मोदी के करिश्मे, संसाधन के मुकाबले कांग्रेस का किसान और गरीब कार्ड
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कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा के संसाधनों की ताकत, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह समेत केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की फौज की राज्य में लगातार मौजूदगी और सबसे बढ़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के धुआंधार करिश्माई प्रचार से अगर कांग्रेस मुकाबला कर पा रही है तो किसानों की कर्ज माफी, गरीबों को जिला अस्पतालों में मुफ्त जांच और दवाई, स्कूल में गरीब बच्चों को दूध, शहरों में गरीबों के लिए इंदिरा कैंटीनों में सस्ता भोजन, गरीबों को मुफ्त चावल देने की योजनाओं की कामयाबी के दम पर टिकी हुई है। इन योजनाओं ने कांग्रेस और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को गावों में किसानों और कमजोर तबकों में खासा लोकप्रिय कर दिया है।
बेंगलुरु से मैसूर, हासन, चिकमंगलूर, शिमोगा से श्रंगेरी तक वैसे तो ज्यादार सीटों पर जातीय गोलबंदी साफ दिखती है लेकिन किसानों की कर्जमाफी को लेकर हर जाति के किसान सिद्धारमैया और राहुल गांधी का धन्यवाद करते हैं।
यहां तक कि जिन किसानों को इसका लाभ मिला है उनमें कुछ तो राहुल को अगला प्रधानमंत्री तक देखने की बात भी करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि राज्य में दोबारा कांग्रेस सरकार बनने और केंद्र में राहुल के पीएम बनने पर किसानों को और भी राहत मिलेगी। कुछ इसी तरह की बात दूसरी लोकलुभावन योजनाओं को लेकर भी सुनाई पडती है।
भाजपा की सबसे बड़ी दिक्कत येदियुरप्पा का करिश्मा कमजोर होना
वहीं भाजपा की सबसे बड़ी दिक्कत सिद्धारमैया के मुकाबले में वीएस येदियुरप्पा का करिश्मा कमजोर होना भी है। कई भाजपा समर्थक एसे भी लो हैं जो नरेंद्र मोदी को देश के लिए तो अच्छा मानते हैं,लेकिन कर्नाटक में येदियुरप्पा को पसंद नहीं करते।इसलिए भाजपा को वोट नहीं देने की बात करते हैं।
मंड्या जिले के किक्केरी गांव में चाय की दुकान चलाने वाले महादेव कहते हैं कि उन्हें नरेंद्र मोदी बेहद पसंद हैं, लेकिन येदियुरप्पा की वजह से वह भाजपा को वोट नहीं देंगे। जब लोकसभा चुनाव होगा तो मोदी को जिताने के लिए भाजपा को वोट देंगे। उनके पास खड़े हुए नागेंद्र, रघु भी सहमति में सिर हिलाते हैं।
मैसूर से शिवमोगा जाते हुए मंड्या जिले के केआरपेटे क्षेत्र के मुरुकनहर्ली गांव में किसानों के झुंड से मुलाकात होती है। खेत में काम करके पेड़ की छांव में सुसस्ताते हुए किसान वोक्कालिंगा समुदाय के हैं।
आम तौर पर वोक्कालिंगा को एचडी देवेगौड़ा के जद(एस) का समर्थक माना जाता है, लेकिन ये सारे किसान कर्ज माफी को लेकर सिद्धारमैया और राहुल गांधी की तारीफ करते हैं। कुछ और आगे चलने पर किक्केरी बडा गांव है जहां करीब 12 हजार मतदाता हैं जिनमें बहुसंख्यक वोक्कालिंगा हैं।
किसानों को फिर से कांग्रेस से उम्मीद
कारण सिद्धारमैया सरकार द्वारा किसानों के 50 हजार रुपए तक के कर्ज को माफ करना है। उन्हें उम्मीद है कि दोबारा कांग्रेस सरकार बनने पर और कर्जे भी माफ हो सकते हैं। मल्लेगौड़ा कहते हैं कि वह खुद वोक्कालिंगा हैं जबकि सिद्धारमैया कुरबा हैं, लेकिन वह उन्हें ही वोट देंगे।
मुरुकनहर्ली के प्रकाश, धनंजय और योगेश वोक्कालिंगा किसान हैं। कहते हैं कि यूपीए सरकार में सोनिया और मनमोहन ने किसानों के कर्जे माफ किए थे। उम्मीद है कि राहुल भी पीएम बनकर किसानों को राहत देंगे।
यह कहने पर कि भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में किसानों एक लाख रुपए के कर्ज माफ करने का वादा किया, धनंजय कहते हैं कि भाजपा वाले सिर्फ बातें करते हैं। वो अगर एक लाख माफ करेंगे तो कांग्रेस दो लाख माफ कर देगी।
चिकमंगलूर जिले के कडूर, बिरूर और तारिकेरे में सड़क किनारे बैठे मजदूर हों या श्रंगेरी विधानसभा क्षेत्र के मुत्तिनाकोप्पा गांव में मिले नदीम, इम्तियाज, पद्मनाभ और अनिल हों, सब सस्ते और मुफ्त चावल, निशुल्क इलाज, सस्ती दवाई, बच्चों को दूध और कर्ज माफी के लिए सिद्धारमैया सरकार की तारीफ करते मिलते हैं।