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AG Perarivalan Released: कांग्रेस ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार, कहा- आतंकवाद को लेकर सरकार का रवैया निंदनीय
Wed, 18 May 2022 06:53 PM IST
विजय पुंडीर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Wed, 18 May 2022 06:53 PM IST
सार
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी ए.जी. पेरारीवलन की रिहाई के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निंदनीय और बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इसके लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
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ए.जी. पेरारीवलन के परिवार से तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने मुलाकात की।
- फोटो : ANI
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विस्तार
कांग्रेस ने बुधवार को राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी ए.जी. पेरारीवलन की रिहाई पर दुख जताया है। कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसी स्थिति पैदा की कि सुप्रीम कोर्ट को यह निर्यण देना पड़ा। मोदी सरकार की खिंचाई करते हुए कांग्रेस ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे को क्षुद्र और सस्ती राजनीति के लिए रिहा किया गया है।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कोर्ट के फैसले को निंदनीय और बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि एक आतंकवादी के साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार करना चाहिए। राजीव गांधी के हत्यारे को रिहा करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आज हमें गहरा दुख पहुंचा है। आज भारत का हर नागरिक इस फैसले की वजह से निराश और गुस्सा है।
सुरजेवाला ने कहा कि आज देश के लिए दुखद दिन है। राजीव गांधी एक कांग्रेस नेता नहीं देश के प्रधानमंत्री थे। ना केवल कांग्रेस के हर कार्यकर्ता बल्कि भारत और भारतीयता में विश्वास रखने वाले हर भारतीय में, जो उग्रवाद और भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाली हर ताकत के खिलाफ लड़ने में विश्वास रखता है, दुख और रोष है।
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उन्होंने कहा कि कोर्ट के इस फैसले ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाले हर व्यक्ति की आत्मा को चोट पहुंचाई है। अगर देश के प्रधानमंत्री के हत्यारे को छोड़ा जा सकता है तो भारत की जेलों में ऐसे काफी कैदी हैं जो आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं उन सभी को छोड़ा जा सकता है। इसके लिए बीजेपी जिम्मेदार है। आतंकवाद को लेकर केंद्र सरकार का रवैया निंदनीय है। राज्यपाल और राष्ट्रपति के द्वारा निर्णय ना लेने की वजह से कोर्ट ने रिहा किया है।
बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्ति का इस्तेमाल करते हुए न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को राजीव गांधी हत्याकांड में 31 साल से जेल की सजा काट चुके ए जी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया।
पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका
पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था कि तमिलनाडु सरकार ने उसे रिहा करने का फैसला लिया था, लेकिन राज्यपाल ने फाइल को काफी समय तक अपने पास रखने के बाद राष्ट्रपति को भेज दिया था। यह संविधान के खिलाफ है। 11 मई को हुई सुनवाई में केंद्र ने पेरारिवलन की दया याचिका राष्ट्रपति को भेजने के तमिलनाडु के राज्यपाल के फैसले का बचाव किया था।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ए एस बोपन्ना की पीठ को बताया था कि केंद्रीय कानून के तहत दोषी ठहराए गए शख्स की सजा में छूट, माफी और दया याचिका के संबंध में याचिका पर केवल राष्ट्रपति ही फैसला कर सकते हैं।
इस पर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया था कि अगर इस दलील को स्वीकार कर लिया जाता है तो राज्यपालों की ओर से दी गई अब तक की छूट अमान्य हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर राज्यपाल पेरारिवलन के मुद्दे पर राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिश को मानने को तैयार नहीं हैं तो उन्हें फाइल को पुनर्विचार के लिए वापस मंत्रिमंडल में भेज देना चाहिए था। पेरारिवलन हत्याकांड के समय 19 साल का था। वह 31 सालों से जेल में बंद है।
सात आरोपी दोषी ठहराए गए थे
राजीव गांधी हत्याकांड में सात लोगों को दोषी ठहराया गया था। सभी दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया था। इसके बाद दोषियों ने रिहाई के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
तमिलनाडु सरकार चाहती है रिहाई
तमिलनाडु सरकार राजीव हत्याकांड के आरोपियों की रिहाई चाहती है। मौजूदा डीएमके सरकार के साथ ही पूर्ववर्ती जे जयललिता और एके पलानीसामी की सरकारों ने 2016 और 2018 में दोषियों की रिहाई की राज्यपाल से सिफारिश की थी।
21 मई 1991 को हुई थी राजीव गांधी की हत्या
21 मई 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में हत्या हुई थी। इसके बाद 11 जून 1991 को पेरारिवलन को गिरफ्तार किया गया था।
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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कोर्ट के फैसले को निंदनीय और बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि एक आतंकवादी के साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार करना चाहिए। राजीव गांधी के हत्यारे को रिहा करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आज हमें गहरा दुख पहुंचा है। आज भारत का हर नागरिक इस फैसले की वजह से निराश और गुस्सा है।
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सुरजेवाला ने कहा कि आज देश के लिए दुखद दिन है। राजीव गांधी एक कांग्रेस नेता नहीं देश के प्रधानमंत्री थे। ना केवल कांग्रेस के हर कार्यकर्ता बल्कि भारत और भारतीयता में विश्वास रखने वाले हर भारतीय में, जो उग्रवाद और भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाली हर ताकत के खिलाफ लड़ने में विश्वास रखता है, दुख और रोष है।
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उन्होंने कहा कि कोर्ट के इस फैसले ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाले हर व्यक्ति की आत्मा को चोट पहुंचाई है। अगर देश के प्रधानमंत्री के हत्यारे को छोड़ा जा सकता है तो भारत की जेलों में ऐसे काफी कैदी हैं जो आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं उन सभी को छोड़ा जा सकता है। इसके लिए बीजेपी जिम्मेदार है। आतंकवाद को लेकर केंद्र सरकार का रवैया निंदनीय है। राज्यपाल और राष्ट्रपति के द्वारा निर्णय ना लेने की वजह से कोर्ट ने रिहा किया है।
बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्ति का इस्तेमाल करते हुए न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को राजीव गांधी हत्याकांड में 31 साल से जेल की सजा काट चुके ए जी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया।
पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका
पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था कि तमिलनाडु सरकार ने उसे रिहा करने का फैसला लिया था, लेकिन राज्यपाल ने फाइल को काफी समय तक अपने पास रखने के बाद राष्ट्रपति को भेज दिया था। यह संविधान के खिलाफ है। 11 मई को हुई सुनवाई में केंद्र ने पेरारिवलन की दया याचिका राष्ट्रपति को भेजने के तमिलनाडु के राज्यपाल के फैसले का बचाव किया था।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ए एस बोपन्ना की पीठ को बताया था कि केंद्रीय कानून के तहत दोषी ठहराए गए शख्स की सजा में छूट, माफी और दया याचिका के संबंध में याचिका पर केवल राष्ट्रपति ही फैसला कर सकते हैं।
इस पर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया था कि अगर इस दलील को स्वीकार कर लिया जाता है तो राज्यपालों की ओर से दी गई अब तक की छूट अमान्य हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर राज्यपाल पेरारिवलन के मुद्दे पर राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिश को मानने को तैयार नहीं हैं तो उन्हें फाइल को पुनर्विचार के लिए वापस मंत्रिमंडल में भेज देना चाहिए था। पेरारिवलन हत्याकांड के समय 19 साल का था। वह 31 सालों से जेल में बंद है।
सात आरोपी दोषी ठहराए गए थे
राजीव गांधी हत्याकांड में सात लोगों को दोषी ठहराया गया था। सभी दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया था। इसके बाद दोषियों ने रिहाई के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
तमिलनाडु सरकार चाहती है रिहाई
तमिलनाडु सरकार राजीव हत्याकांड के आरोपियों की रिहाई चाहती है। मौजूदा डीएमके सरकार के साथ ही पूर्ववर्ती जे जयललिता और एके पलानीसामी की सरकारों ने 2016 और 2018 में दोषियों की रिहाई की राज्यपाल से सिफारिश की थी।
21 मई 1991 को हुई थी राजीव गांधी की हत्या
21 मई 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में हत्या हुई थी। इसके बाद 11 जून 1991 को पेरारिवलन को गिरफ्तार किया गया था।