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पंजाब में आतंकवाद को फिर हवा देने की साजिश पर मोदी सरकार खामोश क्यों: कांग्रेस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 13 Aug 2018 11:30 AM IST
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protest in london
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लंदन में खालिस्तान समर्थकों की रैली को लेकर कांग्रेस ने आज भाजपा, अकाली दल और मोदी सरकार पर निशाना साधा है। साथ ही सवाल किया कि भाजपा ने पंजाब में आतंकवाद को फिर से हवा देने की खतरनाक साजिश पर इन्होंने चुप्पी क्यों साध रखी है।
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बता दें कि तराफालगार स्क्वॉयर पर रविवार को सैकड़ों लोगों ने खालिस्तान के समर्थन में ‘लंदन डिक्लयरेशन फॉर ए रेफरेंडम-2020’ के नाम से रैली निकाली, जिसमें अप्रवासी पाकिस्तानी भी शामिल रहे। इस रैली के वक्ताओं में पाकिस्तानी मूल का ब्रिटिश सांसद नजीर अहमद भी शामिल था।
दूसरी तरफ सैकड़ों भारत समर्थकों ने भी आगामी स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मनाने के नाम पर एक समारोह का आयोजन रैली के दौरान वहीं पर करते हुए खालिस्तान समर्थकों का विरोध भी जताया।
जनमत संग्रह की मांग कर रही भारत विरोधी रैली से थोड़ा दूर ‘वी स्टैंड विद इंडिया’ और ‘लव माई इंडिया’ नाम से आयोजित अनिवासी भारतीयों की तरफ से भारत समर्थक समारोहों का आयोजन स्क्वॉयर के एक निश्चित दायरे तक ही सीमित रहा।
भारत समर्थक समूहों ने भारतीय तिरंगे को हवा में फहराया और ‘इंडिया जय हो’ तथा ‘वंदे मातरम’ लिखे बैनर लहराए। भारत समर्थकों ने जमकर ढोल बजाते हुए भारत विरोधी समूह की रैली में भाषण देने वाले कुछ लोगों की बात उनके समर्थकों तक नहीं पहुंचने देने का प्रयास किया।
भारत समर्थक प्रदर्शनकारियों में से एक नवदीप सिंह ने कहा कि भारतीय सिख जनमत संग्रह-2020 नहीं चाहते। वे जानते हैं कि ये जनमत संग्रह क्या है और इसके आयोजन के पीछे कौन व क्यों है। दूसरी तरफ खालिस्तान समर्थकों ने भी बैनर लहराए, जिन पर खालिस्तान जिंदाबाद लिखा हुआ था और भारत विरोधी स्लोगन लिखे हुए थे।
हालांकि ब्रिटिश सिख एसोसिएशन के चेयरमैन रामी रांगेर ने इस रैली को खारिज किया। उन्होंने इसे चंद गैरचयनित और स्वयं नियुक्त सिखों का समूह करार दिया। साथ ही कहा कि अधिकतर सिख बंटवारे के खिलाफ हैं।
ब्रिटिश सरकार बोली, हमारे यहां सबको आजादी
भारत विरोधी रैली के बारे में ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन में जनता को एकत्र होने और कानून के दायरे में रहकर अपने विचारों का प्रदर्शन करने का अधिकार है। उधर, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस रवैये पर निराशा जताई।
मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, हमने कहा है कि ये लोग हिंसा, अलगाववाद और घृणा फैलाने की तलाश में हैं और हम उनसे (ब्रिटिश सरकार से) इन मामलों पर निर्णय लेते समय संबंधों पर दीर्घकालिक प्रभावों के दृष्टिकोण से देखने की आशा करते हैं।
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As a sinister conspiracy is hatched to revive militancy in Punjab, why are BJP-Akali Dal mum?
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Why has the 56’ Modi Govt been stunned into a conspiratorial silence?
क्या ये देश के टुकड़े करने वाली षड्यंत्रकारी गतिविधि नहीं? तो फिर चुप्पी क्यों?https://t.co/9Ue5CDRakW— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) August 13, 2018
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बता दें कि तराफालगार स्क्वॉयर पर रविवार को सैकड़ों लोगों ने खालिस्तान के समर्थन में ‘लंदन डिक्लयरेशन फॉर ए रेफरेंडम-2020’ के नाम से रैली निकाली, जिसमें अप्रवासी पाकिस्तानी भी शामिल रहे। इस रैली के वक्ताओं में पाकिस्तानी मूल का ब्रिटिश सांसद नजीर अहमद भी शामिल था।
दूसरी तरफ सैकड़ों भारत समर्थकों ने भी आगामी स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मनाने के नाम पर एक समारोह का आयोजन रैली के दौरान वहीं पर करते हुए खालिस्तान समर्थकों का विरोध भी जताया।
जनमत संग्रह की मांग कर रही भारत विरोधी रैली से थोड़ा दूर ‘वी स्टैंड विद इंडिया’ और ‘लव माई इंडिया’ नाम से आयोजित अनिवासी भारतीयों की तरफ से भारत समर्थक समारोहों का आयोजन स्क्वॉयर के एक निश्चित दायरे तक ही सीमित रहा।
भारत समर्थक समूहों ने भारतीय तिरंगे को हवा में फहराया और ‘इंडिया जय हो’ तथा ‘वंदे मातरम’ लिखे बैनर लहराए। भारत समर्थकों ने जमकर ढोल बजाते हुए भारत विरोधी समूह की रैली में भाषण देने वाले कुछ लोगों की बात उनके समर्थकों तक नहीं पहुंचने देने का प्रयास किया।
भारत समर्थक प्रदर्शनकारियों में से एक नवदीप सिंह ने कहा कि भारतीय सिख जनमत संग्रह-2020 नहीं चाहते। वे जानते हैं कि ये जनमत संग्रह क्या है और इसके आयोजन के पीछे कौन व क्यों है। दूसरी तरफ खालिस्तान समर्थकों ने भी बैनर लहराए, जिन पर खालिस्तान जिंदाबाद लिखा हुआ था और भारत विरोधी स्लोगन लिखे हुए थे।
हालांकि ब्रिटिश सिख एसोसिएशन के चेयरमैन रामी रांगेर ने इस रैली को खारिज किया। उन्होंने इसे चंद गैरचयनित और स्वयं नियुक्त सिखों का समूह करार दिया। साथ ही कहा कि अधिकतर सिख बंटवारे के खिलाफ हैं।
ब्रिटिश सरकार बोली, हमारे यहां सबको आजादी
भारत विरोधी रैली के बारे में ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन में जनता को एकत्र होने और कानून के दायरे में रहकर अपने विचारों का प्रदर्शन करने का अधिकार है। उधर, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस रवैये पर निराशा जताई।
मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, हमने कहा है कि ये लोग हिंसा, अलगाववाद और घृणा फैलाने की तलाश में हैं और हम उनसे (ब्रिटिश सरकार से) इन मामलों पर निर्णय लेते समय संबंधों पर दीर्घकालिक प्रभावों के दृष्टिकोण से देखने की आशा करते हैं।