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Gujarat: चीनी नागरिक ने नौ दिन में 1200 भारतीयों के लूटे 1400 करोड़ रुपये, कांग्रेस का तंज- कहां हैं ED और CBI

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 18 Aug 2023 05:45 PM IST
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सार
खेड़ा का आरोप है कि  पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए ईडी, सीबीआई, एसएफआईओ आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन चीनी घोटालेबाज उनकी नजर में नहीं आ रहे। वे भारतीयों को लूटते हैं और देश से भाग जाते हैं। पहले विजय माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और अब चीनी नागरिक वू उयानबे के भागने से यह साबित होता है कि मोदी सरकार, एक 'ट्रैवल एजेंसी' है।
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Chinese man scammed 1400 crores through betting app in India Congress taunts Modi government
चीन की धोखाधड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस पार्टी के मीडिया और प्रचार (संचार विभाग) के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने शुक्रवार को एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने केंद्र सरकार और इसकी जांच एजेंसियों पर निशाना साधा है। खेड़ा ने कहा, एक चीनी नागरिक, महज 9 दिन में 1200 भारतीयों के 1400 करोड़ रुपये लूट लेता है। उन्होंने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा, देश में इतनी बड़ी घटना हो जाती है, ऐसे में ईडी और सीबीआई कहां हैं। ये जांच एजेंसी, विपक्षी दलों के नेताओं के यहां पर आए दिन छापा मारती रहती हैं। चीनी घोटालेबाजों की तरफ इन एजेंसियों का ध्यान ही नहीं है, जो भारतीयों को लूटते हैं और देश से भाग जाते हैं।  



पवन खेड़ा ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी, लाल किले से भ्रष्टाचार 'भारत छोड़ो' की बात करते हैं। हालांकि वे पहले भी चीन को 'लाल आंख' दिखाने से चूक गए। अब एक चीनी नागरिक, केवल 9 दिनों में 1200 भारतीयों के 1400 करोड़ रुपये लूट लेता है। अगर कुल नुकसान की बात करें तो वह आंकड़ा 4600 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। खेड़ा का आरोप है कि  पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए ईडी, सीबीआई, एसएफआईओ आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन चीनी घोटालेबाज उनकी नजर में नहीं आ रहे। वे भारतीयों को लूटते हैं और देश से भाग जाते हैं। पहले विजय माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और अब चीनी नागरिक वू उयानबे के भागने से यह साबित होता है कि मोदी सरकार, एक 'ट्रैवल एजेंसी' है। खेड़ा ने कहा, यह सरकार 'धोखाधड़ी, लूट और विदेशी तटों पर उड़ान' की सुविधा देती है। 


गुजरात के अलावा उत्तर प्रदेश के लोग भी हुए शिकार
गुजरात में 1400 करोड़ रुपये की भारी ठगी कर एक चीनी व्यक्ति देश से भाग गया, लेकिन पीएम मोदी या ग़ृह मंत्री अमित शाह उसे रोक नहीं सके। कुछ मीडिया रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि इस पूरे 'Dani Data App' घोटाले ने लोगों को 4600 करोड़ रुपये तक का भारी चूना लगाया होगा। इतना ही नहीं, भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में पुलिस ने इस एप का प्रचार प्रसार किया। एक फुटबॉल सट्टेबाजी ऐप, जिसे आम लोगों का विश्वास हासिल हुआ। सोशल मीडिया पर ऐसी कई तस्वीरें उपलब्ध हैं, जिनमें यूपी पुलिस 'दानी डेटा एप' प्रायोजित 'लव डोनेशन' बैनर के साथ पोज देती नजर आ रही है। वू उयानबे, एक चीनी तकनीकी विशेषज्ञ 2020-22 में भारत में रहा। उसने एक नकली फुटबॉल सट्टेबाजी एप बनाया। भारत से भागने से पहले उसने गुजरात के आम लोगों से करोड़ों रुपये ठग लिए। ठगी के शिकार लोगों में से ज्यादातर बनासकांठा और पाटन से हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से भी ऐसे लोग बताए जा रहे हैं।

प्रतिदिन औसतन 200 करोड़ रुपये हड़पता रहा
कांग्रेस नेता ने गुजरात की सीआईडी का हवाला देते हुए कहा, चीन के शेनझेन क्षेत्र का कथित निवासी उयानबे फुटबॉल खेलों में गहरी रुचि रखने वाले 15 से 75 वर्ष की आयु वर्ग के व्यक्तियों को निशाना बनाकर प्रतिदिन औसतन 200 करोड़ रुपये हड़पने में कामयाब रहा। दिसंबर 2022 तक, गुजरात पुलिस को धोखाधड़ी के शिकार लोगों से 1,088 शिकायतें और हेल्पलाइन 1930 पर 3,600 से अधिक शिकायतें मिली थीं। गुजरात सीआईडी के अनुसार, यहां से लूटा गया पैसा दुबई और यूरोपीय देशों में भेजा गया। यह एक बड़ा हवाला घोटाला हो सकता है। पैसे का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग के लिए किया जा सकता है। दिसंबर 2022 में ही सीआईडी ने एनआईए, ईडी और जीएसटी विभाग को भी जांच में शामिल होने की सूचना दे दी थी। 

क्रिकेट सट्टेबाजी सिंडिकेट का खुलासा हुआ 
सीआईडी 'क्राइम' के इंस्पेक्टर प्रशांत खोखरा के मुताबिक, हमें जो एकमात्र खाता मिला है, वह पैंथर ट्रेडिंग कंपनी' नामक कंपनी का है। यह कंपनी 500 करोड़ रुपये से अधिक का डेबिट और क्रेडिट लेनदेन करती है। ऐसे कई खाते हैं जिनकी हम जांच कर रहे हैं। हाल के दिनों में, महात्मा गांधी और सरदार पटेल की भूमि गुजरात सट्टेबाजी घोटालों और पोंजी योजनाओं का केंद्र बन रही है। पवन खेड़ा ने कहा, 'डबल इंजन' सरकार ने इन योजनाओं का शिकार हुए गुजरातियों की दुर्दशा के प्रति दुखद 'डबल उदासीनता' प्रदर्शित की है। इस मामले में फरवरी 2023 में एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े 1,414 करोड़ रुपये के रैकेट का पर्दाफाश हुआ था। अपराध शाखा (डीसीबी) की जांच में दर्ज की गई शिकायत के अनुसार, क्रिकेट सट्टेबाजी रैकेट की जांच कर रहे एक उप-निरीक्षक ने पाया कि अप्रैल 2022 और सितंबर 2022 के बीच 11 खातों का उपयोग करके हवाला धन स्थानांतरित किया गया था। हवाला लेनदेन की निगरानी राजकोट स्थित एक एजेंसी द्वारा की गई थी। पुलिस का कहना है कि सट्टेबाज राकेश राजदेव दुबई चला गया है। मार्च 2023 में, अहमदाबाद पुलिस की अपराध निरोधक शाखा (पीसीबी) ने क्रिकेट सट्टेबाजी और डब्बा ट्रेडिंग (आम बोलचाल में शेयर बाजार घोटाला) में 2,200 करोड़ रुपये के हवाला घोटाले का खुलासा किया। 

10,000 से अधिक बैंक खातों का पता चला
पीसीबी अधिकारियों के अनुसार, देश और दुबई के विभिन्न सट्टेबाजों की ओर से रैकेट चलाने के आरोप में शहर के चार लोगों को पकड़ा गया था। पुलिस ने कहा कि आरोपी 2021 से घोटाला कर रहे थे। वे हवाला लेनदेन के लिए आम लोगों के बैंक खाते खोलते थे। अब तक की जांच में पूरे भारत में 10,000 से अधिक बैंक खातों का पता चला है। माना जाता है कि आरोपी दीपक ठक्कर और भरत ठक्कर, दोनों वर्तमान में दुबई में हैं, उन्होंने शेयर बाजार की चाल पर दांव लगाने के लिए सर्वर संचालित करने के लिए शहर के अन्य लोगों को शामिल किया। जुलाई 2022 में, गुजरात के वडनगर में आईपीएल क्रिकेट लीग की नकल करते हुए एक विचित्र घोटाला हुआ। मेहसाणा पुलिस के अनुसार, रूस में सट्टेबाजों को धोखा देने के लिए एक गिरोह नकली 'क्रिकेट टूर्नामेंट' के रूप में एक विस्तृत शो चला रहा था। खिलाड़ियों को प्रतिदिन मात्र 400 रुपये पर काम पर रखा गया था। क्रिकेट का मैदान वास्तव में वडनगर के मोलीपुर में एक खेत था। वहां नकली भीड़ शोर मचाने वाले स्पीकर सिस्टम थे। ब्रॉडकास्टर हर्षा भोगले की नकल करने के लिए एक कमेंटेटर को काम पर रखा गया था। अंपायर को निर्देश प्राप्त हो रहे थे। उसकी वॉकी-टॉकी के जरिए प्रत्येक डिलीवरी पर सट्टेबाजी की संभावनाओं के बारे में खिलाड़ियों को बताया जाता था।  

कांग्रेस ने पूछे केंद्र सरकार से सवाल
गलवान के बाद जैसे चीनी घुसपैठियों के बारे में पीएम मोदी न कहा था कि 'भारत में कोई घुसा ही नहीं', क्या वे फिर ऐसा दोहरायेंगे। भारत में कुछ चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद, क्या मोदी सरकार अब चीनी नागरिकों को 'मेक चाइनिज एप इंडिया' के लिए आमंत्रित कर रही है। भारत से भाग रहे चीनी नागरिक वू उयानबे को या उसके डिजिटल घोटाले को देश की केंद्रीय जांच एजेंसियां क्यों नहीं पकड़ सकीं। जब सैकड़ों लोगों को दानी डेटा एप ने लूट लिया था और वे सोशल मीडिया पर अपनी दुर्दशा बता रहे थे, तब केंद्र सरकार कुम्भकरणीय नींद में क्यों सो रही थी। यूपी पुलिस ने उस एप को क्यों प्रमोट किया। इस प्रचार अभियान के पीछे कौन हैं। क्या इस सहयोग के पीछे योगी आदित्यनाथ के शासन वाले उत्तर प्रदेश में भाजपा ईकोसिस्टम तंत्र से कोई है। क्या इसके पीछे की कोई जाँच नहीं हुई थी।  गुजरात में दुबई और यूक्रेन से हवाला लेनदेन के साथ सट्टेबाजी घोटाले की बाढ़ देखी गई है। लगातार ड्रग्स की बरामदगी के बाद क्या भाजपा अब गुजरात को जुए के काले धंधे की ओर धकेल रही है।

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