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उत्तर प्रदेश में राजनीति का सुर साधने में जुटी कांग्रेस
ब्यूरो / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 13 Apr 2016 03:45 AM IST
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उत्तर प्रदेश में राजनीतिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए कांग्रेस ने पहल तेज कर दी है। पार्टी महासचिव और राज्य के प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री, प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री के साथ जहां जमीनी हालात का जायजा ले रहे हैं, वहीं शीर्ष स्तर पर कांग्रेस राज्य में असरदार चेहरे की तलाश कर रही है। इस कड़ी में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का भी नाम भी प्रमुख है।
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शीला दीक्षित की दस जनपथ में अच्छी पैठ है। दिल्ली में 15 साल मुख्यमंत्री रहने के दौरान उनके समय में दिल्ली में काफी विकास हुआ। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के एक धड़े का कहना है कि शीला दीक्षित का ससुराल कानपुर में है।
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वह स्व. पंडित उमाशंकर दीक्षित की बहू हैं। लिहाजा शीला दीक्षित को 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अहम जिम्मेदारी देने का लाभ मिल सकता है। खुद शीला भी इस तरह की किसी संभावना से इनकार नहीं कर रही हैं। शीला के अलावा कांग्रेस राज्य में कुछ अन्य नामों पर भी विचार कर रही है।
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दरअसल उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रियंका गांधी की भी काफी दिलचस्पी रहती है। प्रियंका कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की विश्वसनीय सलाहकार भी हैं। बताया जाता है कि इस क्रम में प्रियंका लगातार राज्य के नेताओं से नवीनतम जानकारियां ले रही हैं।
कांग्रेस पार्टी के राज्य में प्रचार प्रसार के लिए आए प्रशांत किशोर के भी वह लगातार संपर्क में है। इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी राज्य में सहयोगी दलों के साथ गठजोड़ की भी संभावना तलाश रही है।
राज्य में राजनीतिक गठजोड़ को लेकर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और जदयू लगातार संपर्क में हैं। जदयू और राष्ट्रीय जनता दल के बीच भी एक समीकरण बन रहा है। कांग्रेस पार्टी मुख्यालय सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस पर लगातार निगाह बनाए है।
इस तरह की संभावना है कि इनलो, रालोद, राजद, जदयू साथ आकर साझा मंच तैयार कर सकते हैं और इन दलों के साथ कांग्रेस राजनीतिक समझौता कर सकती है। रहा सवाल समाजवादी पार्टी और बसपा से राजनीतिक सहयोग का तो अभी इसकी कोई संभावना नहीं है।