फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   circumcision custom : Supreme Court Questions On Female Genital Mutilation 

खतना प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- 'महिलाएं केवल शादी और बच्चों के लिए नहीं'

Mon, 30 Jul 2018 06:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 30 Jul 2018 06:49 PM IST
विज्ञापन
circumcision custom : Supreme Court Questions On Female Genital Mutilation 
सुप्रीम कोर्ट

 मुस्लिम दाउदी वोहरा समुदाय की बच्चियों केसाथ होने वाले फिमेल जेनिटल म्यूटलेशन(खतना) परंपरा पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि महिला के जीवन का एकमात्र उद्देश्य शादी और पति नहीं होता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी महिला पर ही यह दायित्व क्यों होना चाहिए कि वह अपने पति को खुश करें।  

विज्ञापन


चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को सुनवाई केदौरान कहा कि महिलाओं पर उसके पति का दबाव बनाना संविधान संवत नहीं होगी। इस तरह का कृत्य एक महिला को आदमी केलिए तैयार करने मकसद से किया जाता है, जैसे वह जानवर हो। साथ ही पीठ ने कहा कि इस तरह की परंपरा निजता केअधिकार का उल्लंघन है।  
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि महिलाओं का जीवन केवल शादी और पति के लिए नहीं होता। शादी केअलावा भी महिलाओं का अलग दायित्व होता है। पीठ ने सवाल किया कि क्या पति को खुश करना ही महिला का दायित्व है? साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि ये लैंगिक संवेदनशीलता का मामला है। यह स्वास्थ्य केलिए भी खतरनाक हो सकता है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने सदस्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का जननांग उसकी निचता, सम्मान और स्वायत्तता केलिए बेहद अहम होता है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश खन्ना ने कहा कि पांच या सात वर्ष की बच्ची को इस मानसिक आधात से गुजरना पड़ता है। इतना ही नहीं यह डॉक्टरों द्वारा नहीं किया जाता है। जवाब में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन इसे अंजाम दे रहा है। सवाल यह है कि क्या यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन नहीं है? 


वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश दूसरी वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि यह परंपरा भारतीय दंड संहिता और पोक्सो के तहत भी अपराध है। और  कोई कृत्य कानून के तहत अपराध है तो उसे धर्म की अहम प्रथा के तौर पर कैसे स्वीकार किया जा सकता है। महिला जननांग को छूना अपराध है। साथ ही उन्होंने कहा है यह प्रथा धर्म का अहम हिस्सा नहीं है क्योंकि यह कहीं और नहीं होता।  इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने इस पर बैन लगा रखा है। केंद्र सरकार ने भी याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि वह धर्म केनाम पर ऐसी कोई भी प्रथा या मान्यता केखिलाफ है जो महिला के अंग की पवित्रता का उल्लंघन करता हो। सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed