भारतीय संसद में पेश किया जाने वाला सबसे खतरनाक 'नागरिकता' विधेयक: योगेंद्र यादव
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स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 की फिर भर्त्सना की है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य धार्मिक उत्पीड़न या उत्पीड़न के डर से भारत में शरण लेने के लिए मजबूर लोगों को नागरिकता प्रदान करना है। ये भारत के विचार के खिलाफ है, और दो-राष्ट्र सिद्धांत को वापस लाता है। उनका मानना है कि ये विधेयक भारतीय संसद में पेश किए जाने वाले सबसे खतरनाक बिलों में से एक है। यह एक ऐसा बिल है जो भारतीय संविधान के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय गणराज्य के इतिहास में पहली बार, हमारी नागरिकता को धार्मिक दृष्टि से परिभाषित किया जा रहा है। यह हमारे संविधान के अनुच्छेद 15 के खिलाफ है जो कहता है कि आप धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकते।
योगेंद्र यादव का मानना है कि देश आज एक अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। आज भारत के स्वधर्म को खतरा है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि धर्म को नागरिकता के तौर पर शामिल किया जा रहा है। मोदी सरकार देश में एक बार फिर "टू नेशन थ्योरी" को थोपना चाहती है।
योगेंद्र यादव ने कहा कि आज भारतीय गणतंत्र को सत्ता के केंद्र में बैठे लोगों से खतरा है। केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों से देश का आम आदमी त्रस्त है। विकास का मॉडल चंद घरानों की तिजोरी भरने के मकसद को लेकर तैयार किया जा रहा है। मीडिया खौफ के साये में काम कर रहा है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर जो हमला हो रहा है, वह इमरजेंसी के दौर में भी नहीं हुआ था। मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया है। देश में पिछले चार साल के दौरान या तो लांचिंग हुई है या लिंचिंग हुई है।