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काजू बेचकर घर चलाने वाली जयलक्ष्मी जाएगी नासा, लोगों ने चंदे से जुटाया टिकट का पैसा

Sun, 22 Dec 2019 11:01 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुदुकोटै
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुदुकोटै Published by: देव कश्यप Updated Sun, 22 Dec 2019 11:01 PM IST
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Class 11 student Jayalakshmi will go to NASA, people have collected ticket money from donations
Jayalakshmi - फोटो : YouTube

काजू बेचकर घर चलाने वाली के. जयलक्ष्मी अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा जाने का सपना पूरा कर पाएगी। एक ऑनलाइन परीक्षा में नासा जाने का मौका जीतने वाली जयलक्ष्मी का सपना पूरा करने के लिए लोगों ने चंदे के जरिये टिकट का पैसा जुटा दिया है। उसे मई, 2020 में नासा जाना है। इतना ही नहीं अब उसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में भी जाने का मौका मिलेगा।

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अदानाकोट्टई के सरकारी स्कूल की कक्षा 11 में विज्ञान की छात्रा जयलक्ष्मी को नासा जाने के लिए चल रहे ऑनलाइन परीक्षा की जानकारी मिलने की कहानी भी अपने आप में अनोखी है। जयलक्ष्मी के मुताबिक, मैं एक कैरम मैच का अभ्यास कर रही थी। इसी दौरान सामने बोर्ड पर समाचार पत्र से काटकर लगाई गई खबर में धान्य थासनेम की स्टोरी पढ़ी। थासनेम ने पिछले साल नासा जाने का मौका जीता था।
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मुझे इससे बेहद प्रेरणा मिली और मैंने तत्काल इस ऑनलाइन परीक्षा के लिए अपना पंजीकरण करा लिया। लेकिन जयलक्ष्मी अंग्रेजी नहीं जानती थी। उसने करीब एक महीने तक रात-दिन अंग्रेजी का अभ्यास किया और परीक्षा में ग्रेड-2 लाकर नासा जाने का मौका जीत लिया।
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जयलक्ष्मी को नासा जाने का मौका तो मिल गया, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती थी, उसके लिए 1.69 लाख रुपये की रकम जुटाना। यह रकम उसे 27 दिसंबर तक जमा करानी थी। जयलक्ष्मी ने सोशल मीडिया के जरिये इसके लिए अपील की और पुदुकोटै की जिलाधिकारी पी. उमा माहेश्वरी को मिलकर उनसे भी मदद की गुहार लगाई। जयलक्ष्मी के मुताबिक, मेरे पिता परिवार से अलग रहते हैं और कभी-कभी ही पैसा भेजते हैं। मेरे शिक्षकों और साथी छात्रों ने पासपोर्ट के लिए रकम जमा की। पासपोर्ट अधिकारी ने भी 500 रुपये की मदद की।

इसके बाद जिलाधिकारी के आग्रह पर ओएनजीसी के कर्मचारियों ने अपने वेतन से 65 हजार रुपये का चंदा उसके लिए जमा किया। सोशल मीडिया पर की गई अपील के जरिये भी लोग उसकी मदद के लिए आगे आए और आखिरकार वह पूरा पैसा जुटाने में सफल हो ही गई। जयलक्ष्मी को एक और खुशखबरी तब मिली, जब इसरो के पूर्व वैज्ञानिक व पद्मश्री से सम्मानित एम. अन्नादुरई ने उसे इसरो का दौरा कराने का वादा किया, जहां वह वैज्ञानिकों से मिलकर रॉकेट के उड़ने की प्रक्रिया की जानकारी ले सकेगी।

घर में नहीं बिजली, पढ़ाती है ट्यूशन

जयलक्ष्मी का घर पिछले साल तमिलनाडु में आए गाजा चक्रवात का शिकार हो गया था और तब से उसके घर में बिजली नहीं है। इतना ही नहीं वह अपने परिवार की इकलौती कमाने वाली सदस्य है। वह काजू बेचने के अलावा कक्षा आठ और नौ के बच्चों को पढ़ाकर अपनी पढ़ाई और घर का खर्च पूरा करती है। साथ ही अपनी मां और मानसिक रूप से दिव्यांग छोटे भाई का इलाज भी कराती है।

बनाना चाहती हैं अब्दुल कलाम की तरह रॉकेट

जयलक्ष्मी का सपना पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की तरह वैज्ञानिक बनकर रॉकेट बनाने का है। मिसाइल मैन कलाम को अपना आदर्श मानने वाली जयलक्ष्मी को लगता है कि उसकी सफलता से अन्य सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी। 

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