यूपी चुनाव: बगावत के डर से घबराई कांग्रेस, रोका प्रत्याशियों का एलान
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बसपा और भाजपा के झटके के बाद असहज कांग्रेस ने अपनी 80 प्रत्याशियों की पहली तैयार सूची का एलान रोक दिया है। इन उम्मीदवारों की घोषणा करने की पार्टी की पूरी तैयारी थी। पहली सूची में प्रियंका गांधी का दखल होने की बात सामने आ रही है।
पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर की रिपोर्ट को भी तवज्जो दी गई है। सूबे में कांग्रेस के 28 विधायक 2012 में जीते थे। पार्टी ने इस बार 145 सीटों को जीत के लिए चिह्नित किया है। कुल 300 सीटों पर कांग्रेस का फोकस रहेगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने इस बार विधायकों को टिकट देना तय किया है।
पहली लिस्ट पार्टी ने तैयार कर ली है। इस सूची में 80 नाम बताए जा रहे हैं। इनकी संख्या 100 तक भी पहुंच सकती है। बताते हैं कि प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने प्रियंका गांधी की पसंद के कई नामों समेत पूरी सूची को राज्य संगठन से इन नामों पर सहमति लेकर फाइनल कर दी। दो दिन में छह विधायकों के बसपा और भजपा के साथ जाने, पांच अन्य दागी विधायकों के पार्टी छोड़ने की आशंका के साथ टिकट की लिस्ट जारी होते ही और बगावत के डर ने फिलहाल सूची का एलान रोक दिया।
युवाओं और महिलाओं पर कांग्रेस का ज्यादा ध्यान
पार्टी के एक सीनियर नेता का कहना है कि अगर लिस्ट घोषित होने के बाद कुछ विधायक पाला बदलते हैं तब गलत संदेश जाएगा। इसके अलावा नए लोगों को टिकट में वरीयता मिलने से पुराने भी पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं, इसलिए तय किया गया है कि चुनाव में काफी वक्त है, लिस्ट को रोका जाए।
टिकट के दावेदारों को यह समझाया जाए कि पार्टी खड़ा करने में सहयोग दें, जिसको भी उम्मीदवार बनाया जाए उसे एकजुट होकर चुनाव लड़ाया जाए। बताते हैं कि जिन पांच विधायकों को शक की नजर से देखा जा रहा, इस वक्त उनको खुद पर दलबदल कानून के तहत कार्रवाई का डर सता रहा है। इसलिए दूसरे दल में जाने का निर्णय वह अभी नहीं ले रहे हैं।
पार्टी छोड़ने वाले छह विधायकों पर दलबदल लागू होना मुश्किल होगा, क्योंकि इन छह विधायकों को पार्टी क्रॉस वोटिंग के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर चुकी हैं। कांग्रेस की इस बार जिताऊ प्रत्याशियों को मैदान में उतारने की तैयारी है। उनकी पूरी कोशिश है कि महिलाओं और युवाओं पर ज्यादा भरोसा किया जाए।
प्रशांत किशोर ने भी महिलाओं और युवाओं को ज्यादा मैदान में उतारने का प्रस्ताव दिया है। तर्क दिया जा रहा है कि 2014 में भाजपा के पक्ष में सर्वाधिक युवा और महिलाओं ने ही खड़े होकर माहौल तैयार किया था। पार्टी का तर्क है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से पूर्व पीएम राजीव गांधी का उनका 33 फीसदी राजनीति में हिस्सेदारी देने का सपना भी पूरा होगा।