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सीटों पर सहमति न होने से तेलंगाना में कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन खतरे में

Fri, 02 Nov 2018 05:14 AM IST
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, नई दिल्ली Updated Fri, 02 Nov 2018 05:14 AM IST
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Congress-TDP alliance could be broken due to disagreement on seat sharing

जहां बृहस्पतिवार को दिल्ली में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मिलकर देशव्यापी महागठबंधन बनाने की कवायद कर रहे थे वहीं तेलंगाना में दोनों दलों की राज्य इकाइयां एक दूसरे के खिलाफ तलवार चला रही थीं। सात दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर सहमति न होने पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और तेलंगाना जन समिति के साथ उनका गठबंधन टूट के कगार पर है।

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अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन करने वाली जन समिति ने पंद्रह सीटें मांगी थीं। कांग्रेस नौ देने को तैयार है। लेकिन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर एम कोडंडरम का कहना है कि उनमें से छह ऐसी सीटें हैं जिन पर उनके उम्मीदवारों की हार निश्चित है। यानी दरअसल उसके खाते में राज्य की 119 में से केवल तीन सीटें आ रही हैं।। इन छह में सिद्दीपेट सीट सत्तारूढ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) का गढ है तो मलकापेट और चंद्रयानगुट्टा इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) की।
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यही हाल सीपीआई का भी है। उसे पांच सीटें चाहिए थी लेकिन कांग्रेस केवल दो देने को तैयार थी। अब सीपीआई के राज्य सचिव सी वेंकट रेड्डी ने गुरूवार को  चेतावनी दी है कि यदि अगले दो-तीन दिन में यदि सीटों का बंटवारा तय नहीं हुआ तो उनकी पार्टी टीडीपी और टीजेएस के साथ मिलकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी।

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राहुल व चंद्रबाबू की मुलाकात आखिरी आशा

राहुल और चंद्रबाबू नायडू की बृहस्पतिवार को हुई मुलाकात से तेलंगाना में विपक्षी एकता की बुझती उम्मीदों को आशा की किरण दिख रही है। सीपीआई के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि संभव है कि दोनों नेताओं के बीच सीटों पर सहमति बन गई हो। वरना राजस्थान, छत्तीसगढ और मध्य प्रदेश की तरह तेलंगाना में भी विपक्षी एकता केवल मृग मरीचिका ही साबित होगी।

पांच कोणीय मुकाबले की संभावना 
यदि इन दलों का कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं बन पाता है तो तेलंगाना में पांच दलों के बीच मुकाबले होंगे - टीआरएस, कांग्रेस, बीजेपी, टीडीपी-सीपीआई-टीजेएस गठबंधन के अलावा सीपीएम के नेतृत्व में बना स्वयंसेवी संगठनों का गठबंधन। तब सभी दलों का गणित बिगड़ सकता है।

पिछली बार के नतीजे

पिछले चुनाव में टीआरएस को राज्य की 119 में से 63 सीटें मिली थीं। कांग्रेस 21, टीडीपी को 15, एआईएमआईएम को 7, बीजेपी को 5, वाईएसआर कांग्रेस को 3, बीएसपी को 2 और सीपीआई, सीपीएम और निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी।

लेकिन टीआरएस ने कांग्रेस के आठ, और टीडीपी के 13 विधायकों को तोड़ लिया था। साथ ही वाईएसआर कांग्रेस, बीएसपी और सीपीआई के सभी विधायकों के साथ एक निर्दलीय विधायक को भी दल बदल करा कर 119 सदस्यों की विधानसभा में  टीआरएस के विधायकों की संख्या 90 पहुंचा दी।

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