काेरोना: भारत में दूसरी लहर इतनी खतरनाक क्यों, क्या नए वेरिएंट पर होगा वैक्सीन का असर?
प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के.विजय राघवन के अनुसार संक्रमण की वर्तमान लहर एक या दो सप्ताह में कमजोर पड़ना शुरू हो सकती है।
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प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के.विजय राघवन ने बुधवार को एक साक्षात्कार में कहा कि भारत में पाए जाने वाले तथाकथित "डबल म्यूटेशन" कोरोना वायरस के खतरनाक प्रभाव और प्रसार की वजह से इसे चिंता का एक प्रकार (वेरिएंट ऑफ कंसर्न) भी माना जा सकता है। यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि यह वेरिएंट ("डबल म्यूटेशन" वेरिएंट) चिंता का एक विषय है क्योंकि अभी तक यह वेरिएंट काफी लोगों में पाया जा चुका है। इसे खतरनाक वेरिएंट सिर्फ इसलिए नहीं कहा जा रहा है क्योंकि ज्यादा संख्या में पाया गया है, बल्कि इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस म्यूटेशन की वजह से काफी लोगों में शारीरिक समस्या भी देखने को मिल रही है।
डबल म्यूटेशन, एक विशिष्ट परिवर्तनों को संदर्भित करता है, जिसे ई484क्यू (ग्लूटामेट को स्पाइक प्रोटीन के 484वें स्थान पर ग्लूटामाइन द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है) और एल452आर (452वें स्थान पर ल्यूसीन को आर्जिनिन के साथ प्रतिस्थापित किया गया है) द्वारा दर्शाया गया है। इन दोनों म्यूटेशनों की जांच की जा रही है।
नया वेरिएंट बना महाराष्ट्र में कोरोना विस्फोट का कारण
विजयराघवन कहते हैं कि 24 मार्च को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि महाराष्ट्र से आए 200 से अधिक नमूनों में यह वेरिएंट पाया गया है। बता दें मार्च महीने में शुरू हुई कोरोना वायरस की दूसरी राष्ट्रव्यापी लहर के दौरान महाराष्ट्र ही इस वेरिएंट का पहला हॉटस्पॉट बना था। 7 अप्रैल तक, देश में दर्ज होने वाले नए मामलों में से 70 फीसदी मामले अकेले महाराष्ट्र से सामने आए थे। यही कारण है कि विशेषज्ञों ने इस वेरिएंट को महाराष्ट्र में कोरोना विस्फोट का कारण माना और इसकी जांच करना शुरू कर दिया।
नए वेरिएंट पर कम असरदार हाे सकती है वैक्सीन
अभी तक बाजार में आए टीके शायद ही इस नए वेरिएंट से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। टीके कभी-कभी हल्के और मध्यम रोग को कम सुरक्षा प्रदान करते हैं लेकिन वे गंभीर रूप से बीमार होने के खतरे का जरूर टाल सकते हैं।
भारत में जल्द आ सकती है जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन
विजयराघवन कहते हैं कि मुझे उम्मीद है कि जॉनसन एंड जॉनसन और द नोवावैक्स वैक्सीन जल्द भारत में आ सकती हैं। इन वैक्सीन के आने के बाद सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने की अनुमति प्रदान कर पाएगी।
एक-दो हफ्तों में कमजोर पड़ सकता है नया वेरिएंट
प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा कि मेरा मानना है कि संक्रमण की वर्तमान लहर एक या दो सप्ताह में कमजोर पड़ना शुरू हो सकती है। कुछ सप्ताह पहले काेरोना वायरस संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए किए गए प्रयासों की वजह से बहुत जल्द इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। अगर आगे भी यह प्रयास जारी रहेंगे तो आप भविष्य में भी इसके प्रभाव देख पाएंगे।