Cheetah Is Back: राहुल गांधी बोले- आठ चीते तो आए, आठ सालों में 16 करोड़ रोज़गार क्यों नहीं आए?
पूर्व केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्री रमेश ने कहा कि वे 25 अप्रैल 2010 को केपटाउन गए थे। यह यात्रा इसी चीता परियोजना का हिस्सा थी। रमेश ने कहा कि आज प्रधानमंत्री द्वारा किया गया तमाशा अनुचित है।
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पीएम नरेंद्र मोदी के 72 वें जन्मदिन के मौके पर मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों को छोड़ने पर अब सियासत गरमा गई है। पीएम मोदी को शुभकामनाओं के साथ विपक्षी दलों ने पहले उन पर तंज कसे और कांग्रेस ने तो अब इसे ‘पीएम मोदी द्वारा रचित 'चीता तमाशा‘ करार दे डाला। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय मुद्दों व भारत जोड़ो यात्रा से देश का ध्यान भटकाने का यह एक और प्रयास है।
मामले में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी केंद्र पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 8 चीते तो आ गए, अब ये बताइए कि 8 सालों में 16 करोड़ रोजगार क्यों नहीं आए? युवाओं की है ललकार, ले कर रहेंगे रोजगार।
कांग्रेस महासचिव और पार्टी के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने फिर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री शासन की निरंतरता को शायद ही कभी मानते हैं। ‘चीता परियोजना‘ भी इसका ताजा उदाहरण है। वर्ष 2009-11 के दौरान पर्यावरण और वन मंत्री रहे जयराम रमेश ने अपनी केपटाउन यात्रा का जिक्र करते हुए एक ट्वीट में यह बात कही।
पूर्व केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्री रमेश ने कहा कि वे 25 अप्रैल 2010 को केपटाउन गए थे। यह यात्रा इसी चीता परियोजना का हिस्सा थी। रमेश ने कहा कि आज प्रधानमंत्री द्वारा किया गया तमाशा अनुचित है। यह राष्ट्रीय मुद्दों और भारत जोड़ो यात्रा से ध्यान हटाने का एक और प्रयास है। उन्होंने कहा कि 2009-11 के दौरान बाघों को पहली बार जब पन्ना और सरिस्का अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया था तो काफी लोगों ने विलाप करते हुए भविष्यवाणी की थी, लेकिन ये लोग गलत साबित हुए थे। चीता परियोजना को भी लेकर इसी तरह की भविष्यवाणियां की जा रही हैं, लेकिन इसमें शामिल पेशेवर अव्वल दर्जे के हैं, मैं इस परियोजना को शुभकामनाएं देता हूं।‘
बता दें, पीएम मोदी ने आज अपने जन्मदिन पर नामीबिया से लाए गए चीतों में से दो को मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क ;में बनाए गए एक विशेष बाड़े में छोड़ा है। पीएम ने चीतों को छोड़ने के बाद कैमरे से उनकी कुछ तस्वीरें भी लीं। इन चीतों को शनिवार सुबह विशेष विमान से नामीबिया से ग्वालियर लाया गया। बाद में इन्हें भारतीय वायु सेना ;के दो हेलीकॉप्टरों में श्योपुर जिले में स्थित कूनो अभयारण्य लाया गया। अधिकारियों ने बताया कि मूल रूप से 2009 में ‘अफ्रीकी चीता इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट इन इंडिया‘ की कल्पना की गई थी। इन चीतों को पिछले साल नवंबर में छोड़ा जाना था, लेकिन कोविड-19 के कारण इसमें विलंब हुआ।
पीएम बोले-दशकों पहले जैव-विविधता की टूट गई थी कड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से आए चीतों को छोड़ने के बाद देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा, दशकों पहले जैव विविधता की सदियों पुरानी जो कड़ी टूट गई थी, आज हमें उसे फिर से जोड़ने का मौका मिला है। आज भारत की धरती पर चीते लौट आए हैं। इन चीतों के साथ ही भारत की प्रकृतिप्रेमी चेतना भी पूरी शक्ति से जागृत हो उठी है।
पीएम ने कहा कि मैं हमारे मित्र देश नामीबिया और वहां की सरकार का भी धन्यवाद करता हूं, जिसके सहयोग से दशकों बाद चीते भारत की धरती पर वापस लौटे हैं। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य रहा कि हमने 1952 में चीतों को देश से विलुप्त तो घोषित कर दिया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए दशकों तक कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ। आज आजादी के अमृतकाल में अब देश नई ऊर्जा के साथ चीतों के पुनर्वास के लिए जुट गया है। जब प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण होता है तो हमारा भविष्य भी सुरक्षित होता है। विकास और समृद्धि के रास्ते भी खुलते हैं। पीएम ने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में जब चीता फिर से दौड़ेंगे तो यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र फिर से मजबूत होगा और जैव विविधिता बढ़ेगी।
देशवासियों को दिखाना होगा धैर्य
पीएम ने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए चीतों को देखने के लिए देशवासियों को कुछ महीने का धैर्य दिखाना होगा। इंतजार करना होगा। आज ये चीते मेहमान बनकर आए हैं, इस क्षेत्र से अनजान हैं। कूनो नेशनल पार्क को ये चीते अपना घर बना पाएं, इसके लिए हमें इन चीतों को भी कुछ महीने का समय देना होगा। अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन्स पर चलते हुए भारत इन चीतों को बसाने की पूरी कोशिश कर रहा है। हमें अपने प्रयासों को विफल नहीं होने देना है।