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Hindi News ›   India News ›   Conducting Separate Interviews For General And Reserved Category Candidates Wholly Illegal : SC

आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के लिए अलग साक्षात्कार गैरकानूनी: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 19 Sep 2019 05:22 AM IST
संदीप भट्ट राजीव सिन्हा, अमर उजाला नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 19 Sep 2019 05:22 AM IST
सार

  • साक्षात्कार को उम्मीदवारों की श्रेणियों के हिसाब से नहीं बांटा जा सकता-शीर्ष अदालत 
  • आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार योग्य है तो वह सामान्य श्रेणी की सीट का हकदार होगा
  • कोर्ट ने विश्वविद्यालय को चयन प्रक्रिया का आकलन करने का दिया निर्देश 

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Conducting Separate Interviews For General And Reserved Category Candidates Wholly Illegal : SC

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में सामान्य और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग साक्षात्कार आयोजित करने को गैरकानूनी बताया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि साक्षात्कार को उम्मीदवारों की श्रेणियों के हिसाब से नहीं बांटा जा सकता।

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जस्टिस एल नागेश्वर राव और हेमंत गुप्ता की पीठ ने एक फैसले में कहा, हर व्यक्ति एक सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार है। आरक्षण का लाभ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों या ऐसी अन्य श्रेणी को प्रदान किया जाता है, जो कानून के तहत स्वीकार्य है। पीठ ने इंद्रा साहनी मामले में नौ सदस्यीय पीठ के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि यदि आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार योग्य है तो वह सामान्य श्रेणी की सीट का हकदार होगा।
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वास्तव में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सवाल था कि क्या एक आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार जो सामान्य श्रेणी की मेरिट लिस्ट में अंतिम उम्मीदवार से अधिक अंक प्राप्त करता है तो उसे सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार माना जाएगा या नहीं? पीठ ने पूर्व में दिए उस आदेश का हवाला दिया कि जिसमें कहा गया था कि ऐसे आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार को अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवार के रूप में माना जाएगा, बशर्ते कि ऐसे उम्मीदवार ने उम्र में छूट, अंक का लाभ आदि किसी अन्य विशेष रियायत का लाभ नहीं लिया हो। पीठ ने यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए चयन प्रक्रिया को गैरकानूनी करार देते हुए की। 
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दिलचस्प है कि किसी भी पक्ष ने सामान्य और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग साक्षात्कार आयोजित करने के बारे में शिकायत नहीं की थी लेकिन शीर्ष अदालत ने इसे ‘स्वाभाविक रूप से दोषपूर्ण’ पाया।

चयन प्रक्रिया का आकलन करने का निर्देश 

कोर्ट ने विश्वविद्यालय को एक विशेषज्ञ समिति का गठन करके चयन प्रक्रिया का फिर से आकलन करने का निर्देश दिया है। कमेटी इस पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की सभी श्रेणियों की संयुक्त मेरिट सूची के अनुसार  सिफारिश करेगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि अपीलकर्ता प्रदीप सिंह दहल को छोड़कर पहले से ही चुने गए उम्मीदवारों की नियुक्ति के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। अपीलकर्ता की नियुक्ति विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर विश्वविद्यालय के फैसले के अधीन होगी।

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