चीन नहीं भुला पाया डोकलाम के जख्म, विवाद को हवा देने की कर रहा कोशिश
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ढाई महीने तक चला डोकलाम विवाद भारत के लिए बीते दिनों की बात हो चुका है, लेकिन चीन अभी भी इस विवाद के जख्मों को भुला नहीं पाया है। ब्रिक्स समेलन के बाद चीन एक बार फिर डोकलाम विवाद की आग को हवा देने में लगा हुआ है। ऐसा लग रहा है कि अब तक अगर चीन डोकलाम पर शांत था तो बस इसलिए की ब्रिक्स सम्मेलन सफलतापूर्वक हो जाए।
चीन ये नहीं चाहता था कि डोकलाम विवाद के चलते ब्रिक्स सम्मेलन असफल हो और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की छवि पर कोई आंच आए। पिछले कुछ हफ्तों में चीन ने इस बात का संकेत दे दिया है कि वह डोकलाम विवाद को अभी तक नहीं भूला है।
3 अक्तूबर को चीनी दूतावास ने भारत यात्रा को लेकर अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की, जिसमें उन्होंने अंडमान निकोबार द्वीप पर जाने से मना किया गया। साथ ही उन्होंने भारतीय सीमा से लगे इलाकों में न घूमने, फोटो न लेने के लिए निर्देश दिया था।
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इसके बाद 9 अक्तूबर को बीजिंग ने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के नाथू ला दौरे को सराहा। ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में इसे अच्छा कदम बताया गया। लेख में लिखा गया था कि संकट के वक्त में कैसे काम किया जाता है यह दोनों देशों ने सीख लिया है। साथ ही लिखा कि दोनों देशों के संबंधों को और बेहतर किया जा सकता है।
डोकलाम में चीन बढ़ा रहा है सैनिकों की संख्या
चीन ने भारत के साथ डोकलाम विवाद निपटाने के बाद, उस क्षेत्र में दोबारा निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। हालांकि वह डोकलाम में लगातार अपने सैनिकों की मौजूदगी बढ़ा रहा है। वहीं चीन ने बड़ी ही चालाकी से डोकलाम में महज 10 किमी की दूरी पर रोड निर्माण का कार्य शुरू किया है, लेकिन वह भारत के साथ किसी भी विवाद से बच रहा है।
माना जा रहा है कि चीन ने पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने वाले ओआरओबी प्रोजेक्ट में भारी निवेश किया है। ऐसे में वह कोई भी विवाद नहीं चाहता जिससे उसके इस प्रोजेक्ट पर कोई आंच आए। इसके लिए वह भारत के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार कर रहा है।