Politics: संसद में घमासान का भारत जोड़ो यात्रा से क्या संबंध? कांग्रेस चीन के साथ सीमा विवाद की चर्चा पर अड़ी
भूटान की सीमा से लगते डोकलाम में चीनी सैनिकों की घुसपैठ, सैन्य अवसंरचना निर्माण के समय राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। लद्दाख में चीन के सैनिकों के साथ झड़प, चीनी सैनिकों की घुसपैठ और भारतीय भू-भाग पर कब्जे को लेकर राहुल गांधी लगातार हमलावर रहे हैं।
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कांग्रेस पार्टी चीन के साथ सीमा विवाद और तवांग के यांग्त्से में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प पर राज्यसभा में चर्चा के लिए अड़ गई है। इसके समानांतर चीन में कोरोना के विस्फोट को आधार बनाकर सरकार ने कोरोना के प्रोटोकॉल का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसके केंद्र में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को माना जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया के पत्र और सरकार के मंत्रियों के बयान को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। एक पूर्व केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि राहुल गांधी भले ही भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त हैं, लेकिन सरकार उनसे (राहुल) होने वाली घबराहट से संसद के शीतकालीन सत्र में भी बेचैन है।
राहुल गांधी यात्रा से बहुत उत्साहित हैं। भारत जोड़ो यात्रा में उमड़ रही भीड़ पर सभी की नजर है। अब यह यात्रा धीरे-धीरे सीमावर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर की ओर बढ़ रही है। कहा जा रहा है कि जम्मू से कश्मीर में श्रीनगर तक की यात्रा, उसके बाबत आने वाली सुरक्षा संबंधी कठिनाइयां, चुनौतियां केंद्र सरकार के लिए चिंता का सबब है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का सचिवालय भी इसको लेकर बहुत संवेदनशील है। इसके लिए सभी तरह के रोड-मैप पर विचार हो रहा है।
राहुल गांधी का अड़ियल रवैया भी बनेगा सरकार की सांसत
केंद्रीय सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राहुल गांधी कन्याकुमारी से लेकर अब तक की भारत जोड़ो यात्रा के लिए पूरी प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। वह इसको लेकर स्वभाव से भी अड़ियल रुख अपना रहे हैं। इसलिए जम्मू से श्रीनगर तक भारत जोड़ो यात्रा, यात्रा के माध्यम समेत अन्य पहलू से निबटना बहुत आसान नहीं है। दरअसल राहुल गांधी ने अपनी यात्रा 7 सितंबर को कन्याकुमारी से आरंभ की थी। 105 दिनों में 9 राज्यों में पदयात्रा करते हुए वह हरियाणा के नूंह जिले में हैं। 3 राज्यों में अभी इस यात्रा का करीब 525 किमी से अधिक का सफर करके 3570 किमी की दूरी को तय किया जाना है। इसमें सबसे चुनौतीपूर्ण जम्मू से श्रीनगर की यात्रा होगी। जम्मू से श्रीनगर की दूरी कोई 250किमी के करीब है।
माना जा रहा है कि पहाड़ी रास्ते वाली इस दूरी को तय करने में कम से कम 15 दिन लग सकते हैं। दूसरे अगले 44 दिनों का समय भी कड़ाके की ठंड वाला है। करीब डेढ़ सौ ऐसे प्रतिबद्ध लोग हैं जो कन्याकुमारी से लगातार राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हैं। ये लोग किसी भी शर्त से समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में मौसम की दुश्वारियां, यात्रा की कठिनाई, लोगों का भारत जोड़ो यात्रा को लेकर बढ़ता उत्साह सब केन्द्र सरकार की चिंता बढ़ाने वाला है।
क्या कोरोना के बहाने यात्रा में उमड़ती भीड़ कम करने की मंशा है?
पवन खेड़ा कहते हैं कि पीएम मोदी की जनसभा में भीड़ नहीं आ रही है तो हम क्या करें? केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री के भारत जोड़ो यात्रा को लेकर लिखे गए पत्र को कांग्रेस के नेता इसी नजरिए से देख रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व सांसद कमल किशोर(कमांडो) कहते हैं कि राहुल गांधी ने ही 2020 में सबसे पहले कोरोना के प्रति सरकार को आगाह किया था। तब तो सरकार ने सुना नहीं, अब उपदेश दे रही है। कमांडो कहते हैं कि भारत में जब कोरोना पीक पर था उसके मानदंड का पालन करते हुए राहुल गांधी ने कई और गंभीर मुद्दे उठाए थे। लेकिन तब प्रधानमंत्री ने खुद इस पर ध्यान नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने बंगाल और बिहार विधानसभा चुनाव की जनसभाओं में इसका कितना पालन किया था, उन्हें जनता को बताना चाहिए? पवन खेड़ा जवाब में कहते हैं कि सरकार कोई भी एक मानक बनाए। गाइड लाइन तय करे। वह कहते हैं कि कांग्रेस राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करती। केन्द्र सरकार जो भी गाइड लाइन तय करेगी, कांग्रेस उसके पालन में आगे रहेगी।
कांग्रेस ने चीन सीमा विवाद का मुद्दा उठाकर बना रखा है सत्ता पक्ष पर दबाव
कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सरकार से चीन के मुद्दे पर चर्चा पर अड़े हैं। चीन के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बयान देकर राजनीति का तड़का लगा दिया है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी भी चाहती हैं कि चीन के मुद्दे पर केन्द्र सरकार को घेरने में कोई कसर न छोड़ी जाए। हिमाचल के प्रभारी राजीव शुक्ला को यह मुद्दा ठीक लग रहा है। वह कहते हैं कि जब चर्चा होगी तब मीडिया को भी कुछ नया पता चलेगा। आखिर सरकार चर्चा से क्यों भाग रही है? क्या दाल में कुछ काला है? यह कहकर राजीव शुक्ला मुस्कराते हुए आगे बढ़ जाते हैं। विपक्ष इस मामले में विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान से संतुष्ट नहीं है। दरअसल यह एक ऐसा मुद्दा है जहां सरकार वास्तव में दबाव महसूस कर रही है। क्योंकि प्रधानमंत्री ने ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक वार्ता प्रक्रिया शुरू की थी और शी जिनपिंग के दौर में ही दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर आमने सामने हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर को कहना पड़ रहा है कि मौजूदा समय में चीन की सीमा पर अब तक की सबसे बड़ी संख्या में भारतीय सेना तैनात है।
आखिर क्या है राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और चीन का संबंध?
भूटान की सीमा से लगते डोकलाम में चीनी सैनिकों की घुसपैठ, सैन्य अवसंरचना निर्माण के समय राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। लद्दाख में चीन के सैनिकों के साथ झड़प, चीनी सैनिकों की घुसपैठ और भारतीय भू-भाग पर कब्जे को लेकर राहुल गांधी लगातार हमलावर रहे हैं। यह तीसरा वाकया है जब तवांग के यांग्त्से में भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच में झडप की स्थिति आई है। इसके अलावा राहुल गांधी के मुताबिक चीन भारत से युद्ध की तैयारी कर रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रीय सुरक्षा, अस्मिता और संप्रभुता को गर्वीले अंदाज में पेश करने में दिक्कतें आ रही हैं। सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से अपने लिए चुनौतीपूर्ण मान रहा है। दूसरे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर सरकार इसे और इसके स्वरूप को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सीमित करने के उपायों पर भी विचार कर रही है।
यह कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों को पता है कि भारत जोड़ो यात्रा को सीमित करने के लिए सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को केन्द्र में रखेगी। इसके सामानांतर भाजपा के रणनीतिकार राहुल गांधी की यात्रा और राहुल गांधी की सुरक्षा चिंताएं पैदा करने की मंशा को आधार बनाकर निशाना बनाएंगे। यही वजह है कि चीन की घुसपैठ का मुद्दा उठते ही सत्ता पक्ष के मंत्री और नेता अपने निशाने पर मुख्य रूप से राहुल गांधी को ही लेते हैं। यहां कांग्रेस पार्टी और उसके नव निर्वाचित अध्यक्ष के प्रति सत्ता पक्ष कम और न के बराबर हमलावर रहता है। लिहाजा दोनों दलों की तरफ से अपने अपने पक्ष में राजनीतिक अवधारणाओं को मजबूत आधार देने के प्रयास लगातार तेज हो रहे हैं।