मोबाइल नंबर और बैंक खातों से आधार लिंक करने पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे लगाने से इनकार
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सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल और बैंक खातों से आधार को लिंक कराने पर अंतरिम रोक से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने टेलिकॉम कंपनियां और बैंकों को कहा कि वह ग्राहकों को मोबाइल नंबर और बैंक खातों को आधार से जोड़ने वाले मैसेज बार-बार भेजकर परेशान न करें। इसके साथ ही SC ने अब इस मामले पर फैसला संविधान पीठ के जिम्मे छोड़ दिया है।
बता दें कि आज आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई हुई। इस याचिका में कहा गया है कि यह कानून निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है और इसकी बायोमेट्रिक प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है।
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गौरतलब है कि 30 अक्तूबर को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आधार से संबंधित सभी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए संविधान पीठ गठित करने का फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं की गईं दायर
सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और बैंकिंग एवं मोबाइल जैसी विभिन्न सेवाओं के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। हाल ही में नौ जजों की संविधान पीठ द्वारा निजता को मौलिक अधिकार करार दिया गया है और आधार को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं में इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
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जबकि कई अन्य याचिकाओं में बैंक खाते और मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने के आदेश को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के मद्देनजर 25 अक्तूबर को केंद्र सरकार ने आधार लिंक कराने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 मार्च, 2018 करने का फैसला किया है।
यह सुविधा उनके लिए है जिनके पास आधार नंबर नहीं है। जिनके पास पहले से आधार है, उनके लिए लिंक कराने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2017 है। सुप्रीम कोर्ट में दिए गए केंद्र सरकार के एफिडेविट में कहा गया है कि सभी मोबाइल धारकों को छह फरवरी तक अपने आधार कार्ड से लिंक करवाना होगा।