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कोरोनावायरस से दवा कारोबार प्रभावित, जांच में जुटी सरकार

Mon, 02 Mar 2020 07:16 AM IST
संजीव कुमार झा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 02 Mar 2020 07:16 AM IST
सार

  • एंटीबॉयोटिक्स जैसी दवाओं में इस्तेमाल साम्रगी के लिए राज्यों से मांगा हिसाब
  • राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 3 मार्च तक का दिया है समय
  • 58 तरह की दवा सामग्री के भंडारण और बिक्री संबंधी जानकारी मांगी है कमेटी ने

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Coronavirus affected drug business, government under investigation
कोरोनावायरस प्रभाव - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना वायरस के चलते जहां चीन में कारोबार पूरी तरह से ठप हो चुका है। वहीं भारतीय फॉर्मा सेक्टर में इससे पडने वाले असर की जांच शुरू हो चुकी है। इसके तहत सभी राज्यों से एंटीबॉयोटिक्स जैसी दवाओं में इस्तेमाल सामग्री का भंडारण और बिक्री की जानकारी मांगी गई है।

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राष्ट्रीय फॉर्मास्यूटिकल मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) ने इसके लिए आगामी 3 मार्च तक समय भी दिया है। बताया जा रहा है कि सरकार फॉर्मास्युटिकल सेक्टर पर पडने वाले असर की जांच में जुटी है। साथ ही सरकार ये जानना चाहती है कि भारत दवाओं के आयात को लेकर चीन पर कितना निर्भर है। 
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एनपीपीए ने राज्य औषधि नियंत्रण विभागों को दिए आदेश में चीन से आयात होने वाले 58 तरह की दवा सामग्रियों का भंडारण और उनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़ी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इनमें पैरासिटामॉल, बी12, बी1, बी6, एस्पिरिन, एजिथ्रोमाइसिन, मेट्रोनिडाजोल, एमॉक्सिसिलिन, ओफ्लॉक्सासिन, सेफिक्सिमाय, लोपिनविर और राइटोनविर इत्यादि शामिल हैं। 
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दरअसल बीते कुछ वर्षों में दवा कारोबार को लेकर भारत ने काफी हद तक अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए हैं। दवाओं को बनाने में इस्तेमाल सामग्री की बड़ी खेप के उत्पादन को देश में ही बढ़ावा दिया जा रहा है। बावजूद इसके कई अति महत्वपूर्ण दवाएं हैं, जिनके निर्माण में सामग्रियां चीन से आयात होती हैं। कोरोना वायरस के चलते पिछले दो महीने से फॉर्मा सेक्टर को सबसे ज्यादा प्रभावित माना जा रहा है।

दिल्ली के भागीरथ पैलेस स्थित औषधि विक्रेता संगठन के अध्यक्ष कैलाश गुप्ता का कहना है कि कुछ दवाओं के भंडारण में कमी जरूरी देखने को मिल रही है। जनवरी और फरवरी में पैरासिटामॉल सहित कुछ दवाओं की मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। 


एनपीपीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण चीन से आने वाली आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए कमेटी ने ये जानकारी मांगी है। भारतीय बाजार में दवाओं की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि को रोकने की दिशा में ये जरूरी है। उन्होंने ये भी बताया कि इसके लिए एक फॉर्मेट को तय किया है जिसमें मौजूदा भंडारण के अलावा नवंबर 2019 और फरवरी 2020 में दवाओं की बिक्री व मांग को भी शामिल किया है। 

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