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Cervical Cancer Vaccine: सर्वाइकल कैंसर के लिए SII के टीके को मिली बिक्री मंजूरी, एक्सपर्ट कमेटी ने की थी सिफारिश
Tue, 12 Jul 2022 10:43 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 12 Jul 2022 10:43 PM IST
सार
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से चरण 2/3 क्लिनिकल परीक्षण पूरा होने के बाद इसकी शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सीरम इंस्टिट्यूट में निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने डीसीजीआई को आवेदन कर क्यूएचपीवी के लिए विपणन मंजूरी मांगी थी।
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भारतीय सीरम संस्थान
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने मंगलवार को सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को सर्विकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा) रोधी एवं देश में विकसित भारत के पहले क्वाड्रिवेलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस टीके (क्यूएचपीवी) के विनिर्माण के लिए विपणन मंजूरी प्रदान कर दी।
डीसीजीआई की मंजूरी इस पर 15 जून को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोविड-19 पर विषय विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद आई है।
डीजीसीआई से मांगी थी विपणन मंजूरी
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से चरण 2/3 क्लिनिकल परीक्षण पूरा होने के बाद इसकी शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सीरम इंस्टिट्यूट में निदेशक (सरकारी और नियामक मामलों) प्रकाश कुमार सिंह ने डीसीजीआई को आवेदन कर क्यूएचपीवी के लिए विपणन मंजूरी मांगी थी।
एनटीएजीआई ने क्यूएचपीवी टीके को दी थी स्वीकृति
टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) ने भी टीके के क्लिनिकल परीक्षण से संबंधित डेटा की समीक्षा करने के बाद हाल में क्यूएचपीवी को स्वीकृति प्रदान कर दी थी।
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समझा जाता है कि डीसीजीआई को दिए गए आवेदन में सिंह ने कहा है कि क्यूएचपीवी टीके सेरवावैक ने मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया है जो सभी लक्षित एचपीवी प्रकारों और सभी खुराक और आयु समूहों के आधार पर लगभग 1,000 गुना अधिक प्रभावी है।
आवेदन में, सिंह ने उल्लेख किया था कि हर साल लाखों महिलाओं को सर्विकल कैंसर के साथ-साथ कुछ अन्य कैंसर का पता चलता है और मृत्यु दर भी बहुत अधिक है। भारत में सर्विकल कैंसर 15 से 44 वर्ष आयु समूह की महिलाओं में दूसरा सर्वाधिक होने वाला कैंसर है।
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डीसीजीआई की मंजूरी इस पर 15 जून को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोविड-19 पर विषय विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद आई है।
डीजीसीआई से मांगी थी विपणन मंजूरी
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से चरण 2/3 क्लिनिकल परीक्षण पूरा होने के बाद इसकी शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सीरम इंस्टिट्यूट में निदेशक (सरकारी और नियामक मामलों) प्रकाश कुमार सिंह ने डीसीजीआई को आवेदन कर क्यूएचपीवी के लिए विपणन मंजूरी मांगी थी।
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एनटीएजीआई ने क्यूएचपीवी टीके को दी थी स्वीकृति
टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) ने भी टीके के क्लिनिकल परीक्षण से संबंधित डेटा की समीक्षा करने के बाद हाल में क्यूएचपीवी को स्वीकृति प्रदान कर दी थी।
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समझा जाता है कि डीसीजीआई को दिए गए आवेदन में सिंह ने कहा है कि क्यूएचपीवी टीके सेरवावैक ने मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया है जो सभी लक्षित एचपीवी प्रकारों और सभी खुराक और आयु समूहों के आधार पर लगभग 1,000 गुना अधिक प्रभावी है।
आवेदन में, सिंह ने उल्लेख किया था कि हर साल लाखों महिलाओं को सर्विकल कैंसर के साथ-साथ कुछ अन्य कैंसर का पता चलता है और मृत्यु दर भी बहुत अधिक है। भारत में सर्विकल कैंसर 15 से 44 वर्ष आयु समूह की महिलाओं में दूसरा सर्वाधिक होने वाला कैंसर है।