भाजपा की रथयात्राओं का जवाब देने के लिए कांग्रेस व माकपा भी बंगाल में चलाएंगी जनसंपर्क कार्यक्रम
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अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ओर से राज्य में आयोजित होने वाली रथयात्राओं के जवाब के तौर पर कांग्रेस और माकपा ने भी यहां जनसंपर्क कार्यक्रम व पदयात्राएं आयोजित करने का फैसला किया है। हालांकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने यह कहते हुए इन रथयात्राओं या विपक्ष के कार्यक्रमों को अहमियत देने से मना कर दिया है कि ‘राज्य के लोग पूरी तरह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ हैं।’
प्रदेश कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि पार्टी इस महीने के आखिर में राज्यव्यापी जनसंपर्क कार्यक्रम शुरू करेगी। दूसरी ओर, माकपा ने भी अपने संगठन ‘किसान सभा’ के बैनर तले सिंगूर, कूचबिहार और मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का से तीन पदयात्राएं आयोजित करने का फैसला किया है। कांग्रेस और माकपा सूत्रों ने बताया कि उक्त कार्यक्रमों का समय शाह की रथयात्राओं की तारीखों को देखते हुए तय किया गया है। इन कार्यक्रमों का मकसद रथयात्राओं का जवाब देना है।
भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ प्रचार : माकपा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्र ने बताया कि जनसंपर्क अभियान का मकसद राज्य के आम लोगों तक पहुंचना एवं नरेंद्र मोदी सरकार के भ्रष्टाचार, कुशासन और सांप्रदायिक राजनीति का खुलासा करना है। इसके अलावा हर घर से दो से पांच रुपये तक चंदा वसूला जाएगा। इन गतिविधियों का मकसद राज्य में पार्टी को मजबूत करना है।
उधर, माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य एवं ‘किसान सभा’ के महासचिव हन्नान मौल्ला ने बताया कि पदयात्राओं के दौरान किसानों की समस्याओं और राज्य सरकार की जमीन नीति की विसंगतियों को उठाया जाएगा। साथ ही भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ प्रचार किया जाएगा। बता दें कि भाजपा ने पांच, सात एवं नौ दिसंबर को राज्य के तीन अलग-अलग इलाकों से रथयात्राएं निकालने का फैसला किया है।
हाशिए पर हैं कांग्रेस और माकपा : भाजपा
इस बीच, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि कांग्रेस और माकपा दोनों ही बंगाल की राजनीति में हाशिए पर पहुंच चुकी हैं। लोग यहां भाजपा की ओर देख रहे हैं। हाल के पंचायत चुनाव एवं विभिन्न उपचुनावों से साबित हो चुका है कि राज्य में भाजपा ही तृणमूल कांग्रेस की अकेली विकल्प है।