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उड़ीसा में बीजेडी-बीजेपी के खिलाफ मैदान में उतरेगी कांग्रेस, सत्ता विरोधी लहर का उठायेगी फायदा

Wed, 26 Sep 2018 05:28 AM IST
अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली। 
अनूप वाजपेयी, नई दिल्ली।  Updated Wed, 26 Sep 2018 05:28 AM IST
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congress to fight Odisha assembly polls alone 
प्रतीकात्मक तस्वीर
कांग्रेस ने उड़ीसा में अकेले ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला कर लिया है। उड़ीसा में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव भी होगें। लिहाजा त्रिकोणीय मुकाबले में पार्टी की रणनीति बीजेडी-भाजपा का विरोध है। 
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कांग्रेस मानकर चल रही है कि भाजपा बीजेडी को जानबूझ कर निशाने पर लेकर चल रही है ताकि भाजपा के खिलाफ वोट बीजेडी और बीजेडी के खिलाफ वोट भाजपा को मिल जाए और मौका आने पर एक-दूसरे का समर्थन कर सकें। उड़ीसा के प्रभारी जितेंद्र सिंह का कहना है कि कांग्रेस ने उड़ीसा में बिना किसी तालमेल के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है।  
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कांग्रेस पहले ये मानकर चल रही थी कि बीजेडी की भाजपा से नाराजगी के चलते उसे साथ लेकर चला जा सकता है लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव और मोदी सरकार के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बीजेडी ने जिस तरह अंतिम समय में एनडीए के साथ ही जाने का फैसला लिया था उसके बाद कांग्रेस ने उड़ीसा में अकेले ही मैदान में उतरने और अपनी ताकत आजमाने का मन बना लिया था। 
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पार्टी मानती है कि भाजपा जिस तरह बीजेडी पर हमला बोल रही है वो नूराकुश्ती है ताकि मतदाता भाजपा और बीजेडी को आमने-सामने मानकर फैसला करे और बाद में अपनी आवश्यकता के अनुरूप दोनों एक दूसरे के मददगार बने रहें। कांग्रेस प्रभारी का कहना है कि हमारे लिए दोनों ही दल एक समान हैं इसी को ध्यान में रखकर ही काम कर रहे हैं। चूंकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने हैं इसलिए हमने विधानसभाओं में कार्यक्रम शुरू किए हैं।       

दरअसल उड़ीसा की कुल 21 लोकसभा सीटों में कांग्रेस के पास एक भी नहीं है। 2014 में बीजेडी को 20 और एक सीट भाजपा को मिली थी। वहीं 147 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या मात्र 16 है। 117 सीट बीजेडी और भाजपा के दस विधायक हैं। 

कांग्रेस को लगता है कि उड़ीसा में जमीनी हकीकत को देखें तो कांग्रेस के विधायक भाजपा से अधिक हैं। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा उड़ीसा से सिर्फ एक सांसद ही जिता सकी थी। ऐसे में बीजेडी की सत्ता के खिलाफ जो माहौल है उसमें पैठ बनाई जाए। इसी को ध्यान में रखकर कांग्रेस आगे बढ़ रही है और ये साबित करना चाहती है कि बीजेडी का झुकाव भाजपा की ओर ही रहा है।   

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