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नागरिकता बिलः हर दल में सेंध लगा सरकार ने हासिल की बड़ी जीत, तीन तलाक-अनुच्छेद 370 की तरह रचा व्यूह
Fri, 13 Dec 2019 03:01 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Fri, 13 Dec 2019 03:01 AM IST
सार
- तीनों विरोधी दलों ने सीधा समर्थन कर दूर की सरकार की चिंता
- सपा, बसपा, कांग्रेस, टीएमसी, जेडीएस के सांसदों ने अनुपस्थित रह कर पहुंचाया लाभ
- इस अहम बिल पर वोटिंग के दौरान 16 सांसद अनुपस्थित रहे
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राज्यसभा में अमित शाह
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
नागरिकता संशोधन बिल पर उच्च सदन में अल्पमत में होने के बावजूद भाजपा ने सभी विरोधी दलों में सेंध लगाने में कामयाबी हासिल की। कई विरोधी दल खुल कर पार्टी के समर्थन में आए तो कई दलों के सांसदों ने अनुपस्थित रह कर भाजपा को लाभ पहुंचाया। खासतौर पर लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष को एकजुट करने की असफल कोशिश करने वाली टीडीपी ने भी सरकार का समर्थन किया।
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गौरतलब है कि इस अहम बिल पर वोटिंग के दौरान 16 सांसद अनुपस्थित रहे। इनमें से 4 सांसदों ने इसकी सूचना पहले ही पार्टी और सभापति को दे दी थी। बाकी बचे 12 सांसदों में से 9 ने अनुपस्थित रह कर बिल को बड़े अंतर से पारित होने में मदद की तो दबाव में आई शिवसेना को भी अंत समय में वाकआउट कर बिल का परोक्ष समर्थन के लिए मजबूर होना पड़ा।
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बुधवार को अनुपस्थित रहे 16 सांसदों में से भाजपा के अनिल बलूनी, चुनीभाई गोहेल, निर्दलीय अमर सिंह और एनसीपी केमाजिद मेमन ने इसकी पूर्व सूचना दे दी थी। बलूनी, गोहेल और सिंह गंभीर रूप से अस्वस्थ हैं जबकि मेमन के यहां शादी थी।
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इसके अलावा शिवसेना के तीन सांसदों के अतिरिक्त बसपा के राजाराम और आशोक सिद्घार्थ, एनसीपी की वंदना चव्हान, तृणमूल के केडी सिंह, सपा के बेनी प्रसाद वर्मा, जेडीएस के डी कुपेंद्र रेड्डी, निर्दलीय विरेंद्र कुमार, टीआरएस के डी श्रीनिवास और कांग्रेस के मुकुट मेथी अनुपस्थित रहे।
इन सांसदों की अनुपस्थिति के कारण राज्यसभा में सांसदों की कुल संख्या 224 हो गई। इसके कारण बिल के लिए बहुमत का आंकड़ा घट कर 113 पर आ गया। सरकार ने बिल के पक्ष में 125 वोट जुटा कर बड़े अंतर से जीत हासिल की।