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सजग नागरिकता सिर्फ अधिकार ही नहीं कर्त्तव्य भी: सीजेआई बोबडे

Sun, 19 Jan 2020 02:33 AM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Sun, 19 Jan 2020 02:33 AM IST
सार

  • समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की है छात्रों पर जिम्मेदारी
  • एक ही सांचे में ढालने की फैक्टरी न बनें विश्वविद्यालय
  • कहा, अनुशासन के विचार को लेकर कुछ क्षेत्रों में बढ़ रही है नाराजगी

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CJI Bobde says alert citizenship is not only right but duty also
सीजेआई एस ए बोबडे (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

नागरिकता संशोधन कानून के मुद्दे पर विश्वविद्यालयों में हो रहे प्रदर्शनों के बीच मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, आप सभी पर एक सजग नागरिक होने की जिम्मेदारी है और नागरिकता सिर्फ अधिकारों के बारे में नहीं है, बल्कि यह समान रूप से समाज के प्रति हमारे कर्त्तव्यों के बारे में भी है। आप पर समाज की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की जिम्मेदारी है।

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जस्टिस बोबडे ने शनिवार को राष्ट्रसंत तुकादोजी महराज नागपुर विश्वविद्यालय के 107वें दीक्षांत समारोह में साफ तौर पर कहा, विश्वविद्यालय महज ईंट और गारे से बने ढांचे नहीं हैं। ऐसे में ये एक ही सांचे में ढालने की फैक्टरी की तरह काम नहीं कर सकते। यूनिवर्सिटी के पीछे यह अहम विचार है कि हम एक समाज के रूप में क्या पाना चाहते हैं। जस्टिस बोबडे ने कहा, शिक्षा का विचार अनुशासन के विचार से जुड़ा है।
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उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि अनुशासन के विचार को लेकर कुछ क्षेत्रों में नाराजगी बढ़ रही है, लेकिन अनुशासन का मतलब वह नहीं है, जो आज आज हमारे सामने आ रहा है। अनुशासन शब्द का मतलब सीखने से है। यह एक मानसिकता है, जिसके तहत कोई भी किसी भी विषय के बारे में अनवरत सीख सकता है। शिक्षा अनुशासन की एक मानसिक अवस्था है और यह मानसिक अवस्था ही अनुशासन है।
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कुछ संस्थान बेहद व्यावसायिक हो गए

जस्टिस बोबडे ने कुछ शैक्षिक संस्थानों के अपने लक्ष्य से भटकने पर फटकार लगाते हुए कहा, बुद्धिमत्ता और चरित्र का विकास शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य होना चाहिए। आज शिक्षा तेजी से आगे बढ़ रही है। मगर, दुर्भाग्य से विश्वविद्यालयों को छोड़कर कुछ संस्थान बेहद व्यावसायिक हो गए हैं। हमें यह पता होना चाहिए कि विश्वविद्यालयों की शिक्षा का मकसद क्या है?

विश्वविद्यालयों को दी नसीहत

उन्होंने यूनिवर्सिटी को नसीहत देते हुए कहा, विश्वविद्यालयों को खुद को नई दिशा देनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे घड़ी की सुई की तरह सच के साथ रहें और समाज के मूलभूत लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ें, जो निसंदेह अलग-अलग वक्त पर बदलता रहता है।

मार्टिन लूथर के बहाने छात्रों को पढ़ाया पाठ
भेदभाव के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले अमेरिका के गांधी के रूप में चर्चित मार्टिन लूथर किंग जूनियर को याद करते हुए जस्टिस बोबडे ने कहा, मार्टिन लूथर कहा करते थे कि शिक्षा का कार्य गहनता से व सूक्ष्मता से सोचने की क्षमता विकसित करना है। बुद्धिमत्ता के साथ सद्चरित्र यही असली शिक्षा का लक्ष्य है। आकलन करने के लिए अनुसंधान और विचार पर बल देना चाहिए। ये दोनों ही समान रूप से अहम हैं। 

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