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छत्तीसगढ़ के चावल की तीन किस्म से होगा कैंसर का इलाज

Mon, 19 Feb 2018 02:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Updated Mon, 19 Feb 2018 02:04 AM IST
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Chhattisgarh's three varieties of rice will be use for cancer treatment

वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अगर छत्तीसगढ़ में उगाए जाने वाले धान की तीन प्रजातियों में कैंसर रोधी तत्व मिले हैं। यानी अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस चावल और इनसे बनने वाली दवा से कैंसर का इलाज संभव होगा। इन किस्मों के नाम हैं, गठवन, महाराजी और लाईचा। 

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गठवन, महाराजी और लाईचा प्रजाति में मिले कैंसर रोधी गुण

वैज्ञानिक दीपक शर्मा के मुताबिक रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी) और भाभा परमाणु शोध केंद्र (बीएआरसी) मुंबई ने यह शोध किया है। दीपक आईजीकेवी के जैविक और पौध संकर विभाग में मुख्य वैज्ञानिक हैं। उन्होंने बताया कि आईजीकेवी के राइस जर्मप्लाज्मा बैंक से धान की ये तीनों प्रजातियां ली गईं। 
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शोध में पाया गया कि इनमें फेफड़े के कैंसर का इलाज करने का गुण है और वह भी सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना। दावा है कि मरीज अगर रोज 200 ग्राम इन चावलों का सेवन करें तो शरीर में कैंसर रोकने वाले तत्वों की पर्याप्त मात्रा पहुंच जाएगी।  
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लाईचा किस्म सबसे कारगर

दीपक की मानें तो इन किस्मों में से लाईचा में कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने और उन्हें नष्ट करने के सबसे ज्यादा गुण हैं। गठवान में गठिया के इलाज का भी गुण मिला है। वहीं लाईचा से त्वचा संबंधी बीमारियों का भी इलाज किया जाता है। गठवन धान के मेथेनॉल में बने एक्सट्रेक्ट ने दस फीसदी कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया। वहीं महाराजी ने 35 फीसदी और लाईचा ने 65 प्रतिशत कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर दिया।

अब चूहों पर होगा शोध

शोध के अगले चरण में धान से कैंसर रोधी तत्व को निकाल कर चूहों पर ट्रायल किया जाएगा। पिछले साल यूजीसी से संबद्ध आईजीकेवी ने बीएसआरसी से फसलों पर शोध का कई समझौता किया था। इसी समझौते के तहत बीएसआरसी के वैज्ञानिक वीपी वेणुगोपालन के दिशा-निर्देश में धान की तीन प्रजातियों पर यह शोध किया जा रहा है। 


आईआईटी मद्रास में भारत आधारित कैंसर जीनोम डेटाबेस

आईआईटी मद्रास भारत आधारित कैंसर जीनोम डेटाबेस बनाने की प्रक्रिया में है। इससे कैंसर की जांच और उसका इलाज बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। राष्ट्रीय कैंसर उत्तक बायोबैंक (एनसीटीबी) अपने तरह का समुदाय आधारित पहला प्रयास है। इसमें भारतीय कैंसर मरीजों के उत्तक लेकर कैंसर जीनोम डेटाबैंक तैयार किया जा रहा है। अब तक देश में कोई ऐसा प्रयास नहीं हो रहा था। एनसीटीबी के फैकल्टी इंचार्ज प्रोफेसर एस महालिंगम ने यह बता कही है। उनके मुताबिक इस प्रयास के लिए हर प्रकार के कैंसर के उत्तक जुटाए जा रहे हैं। 

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