चुनाव आयोग की घोषणा के बाद ही पांच राज्यों में लागू हो गई आचार संहिता
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आचार संहिता चुनावों की घोषणा होते ही लागू कर दी जाती है। इसके बारे में तो आपने कई बार सुना होगा कि आचार संहिता लागू कर दी गई है लेकिन ये कब और क्यों लागू की जाती है। यह एक बड़ा सवाल है। आचार संहिता चुनाव की तारीख की घोषणा होने के साथ लागू हो जाती है और नतीजे आने तक जारी रहती है।
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आचार संहिता चुनावों की घोषणा होते ही लागू कर दी जाती है। इसके बारे में तो आपने कई बार सुना होगा कि आचार संहिता लागू कर दी गई है लेकिन ये कब और क्यों लागू की जाती है। यह एक बड़ा सवाल है। आचार संहिता चुनाव की तारीख की घोषणा होने के साथ लागू हो जाती है और नतीजे आने तक जारी रहती है।
शनिवार को चुनाव आयोग ने पांच राज्यों (मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना) में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है। इसी के साथ इन राज्यों में भी आचार संहिता लागू हो चुकी है।
भारतीय चुनावों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाने वाली आचार संहिता चुनाव समिति द्वारा बनाया गया वो दिशानिर्देश होता है जिसे सभी राजनीतिक पार्टियों को मानना होता है।
ये दिशानिर्देश यानि आचार संहिता देश की सभी राजनीतिक पार्टियों पर लागू किया जाता है। जिसका उद्देश्य पार्टियों के बीच मतभेद टालने, शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव कराना होता है। आचार संहिता द्वारा ये सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी, केंद्रीय या राज्य की अपने आधिकारिक पदों का चुनावों में लाभ हेतु गलत इस्तेमाल न करें।
क्या होती है आचार संहिता और न मानने के क्या हैं इसके दुष्परिणाम
राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही उस राज्य में चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती है। चुनाव आचार संहिता के लागू होते ही प्रदेश सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश लग जाते हैं। सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं। वे आयोग के मातहत रहकर उसके दिशा-निर्देश पर काम करते हैं।
यहां महत्वपूर्ण हो जाता है यह जानना भी कि आचार संहिता लागू होते ही प्रदेश का मुख्यमंत्री या मंत्री जनता के लिए कोई घोषणा नहीं कर सकते हैं। इस दौरान राज्य में न तो शिलान्यास किया जाता है न लोकार्पण और न ही भूमिपूजन।
इस दौरान सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं किया जाता है जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो। राजनीतिक दलों के आचरण और क्रियाकलापों पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है।
आचार संहिता कब लागू हुआ
सरकार का कहना था की औपचारिक अधिसूचना के बाद ही आचार संहिता लागू की जाये। चुनाव समिति ने मामले को सुलझाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को एकत्रित किया और बाद में भाजपा समेत देश की सभी राजनीतिक पार्टियों ने आचार संहिता का समर्थन किया और तभी से चुनाव की तारीख घोषित किए जाने के साथ ही देश और राज्य में आचार संहिता लागू कर दी जाती है।
आचार संहिता के तथ्य
-राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंदी दलों के निजी जीवन का सम्मान करें और उनके घर के सामने किसी प्रकार का रोड शो या प्रदर्शन करके उन्हें परेशान न करें।
-चुनाव प्रचार के दौरान कोई भी राजनीतिक पार्टी और उनके प्रत्याशियों को लाउड स्पीकर इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय अधिकारीयों से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। किसी प्रकार के अभियान से पहले प्रत्याशी स्थानीय पुलिस को जरूर सूचित करें ताकि सुरक्षा के इंतजाम किये जा सकें।
-राजनीतिक दलों को यह ध्यान रखना होता है कि उनके द्वारा आयोजित रैलियों और रोड शो से यातायात प्रभावित नहीं होना चाहिए।
-आचार संहिता के अनुसार सार्वजानिक स्थान जैसे सरकारी सराय, मीटिंग मैदान और हेलिपैड आदि सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के बीच बराबरी में उपयोग किया जाए। उस पर एकाधिकार न जताया जाए।
-चुनाव के दिन प्रत्याशी अपने राजनीतिक दल का चिन्ह पोलिंग बूथ के आस-पास नहीं दिखा सकते। चुनाव समिति द्वारा दिए गए वैद्य पास के बगैर कोई भी बूथ में नहीं घुस सकता।
-चुनाव बूथ के पास एक व्यक्ति ऐसा होगा जिसके पास किसी प्रकार की शिकायत की जानकारी दी जा सकती है।
-शासक दल के मंत्री खास तौर पर किसी भी अधिकारी की नियुक्ति नहीं कर सकते जो मतदाताओं को उनके दल को मत देने की और प्रभावित करे।