विभागों के कर्मचारी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों ने दावा किया है कि उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें न सिर्फ खाने की दिक्कत हो रही है बल्कि उनके मकान मालिक उनके कोरोना से संक्रमित होने की संभावना के चलते मकान खाली करने को कह रहे हैं।
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने दावा किया है कि उन्हें कोरोना वायरस के संकट की वजह से हुए लॉकडाउन के कारण रहने और खाने की दिक्कत हो रही है। सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर अमनदीप सिंह ने कहा, 'किराए पर रहने वाले डॉक्टरों को उनके मकान मालिक घर खाली करने को बोल रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि वे कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं और इस वायरस को फैला सकते हैं।'
एम्स के ही एक अन्य डॉक्टर आदर्श ने कहा, 'पुलिस हमारे मैस कर्मचारियों को बाहर से खाना नहीं लाने दे रहे हैं। हम सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध करते हैं कि वह यह सुनिश्चित करें कि स्वास्थ्य कर्मचारियों को किसी भी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े।'
Correction - Another doctor, Adarsh, says, "Police are prohibiting our mess workers from bringing food from outside. We request the government and Prime Minister Narendra Modi to ensure that health professionals don't face any hardship". #COVID19 https://t.co/ysDZmfOB14 pic.twitter.com/EOc8ZUHC8A
— ANI (@ANI) March 24, 2020
गृहमंत्री अमित शाह को लिख चुके हैं पत्र
इससे पहले एम्स के डॉक्टरों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर यह शिकायत की थी कि उन्हें मकान मालिक परेशान कर रहे हैं। उन्हें जबरन मकान खाली करने के लिए कहा जा रहा है। नर्सों एवं पेरामेडिकल स्टाफ के साथ भी ऐसा ही व्यवहार हो रहा है।
मंगलवार को एम्स की रेजिडेंट डॉक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने अमित शाह को लिखे अपने पत्र में कहा है कि हमारा जो भी स्टाफ कोरोना वायरस की लड़ाई में शामिल है, उसे परेशानी उठानी पड़ रही है। जो भी डॉक्टर, नर्स एवं दूसरा स्टाफ किराए के मकान में रहता है, उसे वहां से जाने के लिए कहा जा रहा है।