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लंबित मामलों को निपटाने के लिए 70 हजार जजों की जरूरत : सीजेआई

Mon, 09 May 2016 04:48 AM IST
एजेंसी/कटक
एजेंसी/कटक Updated Mon, 09 May 2016 04:48 AM IST
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CJI TS Thakur says 70 thousand judges need to resolve pending cases.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने रविवार को एक बार फिर जज-जनसंख्या अनुपात पर चिंता जताई।
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उन्होंने कहा कि 1987 में भारतीय विधि आयोग ने तत्कालीन लंबित मामलों को प्रभावी तरीके से निपटाने के लिए 44 हजार जजों के होने का सुझा दिया था। आज देश में जजों की संख्या सिर्फ 18 हजार है।

सीजेआई ने कहा कि 30 वर्षों से हम कम ताकत के साथ काम कर रहे हैं। अगर आप लोगों की बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से देखें तो लंबित मामलों के निपटारे के लिए अभी हमें 70 हजार जजों की जरूरत हो सकती है।
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'फिलहाल देश में जजों की संख्या सिर्फ 18,000 है'

CJI TS Thakur says 70 thousand judges need to resolve pending cases.
न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि न्याय पाना मौलिक अधिकार है और सरकार लोगों को इसके लिए मना नहीं कर सकती। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में एक सम्मेलन के दौरान इस मसले पर भावुक होने के बाद सीजेआई ने एक बार फिर से यह मुद्दा उठाया है।

सीजेआई यहां हाईकोर्ट की सर्किट पीठ के शताब्दी समारोह के अवसर पर कानून के दिग्गजों की बड़ी भीड़ को संबोधित कर रहे थे। न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा, ‘एक तरफ हम जहां यह सुनिश्चित करने को तत्पर रहते हैं कि जजों की नियुक्ति जल्द हो वहीं जजों की नियुक्ति में शामिल मशीनरी की चाल सुस्त बनी हुई है।’ उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में लगभग 170 जजों की नियुक्ति का मामला सरकार के पास लंबित है।

सीजेआई ने कहा कि अभी देश में न्यायपालिका के सामने सबसे विकट चुनौती जजों की कमी का है। देश के विभिन्न हाईकोर्टों में जजों के लिए स्वीकृत 900 पदों में से 450 रिक्त पदों को तत्काल भरे जाने की जरूरत है।
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