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चुनावी घोषणापत्र कागज का टुकड़ा, तय हो राजनीतिक दलों की जवाबदेहीः CJI

Sat, 08 Apr 2017 08:50 PM IST
amarujala.com- Presented By: अभिषेक तिवारी
amarujala.com- Presented By: अभिषेक तिवारी Updated Sat, 08 Apr 2017 08:50 PM IST
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CJI Khehar Says Poll promises routinely unfulfilled parties must be held accountable
जस्टिस खेहर

चुनावी घोषणापत्रों में दिए जाने वाले लोकलुभावन वादों को लेकर बहस अब गंभीर होती जा रही है। हाल ही में चुनाव आयोग ने भी इस पर सवाल उठाया था उसके बाद अब देश के मुख्य न्यायाधीश ने भी इस पर सवाल खड़ा कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों को भी आईना दिखाया है। 

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मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा कि राजनीतिक दल हमेशा अपना वादा पूरा नहीं करते हैं। उसके घोषणा पत्र केवल कागज के टुकड़े साबित होते हैं, इसके लिए राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। 'आर्थिक सुधारों के संदर्भ के साथ चुनावी मुद्दे' नामक सेमिनार में सीजेआई ने राजनी‌तिक दलों की इस प्रवृत्ति पर अपनी चिंता जताई।

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उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के सदस्यों के बीच सर्वसम्मति की कमी है। इसी वजह से चुनावी वादों को सही ठहराने का कोई औचित्य नहीं है। घोषणा पत्र नागरिकों की शॉर्ट टर्म मेमोरी के कारण मात्र कागज के टुकड़े बनकर रह जाते हैं। खास बात ये है कि जब मंच से मुख्य न्यायाधीश राजनीतिक दलों को नसीहत दे रहे थे तब देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी मंच पर ही मौजूद थे।

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सीजेआई ने कहा कि 2014 के आम चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा जारी घोषणापत्र में चुनाव सुधारों और आर्थिक-सामाजिक न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए किसी पार्टी ने नहीं कहा। राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में यह मुद्दे हाशिए पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फ्री चुनाव के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं। चुनाव आयोग मॉडल आचार संहिता के उल्लंघन के लिए पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने भी चुनावी सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि चुनाव में पैसे की शक्ति का इस्तेमाल करने के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि एक उम्मीदवार को ध्यान में रखना चाहिए कि 'चुनाव लड़ना कोई निवेश नहीं है।' 


उन्होंने कहा कि उच्च नैतिक मूल्यों के आधार पर जनता को उम्मीदवारों को वोट देना चाहिए। उम्मीदवारों और मतदाताओं को याद रखना चाहिए कि कर्ज खतरे के घंटी है। जिस दिन मतदाता जांच परखकर मतदान करने लगेंगे वह दिन लोकतंत्र के लिए गौरवशाली दिन होगा।

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