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Chhattisgarh Ed Raid: अगर ‘मुखौटा’ साबित हुआ, तो सीएम बघेल के साथ दिल्ली दरबार तक पहुंचेगी खनन मामले की आंच

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 14 Oct 2022 12:01 PM IST
सार

Chhattisgarh Ed Raid: ईडी द्वारा इस मामले में अभी तक कई जगहों पर छापेमारी की गई है। कई आईएएस अधिकारी जांच एजेंसी के रडार पर हैं। आईएएस समीर बिश्नोई गिरफ्तार हो चुके हैं। उनकी पत्नी से सवाल जवाब किए जा रहे हैं। जयप्रकाश मौर्या से भी पूछताछ हो रही है। उनकी पत्नी एवं रायगढ़ की कलेक्टर रानू साहू के घर पर ईडी पहुंची है...

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Chhattisgarh Ed Raid: if involvement of shell company appeared, CM Bhupesh Baghel could be in trouble
Chhattisgarh Ed Raid: IAS officer Sameer Vishnoi - फोटो : Agency

विस्तार

छत्तीसगढ़ के माइनिंग केस में ईडी ने एकाएक छापेमारी बढ़ा दी है। जिस तरह दिल्ली और दूसरे स्थानों से ईडी के बड़े अफसर रायपुर पहुंचे हैं, उसे देखकर कहा जा सकता है कि ये बड़ा मामला है। आईएएस अधिकारियों, नेताओं और दूसरे लोगों के यहां पर सिलसिलेवार तरीके से दबिश दी जा रही है। गिरफ्तार करने में पूरी सावधानी बरती जा रही है। जांच एजेंसी के पास मौजूद दस्तावेज और पूछताछ, इनकी कड़ियां जोड़ने के बाद ही आरोपी को हिरासत में ले लिया जाता है।

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जानकारों का कहना है कि अगर छत्तीसगढ़ में मुखौटा कंपनियों का राज खुला, तो मुख्यमंत्री बघेल के अलावा कांग्रेस के दिल्ली दरबार तक माइनिंग केस की आंच पहुंच सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि माइनिंग का पैसा आखिर किस नाम से यानी मुखौटा कंपनियों के जरिए कहां पर निवेश किया गया है। जांच एजेंसी के शीर्ष अफसर, दिल्ली एवं रायपुर से इस केस को देख रहे हैं। आने वाले दिनों में छापे और गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही वे लोग भी एजेंसी के शिकंजे में आएंगे, जिन्होंने मध्यस्थ बनकर मुखौटा कंपनियों में सरकारी और गैर सरकारी लोगों का पैसा लगवाया है।

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कलेक्टर रानू साहू के घर पहुंची है ईडी

ईडी द्वारा इस मामले में अभी तक कई जगहों पर छापेमारी की गई है। कई आईएएस अधिकारी जांच एजेंसी के रडार पर हैं। आईएएस समीर बिश्नोई गिरफ्तार हो चुके हैं। उनकी पत्नी से सवाल जवाब किए जा रहे हैं। जयप्रकाश मौर्या से भी पूछताछ हो रही है। उनकी पत्नी एवं रायगढ़ की कलेक्टर रानू साहू के घर पर ईडी पहुंची है। इनके अलावा करीब डेढ़ दर्जन कारोबारी और कई नेता भी जांच एजेंसी की सूची में हैं। छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये की नकदी, जूलरी और दस्तावेज बरामद हुए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, बैंक से संबंधित एवं दूसरे दस्तावेजों की जांच पड़ताल हो रही है। मुखौटा कंपनियों का पता लगाया जा रहा है। माइनिंग के जरिए अवैध तरीके से कमाया गया पैसा केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में भी निवेश किया गया है।

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एजेंसी द्वारा मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं

सूत्रों का कहना है कि पूर्व विधायक अग्नि चंद्राकर, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी, बादल मक्कड़, सन्नी लूनिया व अजय नायडू के आवास से जांच एजेंसी को कई तरह के संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं। कई लोगों को पूछताछ के लिए अगले सप्ताह बुलाया गया है। सीएम कार्यालय के अधिकारियों से पूछताछ बाबत जांच एजेंसी के एक अधिकारी का कहना था, अभी इस मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। ये मामला केवल दो-चार लोगों तक ही नहीं सिमटा है, अपितु इसकी जड़ें बहुत दूर तक हैं। राजनेता, अफसर एवं दूसरे लोग, जांच के दायरे में हैं। कोयला कारोबारी सुनील अग्रवाल और शराब के व्यवसायी प्रिंस भाटिया के ठिकानों बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में एजेंसी के अधिकारी का कहना था, उम्मीद रखें कि ऐसे ही स्थानों से मुखौटा कंपनियों तक पहुंचा जाएगा।

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड व दूसरे राज्यों में भी एजेंसी पहुंच रही है। कोरबा कलेक्ट्रेट में जो छापा मारा गया है, उस बाबत ईडी अधिकारियों ने कुछ बताने से मना कर दिया। उनका केवल इतना कहना था, खनिज विभाग से जुड़े पूर्व एवं मौजूदा कई अधिकारियों से पूछताछ हो रही है। कोरबा के कलेक्टर सहित दूसरे कई कर्मियों से सवाल पूछे गए हैं। माइनिंग विभाग के अधिकारी शिव शंकर नाग से हुई पूछताछ के बाद जांच एजेंसी 'ईडी' ने कई दूसरे अफसरों के यहां दबिश दी है।  

नौकरशाहों की काली कमाई, खुलेंगे कई राज

छत्तीसगढ़ में ईडी के छापों से राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है। कई माह पहले जब आयकर विभाग ने कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी के रायपुर और महासमुंद स्थित ठिकानों पर छापा मारा था, तो उन्होंने एक सनसनीखेज खुलासा किया था। तिवारी का आरोप था कि उन पर यह दबाव बनाया जा रहा है कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय का इस मामले में नाम लें। ऐसे में उन्हें बड़ा राजनीतिक फायदा मिल सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा, दर्जनों अधिकारियों के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई हुई है। सरकार और उसके नौकरशाहों की काली कमाई से जुड़े कई राज खुलेंगे। खदान से प्रति टन कोयले पर 25 रुपये, इस राज से भी पर्दा उठेगा। ऐसे कौन से कलेक्टर हैं, जो अवैध माइनिंग में सरकारी एजेंट बनकर काम कर रहे थे, अब सब कुछ सामने जाएगा।

पूर्व सीएम ने इशारों में बघेल को सोनिया गांधी का एटीएम तक कह दिया था। छत्तीसगढ़ वासियों के सम्मान और मेहनत का पैसा लूटने नहीं देंगे। रमन सिंह ने एक डायरी और व्हाट्सएप चैट का जिक्र भी किया था। उन्होंने लिखा, एटीएम का पैसा कहां-कहां, कैसे-कैसे पहुंचा, ये भी जनता अच्छी तरह जान जाए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्विटर पर लिखा, 'भ्रष्टाचार के अंतरराष्ट्रीय पितामह' को लगता है कि मार्गदर्शक मंडल में हुई 'वाइल्ड कार्ड एंट्री' से बाहर आने के लिए छत्तीसगढ़ को बदनाम करेंगे, ये नहीं चलेगा। कौन किसका एटीएम है, इसका प्रमाण तो देना ही पड़ेगा। पनामा के खाते में दर्ज है, जिनका नाम वो फिर करने लगे छत्तीसगढ़ को बदनाम।

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