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नागरिकता बिल : विपक्ष के हर सवाल पर भारी पड़ा अमित शाह का जवाब
Wed, 11 Dec 2019 10:59 PM IST
अमित कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Wed, 11 Dec 2019 10:59 PM IST
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राज्यसभा में अमित शाह
- फोटो : BJP Twitter
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नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा में भी पारित हो गया। करीब आठ घंटे तक चली बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने बिल पेश करने के बाद अपना पक्ष रखने के लिए छह घंटे से ज्यादा का इंतजार किया। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के 44 सांसदों ने अपनी बात रखी।
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बहस के दौरान विपक्ष के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर जमकर शब्द बाण चलाए। मगर लंबे इंतजार के बाद जब अमित शाह की बारी आई, तो उन्होंने चुन-चुनकर सभी को जवाब दिए। जानें विपक्ष के आरोपों पर क्या बोले शाह...
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- आनंद शर्मा, कांग्रेस : देश का बंटवारा सावरकर के बयान की वजह से हुआ
- अमित शाह : मुझे नहीं पता कि यह सही है या नहीं। पूरा देश जानता है कि देश का विभाजन जिन्ना जी की मांग पर हुआ। मगर मैं यह पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस ने आखिर इसे स्वीकार क्यों किया?
- कपिल सिब्बल, कांग्रेस : न मैं डरता हूं, न देश के नागरिक डरते हैं, न देश के मुसलमान डरते हैं। हम सिर्फ संविधान से डरते हैं।
- अमित शाह : भारत में रहने वाले किसी भी अल्पसंख्यक को डरने की जरूरत नहीं है। किसी की नागरिकता नहीं छिनेगी। देश के गृह मंत्री पर सभी का भरोसा होना चाहिए।
- संजय राउत, शिव सेना : जिस स्कूल में आप पढ़ते हो, हम उस स्कूल के हेड मास्टर हैं। हमारे स्कूल के हेडमास्टर बालासाहेब ठाकरे थे...।
- अमित शाह : सही बात बाला साहेब हेडमास्टर थे, लेकिन इसकी कमान सोनिया गांधी के हाथ में है। आखिर एक रात में ऐसा क्या हुआ, जो शिव सेना ने अपना रुख बदल दिया।
- पी चिदंबरम : मुझे उम्मीद है कि न्यायपालिका इस बिल को अवैध करार देगी और 'आइडिया ऑफ इंडिया' को बचाएगी।
- अमित शाह : मुझे आइडिया ऑफ इंडिया की बात मत बताइए। मैं भी यहीं पैदा हुआ हूं और मेरी सात पुश्तें यहीं पैदा हुई हैं। मुझे आइडिया ऑफ इंडिया का अंदाजा है।
- गुलाम नबी आजाद, नेता प्रतिपक्ष, राज्यसभा : इस बिल में श्रीलंका के हिंदुओं को क्यों नहीं शामिल किया गया। भूटान से आने वाले ईसाइयों को शामिल क्यों नहीं किया गया?
- अमित शाह : जब इंदिरा जी ने 1971 में बांग्लादेश के शरणार्थियों को स्वीकारा, तब श्रीलंका के शरणार्थियों को क्यों नहीं स्वीकारा। समस्याओं को उचित समय पर ही सुलझाया जाता है। इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।
- डेरेक ओ ब्रायन : ये बिल सुप्रीम कोर्ट में भी जाएगा क्योंकि इनकी नींव झूठ, झांसा और जुमला है।
- अमित शाह : कोई भी व्यक्ति अदालत जा सकता है। सभी के लिए दरवाजे खुले हैं। मुझे विश्वास है कि अदालत में भी कानून सही पाया गया।
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