महाराष्ट्र में सरकार : कांग्रेस और शिवसेना का खत्म होगा छुआछूत तो भाजपा करेगी जोरदार हमले
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शरद पवार, उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की घोषणा के बाद अब राज्य सरकार का गठन बस एक कदम दूर है। शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के इस गठबंधन का महाराष्ट्र ही नहीं देश की राजनीति पर असर पड़ने की पूरी संभावना है। तीनों दलों की सरकार से जहां कांग्रेस और शिवसेना का छुआछूत खत्म होगा, वहीं महाराष्ट्र और देश की राजनीति में एनसीपी के नेता शरद पवार का दबदबा बढ़ने के पूरे आसार हैं।
वहीं, भाजपा को शिवसेना और कांग्रेस को उनकी राजनीतिक विचारधारा पर आईना दिखाने का अवसर मिल गया है। समझा जा रहा है भाजपा जल्द ही अपने आक्रमण की धार तेज कर देगी। झारखंड विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दोनों दलों की विचारधारा पर हमला बोल सकते हैं।
कांग्रेस को लाभ
कांग्रेस पार्टी, शिवसेना के साथ गठबंधन सरकार में शामिल होकर हिन्दू विरोधी पार्टी होने का दाग धो सकेगी। इससे उसका बहुसंख्यक समाज के साथ छुआछूत खत्म होने में मदद मिलेगी। सॉफ्ट हिन्दुत्व के उसके एजेंडे को धार मिलेगी। दूसरी तरफ अल्पसंख्यक समुदाय को बांधे रखने के लिए वह लगातार महाराष्ट्र में गठित होने वाली भावी सरकार के कामकाज से संदेश देती रहेगी।
गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता में समीक्षा समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कांग्रेस की हार का कारण मुस्लिम तुष्टीकरण की छवि बनना बताया था। समिति का कहना था कि इस छवि के कारण देश का बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि से जुड़ गया और इसका भाजपा को भरपूर लाभ मिला।
एंटनी की अध्यक्षता वाली समिति के सुझाव को मानते हुए गुजरात विधानसभा के चुनाव में पार्टी के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सॉफ्ट हिन्दुत्व की राजनीति को आगे बढ़ाया। टीका लगाना, मंदिर जाना, धर्म गुरुओं का आदर, जनेऊधारी फोटो जारी करना, खुद को दत्तात्रेय कौल ब्राह्मण बताना इसी का हिस्सा रहा। यहां तक कि लोकसभा चुनाव 2019 तक पार्टी इसी नीति पर चली, आगे भी चल रही है।
टूटने से बच गई कांग्रेस
कांग्रेस के नेताओं की एक बड़ी आशंका और डर से उन्हें निजात मिल गई है। पार्टी के कई सीनियर नेताओं को अब महाराष्ट्र में पार्टी के न टूटने का भरोसा हो रहा है। पार्टी के पूर्व महासचिव का अनुमान था कि यदि राज्य में शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार न बनती तो कांग्रेस के टूटने का खतरा बना रहता।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा का मौजूदा नेतृत्व राजनीतिक दल के तोड़-फोड़ की राजनीति में विश्वास करता है। इसलिए इसकी संभावना अधिक थी। बताते हैं साफ्ट टारगेट पर कांग्रेस ही थी। इस मामले में भाजपा, एनसीपी और शिवसेना से परहेज करती और कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने का प्रयास संभव था।
एनसीपी का दबदबा
शिवसेना
कट्टर हिन्दुत्व में यकीन रखने वाली पार्टी है। शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे ने इसे पाकिस्तान, बांग्लादेश विरोधी, राम मंदिर समर्थक, कट्टर हिन्दुत्व की पार्टी का चेहरा दिया है। शिवसेना की इस छवि के कारण पार्टी को लगातार विपरीत स्थिति में भी दूसरे दल का साथ मिलने की गुंजाइश न के बराबर रहती थी। यहां तक कि कांग्रेस और एनसीपी जैसे दल भी शिवसेना के करीब जाने से परहेज कर रहे थे।
लोकसभा चुनाव से पहले तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का शिवसेना के साथ गठबंधन की संभावना को लेकर वक्तव्य नकारात्मक था। इसके सामानांतर शिवसेना के जहां भाजपा के साथ बने रहने की मजबूरी बन रही थी, वहीं भाजपा भी शिवसेना को अपने साथ बने रहने के लिए लाचार मानकर चल रही थी। अब शिवसेना के साथ कांग्रेस, एनसीपी के गठबंधन ने पार्टी के लिए सभी विकल्प खोल दिए हैं।
एनसीपी का दबदबा
एनसीपी की राजनीति का पूरा आधार महाराष्ट्र है। लंबे समय से एनसीपी महाराष्ट्र की सत्ता से बाहर है। जिस तरह से एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने राजनीतिक कौशल दिखाया है, उससे पवार के साथ एनसीपी का राज्य की राजनीति में दबदबा बढ़ेगा। इतना ही नहीं गुजरात और अन्य राज्यों में पार्टी को प्रसार सहायता मिलेगा।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि जो लाभ शिवसेना और कांग्रेस को मिलेगा, वही लाभ एनसीपी को भी मिलेगा। एनसीपी के पास भविष्य में कांग्रेस की बजाय शिवसेना और भाजपा के साथ जाने का विकल्प खुल सकता है। पार्टी का छूआछूत खत्म होगा और एनसीपी समय के आधार अपना हित देखकर राजनीतिक फैसले ले सकेगी।
भाजपा बोलेगी हमला, दिखाएगी कांग्रेस-शिवसेना को आईना
भाजपा के लिए महाराष्ट्र में सरकार बनाने का अवसर था, लेकिन शिवसेना के छिटकने से उसके हाथ खाली रह गए। यह पार्टी के लिए झटका है, लेकिन भाजपा के नेताओं का कहना है कि इससे महाराष्ट्र के नेताओं का राजनीतिक अहंकार चकनाचूर होगा। इससे भाजपा की एकता को बल मिलेगा। केन्द्रीय नेतृत्व का राज्य ईकाई पर प्रभाव और बढ़ेगा।
बताते हैं एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भाजपा के पास कांग्रेस की दोहरे मानदंड की राजनीति पर हमला करने का अवसर मिलेगा। पार्टी कांग्रेस की धर्म निरपेक्ष विचारधारा पर सवाल उठाकर इसे छद्म धर्मनिरपेक्षवाद कहकर हमला करेगी। शिवसेना के हिन्दुत्व को भी कठघरे में खड़ा करेगी।