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CJI: 'अधिकारों के उल्लंघन के लिए निजता का बहाना नहीं दिया जा सकता', लैंगिक असमानता पर बोले सीजेआई चंद्रचूड़

Sun, 17 Dec 2023 04:36 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 17 Dec 2023 04:36 PM IST
सार

CJI: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने रविवार को घरों के भीतर मौजूद लैंगिक असमानता पर बात करते हुए कहा कि अधिकारों के उल्लंघन के लिए निजता का बहाना नहीं दिया जा सकता है। 

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cji dy chandrachud Remarks On Gender Pay Gap and Homemakers Rights in india
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने रविवार को कहा कि कानूनों को घरों के भीतर मौजूद लैंगिक असमानता को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिकारों के उल्लंघन के लिए निजता की आड़ नहीं ली जा सकती है। वह देश के 19वें मुख्य न्यायाधीश ईएस वेंकटरमैया की स्मृति में बंगलुरू के नेशनल लॉ स्कूल में आयोजित एक व्याख्यान में बोल रहे थे। न्यायमूर्ति वेंकरमैया की बेटी न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश हैं और देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं। 

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सीजेआई ने स्मारक व्याख्यान देते हुए कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों स्थानों पर प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए कानून के उद्देश्य का विस्तार किया जाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह लैंगिक भेदभाव को सार्वजनिक और निजी अंतर के नजरिए से देखेंगे। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय दंड संहिता में प्रावधान है कि जब दो या दो से अधिक व्यक्ति झगड़े में पड़कर सार्वजनिक शांति भंग करते हैं तो उन्हें अपराध करने वाला कहा जाता है।

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सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, यह तभी दंडनीय है, जब सार्वजनिक स्थल पर हो अन्यथा नहीं। इस प्रकार कानून का जोर केवल झगड़ों अंतरर्निहित गुण या दोष पर नहीं है, बल्कि इस पर है कि यह कहां हो रहा है। एक संवैधानिक रूप से शासित समाज को सार्वजनिक और निजी की इस बाइनरी से परे देखने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और निजी चीजों के इस विरोधाभास ने कई वर्षों से हमारे कानूनों को नारीवादी और आर्थिक आलोचना का आधार बनाया है। अभिव्यक्ति की आजादी के अस्तित्व के लिए इसे इन दोनों स्थानों में मौजूद होना चाहिए। 

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