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CRPF के लिए घातक साबित हुआ एक रोड का इस्तेमाल, ग्रामीणों के जरिए माओवादियों ने किया ट्रैक

Wed, 26 Apr 2017 10:46 AM IST
amarujala.com- presented by: नंदलाल शर्मा
amarujala.com- presented by: नंदलाल शर्मा Updated Wed, 26 Apr 2017 10:46 AM IST
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Chhattisgarh Sukma attack Maoists kept track as CRPF men took same road for days
शहीद जवानों को रायपुर में दी गई श्रद्धांजलि - फोटो : फाइल फोटो
छत्तीसगढ़ के सुकमा में सोमवार को हुए माओवादी हमले की शुरुआती जांच में पाया गया है कि सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन तीन ग्रुप में बंट गई थी और इनमें पहला ग्रुप 36 जवानों का था, जो माओवादियों के हमले का शिकार हुआ। 
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99 जवानों की इस बटालियन को 5.5 किलोमीटर लंबी एक सड़क के निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा का काम दिया गया था। यह सड़क माओवादियों के गढ़ बुर्कापाल और चिंतागुफा को जोड़ती है। 
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तकरीबन 400 माओवादियों ने सीआरपीएफ की पहली टीम पर हमला किया और इसके बाद बाकी के दो ग्रुप अपने साथियों के बचाव के लिए आए.. लेकिन माओवादियों ने इन दोनों ग्रुप को भी निशाना बनाया। यही नहीं माओवादियों ने जवानों की फायरिंग से बचने के लिए ग्रामीणों को कवर के रूप में इस्तेमाल किया। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सीआरपीएफ के जवान पिछले कुछ दिन से एक ही सड़क का इस्तेमाल आने जाने के लिए कर रहे थे। ऐसे में माओवादियों ने उन पर नजर रखना आसान साबित हुआ और इसके लिए उन्होंने ग्रामीणों को इस्तेमाल किया। 

हमले की व्याखा करते हुए सरकारी अधिकारी ने कहा कि सीआरपीएफ जवानों पर हमले के लिए माओवादियों ने एके-47 असाल्ट राइफल, इंसास राइफल, रॉकेट लॉचर, मोर्टार के साथ ग्रेनेड लांचर का भी इस्तेमाल किया। 


खाना खा रहे थे जवान, जब माओवादियों ने किया हमला
माओवादियों ने पहला हमला तब किया जब सीआरपीएफ के जवान जंगल में लंच में कर रहे थे। जवानों की पहली टीम का एक तिहाई हिस्सा पहरेदारी कर रहा था। हालांकि रायपुर में सीआरपीएफ अधिकारियों ने इसे खारिज किया है। 

माओवादी जवानों से 22 राइफल इनमें 12 एके-47, 5 इंसास, 3400 जिंदा कारतूस, एके 47 राइफल की 75 मैगजीन, 67 यूबीजीएल राउंड, 22 बुलेट प्रूफ जैकेट के साथ 5 वायरलेस सेट और मेटल डिटेक्टर भी लूट ले गए। सीआरपीएफ अधिकारियों ने बीते सात सालों में इसे सबसे बड़ा हमला बताया है साथ ही इसे अब तक की सबसे बड़ी लूट भी कहा है। 

सूत्रों का कहना है कि हमले को पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी ने कमांडर हिडमा के नेतृत्व में इसे अंजाम दिया है। कहा जा रहा है कि हिडमा के नेतृत्व में ही पीएलजीए ने 11 मार्च को सीआरपीएफ की टीम पर हमला किया था, जिसमें 12 जवान मारे गए थे। इसके साथ ही 2013 में दरभा घाटी में कांग्रेस नेताओं पर हमला जिसमें 27 लोग मारे गए, 2010 में चिंतलनार में सीआरपीएफ पर हमला, जिसमें 76 जवान शहीद हो गए थे। इन सभी के पीछे हिडमा का हाथ है। 

नक्सलियों की बस्तर डिवीजनल कमिटी का नेतृत्व कमांडर रघु के हाथ में है और उनकी रणनीति सुरक्षा बलों पर हमला कर सड़कों का निर्माण रोकना है। 
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