कोरोनावायरस: भारत में चीन से आने वाले लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध, डीजीसीए का आदेश
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डीजीसीए की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विदेशी जो 15 जनवरी, 2020 को या उसके बाद चीन गए हैं उन्हें भारत-नेपाल, भारत-भूटान, भारत-बांग्लादेश और भारत-म्यांमार सहित किसी भी हवाई, भूमि या बंदरगाह से भारत की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।
Directorate General of Civil Aviation: Foreigners who have been to #China on or after Jan 15, 2020, are not allowed to enter India from any air, land or seaport including Indo-Nepal, Indo-Bhutan, Indo-Bangladesh or Indo-Myanmar land borders. #coronavirus pic.twitter.com/oJewcAyzvI
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) February 9, 2020
आईटीबीपी कैंप में रखे गए 406 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव
चीन से एयर इंडिया की विशेष विमान से भारत लाए गए लोगों को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के दिल्ली स्थित छावला कैंप में रखा गया है। इसे लेकर आईटीबीपी ने रविवार को जानकारी देते हुए कहा कि छावला कैंप में रखे गए 406 लोगों की देखरेख पिछले हफ्ते तय किए गए मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है।
आईटीबीपी ने बताया कि पिछले सप्ताह 7 लोगों को सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था, जो अब वापस छावला कैंप में लौट आए हैं।। स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम नियमित रूप से दौरा कर स्थिति का जायजा लेते रहती है।
आईटीबीपी ने आगे कहा कि छावला कैंप में 406 लोगों का सैंपल लिया गया और उन्हें लैब टेस्ट के लिए भेजा गया है। पहले इन सभी 406 लोगों के नमूने नकारात्मक पाए गए थे। रविवार को भी किसी व्यक्ति में इस बीमारी का लक्षण देखने को नहीं मिला है। हालात से निपटने के लिए चार आइसोलेशन बेड तैयार रखे गए हैं। इसके साथ ही चार क्रिटिकल केयर लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस भी शिविर में उपलब्ध हैं।
ITBP: Sampling of 406 people at ITBP Chhawla Camp in Delhi has been done&sent for lab test. Samples of all 406 people were found negative earlier. No fresh symptoms seen today. 4 isolation beds kept ready. 4 Critical Care Life Support Ambulances are also available at the camp. https://t.co/nik57vbpap pic.twitter.com/cHLvMDGhvC
— ANI (@ANI) February 9, 2020
ITBP: Sampling of 406 people at ITBP Chhawla Camp in Delhi has been done&sent for lab test. Samples of all 406 people were found negative earlier. No fresh symptoms seen today. 4 isolation beds kept ready. 4 Critical Care Life Support Ambulances are also available at the camp. https://t.co/nik57vbpap pic.twitter.com/cHLvMDGhvC
— ANI (@ANI) February 9, 2020
बिहार में चीन से लौटा छात्र अस्पताल में भर्ती
कोरोनावायरस का ताजा मामला अब बिहार के गया जिले में सामने आया है। यहां हाल ही में चीन से लौटे युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बिहार में एक महीने पहले चीन से लौटे छात्र टार्जन कुमार को कोरोनावायरस का संदिग्ध लक्षण पाए जने पर गया के सरकारी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। अस्पताल के सीनियर रेजिडेंट हेमंत कुमार ने बताया कि टार्जन को सर्दी और खांसी है, इसलिए हमने एहतियात बरतते हुए उसे आसोलेशन वार्ड में रखा है। वह हाल ही में चीन से लौटा है, इसलिए हम खास सतकर्ता बरत रहे हैं। उसके खून और गला का सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया है।।
चीन में मृतकों की संख्या 811 हुई
बता दें कि चीन में घातक कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 811 हो गई है और इसके संक्रमण के 37000 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने रविवार को बताया कि शनिवार को इससे 89 और लोगों की जान चली गई और 2,656 नए मामले सामने आए।
आयोग के अनुसार 31 प्रांतीय स्तर के क्षेत्रों में इससे अब तक कुल 811 लोगों की जान जा चुकी है और 37,198 मामलों की पुष्टि हुई है। उसने बताया कि शनिवार को जिन 89 लोगों की जान गई उनमें से 81 हुबेई प्रांत के थे, जहां इस विषाणु के कारण सबसे अधिक लोग मारे गए हैं। इसके अलावा दो लोग हेनान में मारे गए। हेबेई, हेइलोंगजियांग, अनहुइ, शानदोंग, हुनान और गुआंग्शी झुआंग में इससे एक-एक व्यक्ति की जान गई है।
कोरोनावायरस से हुई मौत के आंकड़े ने सार्स को छोड़ा पीछे
चीन में फैले कोरानावायरस से मरने वालों का आंकड़ा लगभग 17 साल पहले सार्स वायरस के कारण हुई मौतों से अधिक है। सार्स वायरस 2003 में फैला था और दो दर्जन से अधिक देशों में इसके मरीज पाए गए थे, सार्स के कारण 774 लोगों की जान गई थी।
चीन की लापरवाही आई सामने
जानकारों का कहना है कि कोरोना को रोकने में विफल रहे चीन में पहली बार जनता की नजरों में उनके सरकारी तंत्र की पोल खुल गई है, जिसे बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक कार्य करने में दक्ष माना जाता था। चीन के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने कार्यकाल में नौकरशाहों और टेक्नोक्रेट्स से ज्यादा पार्टी काडर को तवज्जो दी है।
इसके चलते पार्टी काडर नौकरशाही पर हावी हो गया है। नौकरशाह ऐसा कोई भी निर्णय लेने से कतराते हैं, जिससे सरकार की आलोचना हो। मशहूर चीनी लेखक और वहां की राजनीति-नौकरशाही पर नजर रखने वाले शु काइझेन का मानना है कि कोरोना वायरस के बेकाबू होने में मौजूदा प्रशासनिक हालात का बड़ा योगदान है। वुहान से फैली महामारी ने स्थानीय सरकार की कमजोर कार्रवाई और नौकरशाहों के मन में शीर्ष स्तर पर बैठे नेताओं के भय को उजागर कर दिया है।