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Chhattisgarh: नंदकुमार साय कैसे कांग्रेस के लिए साबित होंगे फायदेमंद? आदिवासी क्षेत्रों में ऐसे बदलेंगे समीकरण

Mon, 01 May 2023 02:47 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Mon, 01 May 2023 02:47 PM IST
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सार
साय की राजनीति ऐसी रही है कि वे विवादों से दूर रहे हैं। इसी कारण राजनीति में उनके बारे में नकारात्मक टिप्पणी कभी सुनने में नहीं आई। कांग्रेस आने वाले विधानसभा में साय के प्रभाव का इस्तेमाल करना चाहेगी। विधानसभा चुनाव के बाद अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस साय के चेहरे को सामने करेगी...
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Chhattisgarh: How will former BJP Tribal leader Nandkumar Sai could be beneficial for the Congress?
Chhattisgarh- Nandkumar sai join Congress - फोटो : Agency

विस्तार

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में बहुत कम वक्त बचा है। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी को राज्य में बहुत बड़ा झटका लगा हैं। पार्टी के बड़े चेहरे और राज्य के कद्दावर आदिवासी नेता नंदकुमार साय भाजपा से इस्तीफा देकर कांग्रेसी हो गए हैं। साय ने अपने इस्तीफे में  अपनी ही पार्टी के राजनीतिक प्रतिद्वंदियों पर छवि धूमिल करने का आरोप लगाया है। साय के इस्तीफे और आरोपों के बाद से प्रदेश भाजपा के नेताओं ने चुप्पी साध ली है। साय पांच बार सांसद, तीन बार विधायक, दो बार प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं।

साय भाजपा में कई दिनों से अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रहे थे। सोमवार को उन्होंने सीएम भूपेश बघेल की मौजूदगी में कांग्रेस का दामन थाम लिया है। आने वाले वक्त में कांग्रेस उन्हें कोई बड़ा पद दे सकती है। संकेत हैं कि उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है। कांग्रेस में उन्हें लाने के लिए कांग्रेस के ही एक स्थानीय नेता ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। पिछले पांच दिनों से साय कांग्रेस नेताओं के संपर्क में थे। कांग्रेस में जाने का फैसला होने के बाद रविवार को उन्होंने भाजपा से अपनी नाराजगी जताते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।

यह भी पढ़ें: चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ BJP को बड़ा झटका: क्या है साय के इस Video में, क्यों छोड़ी पार्टी, किस पर लगाया आरोप

साय की राजनीति ऐसी रही है कि वे विवादों से दूर रहे हैं। इसी कारण राजनीति में उनके बारे में नकारात्मक टिप्पणी कभी सुनने में नहीं आई। कांग्रेस आने वाले विधानसभा में साय के प्रभाव का इस्तेमाल करना चाहेगी। विधानसभा चुनाव के बाद अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस साय के चेहरे को सामने करेगी। कांग्रेस के पास अभी तक सरगुजा के आदिवासी बेल्ट में नेता जरूर थे। लेकिन जशपुर में किसी दमदार चेहरे की कमी थी। नंदकुमार साय के आने से पार्टी वहां पहले के मुकाबले और मजबूत होगी।

साय इसलिए है कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा

अमर उजाला से चर्चा में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार देवेश तिवारी कहते हैं कि नंदकुमार साय का भाजपा से इस्तीफा सामान्य बात नहीं है। वे प्रदेश में अटल-आडवाणी दौर के नेता हैं। उन्होंने प्रदेश में भाजपा को खड़ा करने में बहुत मेहनत की है। आदिवासियों का नेतृत्व करने की जब भी बात आती थी, तो भाजपा साय का नाम ही आगे करती रही है। यहां तक कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन होने पर भाजपा ने सबसे पहले उन पर भी भरोसा जताया था और उनको प्रथम नेता प्रतिपक्ष बनाया था। चुनाव से ठीक पहले आदिवासी बहुल राज्य छत्तीसगढ़ में साय का भाजपा छोड़ना बड़ा झटका है। आदिवासियों में गहरी पैठ रखने वाला ये नेता अब कांग्रेस से जुड़ गए हैं।  इससे कांग्रेस को आदिवासी वर्ग से जुड़ाव में काफी फायदा होगा। प्रदेश की 29 सीटें आदिवासी बाहुल हैं। जबकि कुछ सीटों पर आदिवासी वोटर्स निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। इसलिए कांग्रेस के लिए यह महत्वपूर्ण साबित होंगे। क्योंकि छत्तीसगढ़ के आदिवासियों बीच उनकी पैठ गहरी मानी जाती है।

लंबे समय से चल रहे थे नाराज

साय को छत्तीसगढ़ में भाजपा की नींव रखने वाले नेताओं में से एक माना जाता है। पूर्व अध्यक्ष लखीराम अग्रवाल के साथ मिलकर उन्होंने छत्तीसगढ़ में भाजपा का संगठन खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है। साय एक समय पार्टी के पोस्टर बॉय माने जाते थे। वर्ष 2000 में राज्य बनने के बाद नेता प्रतिपक्ष नियुक्त होते ही वह राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। 2003 में विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ मरवाही से चुनाव लड़ने की वजह से साय काफी चर्चा में आए थे। साय बीच-बीच में पार्टी में अपना असंतोष जाहिर करते रहे हैं। कुछ दिनों पहले जब आरक्षण को लेकर उन्होंने धरना दिया था, तब भाजपा का कोई नेता उनके साथ खड़ा नहीं हुआ था। तभी से साय और भाजपा के बीच दूरियां बढ़ने की चर्चा होने लगी थी।

कौन हैं नंदकुमार साय?

नंदकुमार साय पांच बार सांसद तीन बार विधायक दो बार प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश में साय प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं। साथ ही वे छत्तीसगढ़ भाजपा के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। नंदकुमार साय 1989 में लोकसभा सांसद बने और 1996 में दूसरी बार और 2004 में राज्य गठन के बाद तीसरी बार लोकसभा सांसद बने।

इसके बाद उनका सियासी सफर आगे बढ़ा और 2009 में राज्यसभा के सांसद के लिए चुने गए। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में उन्हें 2017 में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। इन सबके अलावा वे अविभाजित मध्यप्रदेश में भी भाजपा के कई बड़े पदों पर रहे। 1996 में मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति के प्रदेश अध्यक्ष बने, इसके बाद पार्टी ने 1997 से 2000 के बीच मध्यप्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई। यह पार्टी के भीतर उनके कद का ही कमाल था कि 2000 में जब छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश से अलग हुआ तो नंदकुमार साय राज्य के विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता भी बने।

 

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