ऑस्ट्रेलिया को इस तरह ‘सजा’ दे रहा चीन, गेंहू से लेकर तमाम जरूरी सामानों का आयात रोका
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चीन की ताजा कार्रवाइयों का साफ संकेत है कि उसने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अघोषित व्यापार युद्ध छेड़ दिया है। चीन शुक्रवार यानी 6 नवंबर से ऑस्ट्रेलिया से जौ, गन्ना, रेड वाइन, लकड़ी, कोयला, तांबा और ताम्र अयस्क का आयात रोकने जा रहा है। वह जल्द ही ऑस्ट्रेलिया से गेहूं का आयात भी रोक देगा। चीन अभी हर साल ऑस्ट्रेलिया से 39 करोड़ 40 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के गेहूं का आयात करता है।
यहां से बिगड़े रिश्ते
गौरतलब है कि दोनों देशों के रिश्ते हाल में काफी बिगड़ गए हैं। ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने में चीन की गड़बड़ी, हांगकांग में मानवाधिकारों के कथित हनन और चीन के शिनजियांग प्रांत में उइघुर मुसलमानों पर कथित ज्यादतियों के मुद्दे जोरशोर से उठाए हैं। वह अमेरिका के नेतृत्व वाले क्वैड का भी सक्रिय सदस्य है, जिसमें भारत और जापान भी शामिल हैं, इस ग्रुप के चारों देशों की नौसेनाएं बंगाल की खाड़ी में सैन्य अभ्यास कर रही हैं। गुट को चीन का प्रभाव रोकने की एक कोशिश के रूप में देखा जाता है।
कंपनियों से आयात रोकने कहा कहा
खबरों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया को ‘सजा’ देने का यह कदम चीन औपचारिक रूप से नहीं उठाएगा। उसने अपने देश की सरकारी और निजी आयातक कंपनियों को आयात रोकने को कहा है। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, चीन के व्यापारियों को भी ऐसा आदेश जुबानी दिया गया है। उन्होंने कोई औपचारिक सरकारी पत्र नहीं दिया गया है। लेकिन व्यापारियों को साफ बता दिया गया है कि ऑस्ट्रेलिया ने ये सामान अपने जहाजों को किसी तीसरे देश के माध्यम से भेजा, तब भी उन जहाजों को बंदरगाहों से लौटा दिया जाएगा।
झींगा मछली का आयात भी रोका
ऑस्ट्रेलिया की वेबसाइट नाइनन्यूज.कॉम के मुताबिक, चीन ने ऑस्ट्रेलिया से झींगा मछली के आयात पर भी रोक लगा दी है। इस कारण ऑस्ट्रेलिया से निर्यात हुई 20 टन झींगा मछली की खेप शंघाई में क्लीयरेंस के अभाव में फंसी हुई है। ऑस्ट्रेलिया से झींगा मछली के होने वाले निर्यात का 95 फीसदी हिस्सा चीन जाता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया को 75 करोड़ डॉलर की आमदनी होती है। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि चीन के कदम से बहुत नुकसान होगा।
चीन के इन कदमों का ऑस्ट्रेलिया में असर दिखने लगा है। वहां के कृषि मंत्री डेविड लिटलप्राउड ने नरम रुख अपनाते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया सरकार चीनी अधिकारियों से बातचीत कर मसले का हल निकालने की कोशिश करेगी। उधर चीन में ऑस्ट्रेलिया के एक पूर्व राजदूत ज्योफ रेबी ने अपनी एक नई किताब में ऑस्ट्रेलिया सरकार को चीन के बारे में अपने सख्त रुख पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया चीन के साथ अपने रिश्ते नहीं संभाल पाया, तो उसे अमेरिका का पिछलग्गू बनकर रहना पड़ेगा।
विश्लेषकों के मुताबिक, चीन का कदम उसकी जोर जबरदस्ती वाली कूटनीति की मिसाल है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने मीडिया को बताया है कि गुजरे दस वर्षों में चीन ने कुल 27 देशों के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां की हैं। कुछ दूसरे विश्लेषकों इस सिलसिले में भारत के खिलाफ लद्दाख में चीन की सैनिक कार्रवाई का भी जिक्र किया है।