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अनुच्छेद 370: सभी याचिकाओं पर आज से सुनवाई करेगी संविधान पीठ

Tue, 01 Oct 2019 01:03 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 01 Oct 2019 01:03 AM IST
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Constitution Bench to hear all petitions related to Article 370 from today

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, पाबंदियों और हालात से जुडे़ संबधित मामलों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेज दिया। यह पीठ इन सभी याचिकाओं पर मंगलवार से सुनवाई करेगी।

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मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने कश्मीर में तथाकथित पाबंदी लगाने, पत्रकारों की आवाजाही पर रोक और घाटी में बच्चों को नजरबंद रखे जाने सभी याचिकाओं को सुनने के लिए जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली पांच जजों की पीठ के पास मामले को भेज दिया। 
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इस संविधान पीठ में जस्टिस एसके कौल, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत भी हैं। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को जवाब दाखिल कर दिया जाएगा।
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इन याचिकाओं में बाल अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली इनाक्षी गांगुली, मोहम्मद तारिगामी, सीताराम येचुरी, गुलाम नबी आजाद, अनुराधा भसीन सहित अन्य की याचिकाएं हैं। कोर्ट ने गत शनिवार को अनुच्छेद-370 को हटाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए इस पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन किया गया था।

पूर्व नौकरशाहों, रिटायर्ड सैन्य अफसरों से लेकर नेताओं तक की हैं याचिकाएं

अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ नेशनल कॉन्फ्रेंस, सज्जाद लोन के नेतृत्व वाला जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और वकील एमएल शर्मा समेत कई लोगों ने याचिकाएं दी हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से लोकसभा सांसद मोहम्मद अकबर लोन और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस हसनैन मसूदी ने दी है। इसके अलावा, कई पूर्व नौकरशाहों और सेना के पूर्व अफसरों ने भी याचिकाएं दी हैं। इनके अलावा, नौकरशाह से नेता बने शाह फैसल और जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला राशिद ने भी याचिकाएं दी हैं।

फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी के खिलाफ याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने एमडीएमके नेता और राज्यसभा सांसद वाइको की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें वाइको ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी को चुनौती देते हुए उन्हें शीर्ष अदालत में पेश किए जाने की मांग की थी। 

जस्टिस गोगोई की पीठ ने वाइको की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि अब इसमें कुछ बचा नहीं हैं क्योंकि फारूक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा कानून के तहत नजरबंद किया गया है। जस्टिस गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एसए नजीर की पीठ ने कहा, उचित अथॉरिटी के समक्ष इसे चुनौती दी जा सकती है।

अस्पतालों में इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाओं की बहाली पर केंद्र से मांगा जवाब

जस्टिस गोगोई की पीठ ने जम्मू-कश्मीर के सभी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में हाई स्पीड इंटरनेट और लैंडलाइन फोन सेवाओं की फौरन बहाली को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। पीठ ने इस याचिका को भी कश्मीर से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ ही संविधान पीठ के पास भेज दिया। में कोर्ट से इस बारे में सरकार को निर्देश देने की अपील की गई है। 

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