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देश नाप रहे नायडू का घर वाईएसआर ने छीना, हार-जीत की ये रही बड़ी वजहें
Fri, 24 May 2019 05:15 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Fri, 24 May 2019 05:15 AM IST
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जगनमोहन रेड्डी (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू विपक्षी दलों में एकता कायम करने को पूरे देश का दौरा करते रहे लेकिन उनकी अपनी तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) को विधान सभा चुनावों में बुरी तरह से शिकस्त झेलनी पड़ी है। राज्य की 25 में से केवल 3 सीटे ही उसके हिस्से में आई हैं। जबकि वाईएसआर कांग्रेस को 22 मिली हैं। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं - चंद्रबाबू का अहंकार और उनके प्रतिद्वंद्वी जगन मोहन रेड्डी की मेहनत।
2014 में तेलंगाना को अलग राज्य बनाने का दोषी आंध्र प्रदेश के लोग चंद्रबाबू को मानते हैं। अविभाजित आंध्र का 70 प्रतिशत राजस्व तेलंगाना से आता था। चार साल से ज्यादा समय तक एनडीए का हिस्सा रहने के बावजूद बाबू को विशेष राज्य का दर्जा न दिला पाने की वजह से लोग माफ नहीं कर पाए। साथ ही राजस्व का बड़ा हिस्सा अमरावती को राजधानी बनाने पर खर्च कर दिया। विजयवाडा से तीस किमी दूर बन रहे इस शहर में केवल विधानसभा, सचिवालय व हाईकोर्ट हैं जबकि जजों, अफसरों व कर्मचारियों के लिए रहने की जगह नहीं बन पाई है। इसीलिए लोगों में नायडू के प्रति नाराजगी बैठती गई। वहीं जगन ने पिता की तर्ज पर पूरे प्रदेश में 25 हजार किमी से ज्यादा की पदयात्रा की।
आंध्र प्रदेश कुल सीटेंः 25
वाईएसआर कांग्रेस टीडीपी अन्य
2019 22 00 03 00
2014* 08 00 15 02
2009 00 33 06 03
हार-जीत की बड़ी वजहें
आंध्र के लोगों को हैदराबाद खोना पसंद नहीं आया। राज्य में नरेंद्र मोदी की छवि अच्छी है। इस चुनाव में उनके खिलाफ लड़ने वालों को समझ आया होगा कि टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर या सचिन तेंदुलकर के खिलाफ खेलना कैसा रहता होगा वे भी तब जब वे अपने करिअर की पीक पर हों। इसलिए यहां लोगों को लगा कि चंद्रबाबू नायडू गलत व्यक्ति के साथ लड़ रहे हैं। साथ ही उनमें यह संदेश भी गया कि जगनमोहन रेड्डी के मोदी के साथ संबंध बेहतर हैं इसलिए उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाना ठीक होगा।
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विधानसभा में जीतीं 149 सीटें
175-सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में पिछले पांच साल से सत्ता में काबिज तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) महज 25 सीटें जीत पाई है, जबकि वाईएसआर कांग्रेस 149 सीटे जीतकर पहली बार सरकार बनाएगी। पूरे देश में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाली भारतीय जनता पार्टी का आंध्र प्रदेश में खाता भी नहीं खुल पाया है। यही हाल कांग्रेस का भी है हालांकि जन सेना पार्टी अध्यक्ष पवन कल्याण एक सीट पर ही जीत दर्ज कर पाए हैं। पिछली विधान सभा में वाईएसआर कांग्रेस के 66, टीडीपी के 103, भाजपा के 4 और अन्य 2 विधायक थे।
तेलंगाना : केसीआर पर फिर भरोसा
लोकसभा सीटेंः 17
भाजपा+ कांग्रेस टीआरएस अन्य
2019 04 03 09 01
2014* 02 01 11 03
तेलंगाना राष्ट्र समिति अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव (केसीआर) चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में 119 में से 88 सीट जीत कर सत्ता में आए। बाद में 9 कांग्रेस और तीन अन्य विधायकों ने उन्हें समर्थन देकर उनकी पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ाकर 100 कर दी। यही वजह थी कि इस बार भी राज्य की लगभग सभी सीटें टीआरएस की झोली में गिरीं। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी चंद्रबाबू नायडू और कांग्रेस को नए राज्य का विरोध करने की वजह से तेलंगाना में पसंद नहीं किया गया।
हार गई मुख्यमंत्री की बेटी
हल्दी किसानो के विरोध के चलते खासी चर्चित निजामाबाद सीट पर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता को हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें बीजेपी के धर्मापुरी अरविंद ने 70 हजार से ज्यादा मतों से हराया।
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2014 में तेलंगाना को अलग राज्य बनाने का दोषी आंध्र प्रदेश के लोग चंद्रबाबू को मानते हैं। अविभाजित आंध्र का 70 प्रतिशत राजस्व तेलंगाना से आता था। चार साल से ज्यादा समय तक एनडीए का हिस्सा रहने के बावजूद बाबू को विशेष राज्य का दर्जा न दिला पाने की वजह से लोग माफ नहीं कर पाए। साथ ही राजस्व का बड़ा हिस्सा अमरावती को राजधानी बनाने पर खर्च कर दिया। विजयवाडा से तीस किमी दूर बन रहे इस शहर में केवल विधानसभा, सचिवालय व हाईकोर्ट हैं जबकि जजों, अफसरों व कर्मचारियों के लिए रहने की जगह नहीं बन पाई है। इसीलिए लोगों में नायडू के प्रति नाराजगी बैठती गई। वहीं जगन ने पिता की तर्ज पर पूरे प्रदेश में 25 हजार किमी से ज्यादा की पदयात्रा की।
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आंध्र प्रदेश कुल सीटेंः 25
वाईएसआर कांग्रेस टीडीपी अन्य
2019 22 00 03 00
2014* 08 00 15 02
2009 00 33 06 03
हार-जीत की बड़ी वजहें
आंध्र के लोगों को हैदराबाद खोना पसंद नहीं आया। राज्य में नरेंद्र मोदी की छवि अच्छी है। इस चुनाव में उनके खिलाफ लड़ने वालों को समझ आया होगा कि टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर या सचिन तेंदुलकर के खिलाफ खेलना कैसा रहता होगा वे भी तब जब वे अपने करिअर की पीक पर हों। इसलिए यहां लोगों को लगा कि चंद्रबाबू नायडू गलत व्यक्ति के साथ लड़ रहे हैं। साथ ही उनमें यह संदेश भी गया कि जगनमोहन रेड्डी के मोदी के साथ संबंध बेहतर हैं इसलिए उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाना ठीक होगा।
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विधानसभा में जीतीं 149 सीटें
175-सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में पिछले पांच साल से सत्ता में काबिज तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) महज 25 सीटें जीत पाई है, जबकि वाईएसआर कांग्रेस 149 सीटे जीतकर पहली बार सरकार बनाएगी। पूरे देश में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाली भारतीय जनता पार्टी का आंध्र प्रदेश में खाता भी नहीं खुल पाया है। यही हाल कांग्रेस का भी है हालांकि जन सेना पार्टी अध्यक्ष पवन कल्याण एक सीट पर ही जीत दर्ज कर पाए हैं। पिछली विधान सभा में वाईएसआर कांग्रेस के 66, टीडीपी के 103, भाजपा के 4 और अन्य 2 विधायक थे।
तेलंगाना : केसीआर पर फिर भरोसा
लोकसभा सीटेंः 17
भाजपा+ कांग्रेस टीआरएस अन्य
2019 04 03 09 01
2014* 02 01 11 03
तेलंगाना राष्ट्र समिति अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव (केसीआर) चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में 119 में से 88 सीट जीत कर सत्ता में आए। बाद में 9 कांग्रेस और तीन अन्य विधायकों ने उन्हें समर्थन देकर उनकी पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ाकर 100 कर दी। यही वजह थी कि इस बार भी राज्य की लगभग सभी सीटें टीआरएस की झोली में गिरीं। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी चंद्रबाबू नायडू और कांग्रेस को नए राज्य का विरोध करने की वजह से तेलंगाना में पसंद नहीं किया गया।
हार गई मुख्यमंत्री की बेटी
हल्दी किसानो के विरोध के चलते खासी चर्चित निजामाबाद सीट पर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता को हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें बीजेपी के धर्मापुरी अरविंद ने 70 हजार से ज्यादा मतों से हराया।