कांग्रेस ने बोला केंद्र पर हमला, कहा- नोटबंदी-जीएसटी ने खत्म कर दीं 35 लाख नौकरियां
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कांग्रेस पार्टी ने नौकरियों को लेकर एनडीए-भाजपा सरकार पर हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को एक प्रेसवार्ता में कहा, नोटबंदी और जीएसटी ने 35 लाख नौकरियां खत्म कर दी हैं। यह रिपोर्ट ऑल इंडिया मैनुफैक्चरर्स ऑर्गेनाईजेशन ने जारी की है। नीति आयोग ने भी फरवरी, 2018 में स्वीकार किया कि भारत 'असंतोषजनक और कम नौकरियों' से त्रस्त है। कांग्रेसी नेता के मुताबिक, ये सब पीएम नरेंद्र मोदी की गलत नीतियों का नतीजा है।
आईएलओ के अनुसार, 2019 तक 77 फीसद भारतीय कर्मचारियों के रोजगार पर खतरे की तलवार लटकी रहेगी। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) ने पिछले साल जुलाई में कहा था कि भारत के 6.3 करोड़ छोटे व्यवसायों में से पांचवां हिस्सा अर्थव्यवस्था में 32 फीसद का योगदान देता है। इससे 11.1 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है, लेकिन इसके फायदे में जीएसटी लागू होने के बाद 20 प्रतिशत की कमी आई है। हजारों कामगारों को नौकरी से निकालना पड़ा है।
सुरजेवाला ने कहा, मोदी सरकार ने सत्ता क्या संभाली, नौकरियों पर ग्रहण लग गया। मोदी ने हर साल दो करोड़ नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद नौकरियां तो मिली नहीं बेरोजगारी पिछले 45 सालों में अब तक की सबसे ज्यादा हो गई है। आर्थिक वृद्धि दर पांच साल में सबसे कम है। खेती की आय में वृद्धि दर 14 साल में सबसे कम है।
नए निवेश 14 साल में सबसे कम हैं। निजी निवेश सात साल में सबसे कम हैं। औद्योगिक वृद्धि नई गिरावट के साथ 1.7 फीसद पर पहुंच गई है, जबकि यह एक साल पहले 7.5 फीसद थी। घरेलू बचत 20 साल में सबसे कम देखी जा रही है। एफडीआई वृद्धि पांच साल में सबसे कम है। प्रमुख सेक्टरों की बढ़ोत्तरी दो साल में सबसे कम है। निर्यात की वृद्धि (यूपीए सरकार की तुलना में) 15 गुना गिरी है।
सुरेजवाला ने कहा, ये है मोदी सरकार का कारनामा
'नोटबंदी की मोदी निर्मित आपदा' ने अकेले 1.5 करोड़ नौकरियां छीन लीं और देश की जीडीपी को दो फीसद नीचे गिरा दिया। इससे छोटे व मंझोले धंधों को तीन लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके साथ त्रुटिपूर्ण जीएसटी के चलते कारोबार बर्बाद हुआ और नौकरियां खत्म हो गईं। सीएमआईई के अनुसार, भारत में अकेले 2018 में 1.1 करोड़ नौकरियों का नुकसान हुआ।
भारत के गांवों में स्थिति ज्यादा गंभीर रही। गांवों में अनुमानित 91 लाख नौकरियां खत्म हुईं और शहरों में लगभग 18 लाख नौकरियां खत्म हो गईं। 88 लाख से अधिक महिलाओं की नौकरियां पिछले साल गईं, जो कुल खोई नौकरियों की 80% हैं। रेलवे की 90 हजार नौकरियों के लिए 2.8 करोड़ युवाओं ने आवेदन दिया, जिनमें अनेक पीएचडी/एमए/एमएससी/एमफिल उपाधिधारक भी थे।
यूपी में चपरासी के 386 पदों के लिए 23,00,000 युवाओं ने आवेदन किया। महाराष्ट्र में कांस्टेबल के 1137 पदों के लिए बीई/एमबीए/एलएलबी/एमबीबीएस उपाधिधारक 2,00,000 युवाओं ने आवेदन किया।हरियाणा में चपरासी/माली/चौकीदार के 18000 पदों के लिए पीएचडी/एमएससी/एमए (मेकेनिकल)/एमबीए/एलएलबी योग्यता वाले 18 लाख युवाओं ने आवेदन किया।
'कांग्रेस नौकरियों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है'
भारत में नई नौकरियों की वार्षिक मांग अनुमानित रूप से 1.2 करोड़ प्रतिवर्ष है, लेकिन नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं। मोदी सरकार ने असंगठित क्षेत्र, खेती-बाड़ी और एमएसएमई को बर्बाद कर दिया, जहां 90 फीसदी नौकरियां निर्मित होती हैं। कांग्रेस पार्टी खेती-बाड़ी, असंगठित क्षेत्र और एमएसएमई को अपने नौकरी निर्माण के एजेंडे के केंद्र में रखेगी। इसके अलावा पूंजी, निवेश एवं उचित रियायतों द्वारा संगठित क्षेत्र के तीव्र विस्तार के लिए काम करेगी।