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आचार्य प्रमोद कृष्णम का आरोप : वामपंथियों ने किया कांग्रेस पर कब्जा, पार्टी में भाजपा के एजेंट सक्रिय
Tue, 24 May 2022 06:36 AM IST
देव कश्यप
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 24 May 2022 06:36 AM IST
सार
कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी में कुछ नेता भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं और उनकी हरकतों से पार्टी को भारी नुकसान हो रहा है।
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आचार्य प्रमोद कृष्णम
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस पर कुछ वामपंथी दल के लोगों ने कब्जा कर लिया है जो स्वयं को ज्यादा सेकुलर साबित करने के लिए हिंदू आस्थाओं का लगातार अपमान कर रहे हैं। इससे कांग्रेस पार्टी का नुकसान हो रहा है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी में कुछ नेता भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं और उनकी हरकतों से पार्टी को भारी नुकसान हो रहा है। पार्टी छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ने जा रहे हैं और उनके बारे में यह अफवाह वही लोग फैला रहे हैं जिन्हें कांग्रेस के मूल सिद्धांतों में भरोसा नहीं है।
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आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस महात्मा गांधी, नेहरू और इंदिरा गांधी के आदर्शों वाली पार्टी रही है। महात्मा गांधी स्वयं भगवान राम के सबसे बड़े उपासक थे और इंदिरा गांधी देवरहा बाबा की भक्त थीं। सोनिया गांधी कुंभ में स्नान कर चुकी हैं तो राहुल गांधी भी स्वयं को बार-बार शिवभक्त साबित कर चुके हैं। लेकिन उनकी पार्टी के कुछ लोग जो न तो कांग्रेस को समझते हैं और न ही संविधान की धर्म निरपेक्ष भावना का सही अर्थ समझते हैं, वे स्वयं को ज्यादा सेकुलर साबित करने के लिए हिंदू आस्थाओं का अपमान करने में जुटे हुए हैं। इससे कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि देश के संविधान को सेकुलर बनाया गया है, लेकिन सेकुलर होने का अर्थ किसी धर्म का अपमान करना नहीं है। यदि ऐसा होता तो संविधान के पृष्ठों पर भगवान राम के दरबार का चित्र अंकित न होता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी पर संस्कृत में जहां धर्म होता है, वहीं विजय होती है न लिखा होता। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सहित विपक्ष के नेताओं को समझना चाहिए कि सेकुलर होने का अर्थ किसी धर्म का विरोध करना नहीं है।