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Supreme Court: धन विधेयक मामले की सुनवाई में प्राथमिकता की मांग वाली याचिका पर केंद्र का विरोध; कही ये बात

Thu, 12 Oct 2023 07:46 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 12 Oct 2023 07:46 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह धन विधेयक और विधायकों को अयोग्य ठहराने की स्पीकर की शक्ति सहित नौ-न्यायाधीशों और सात-न्यायाधीशों की पीठ के कई मामलों में एक सामान्य आदेश पारित करेगी।  इससे पहले, शीर्ष अदालत ने 6 अक्टूबर को कहा था कि वह धन विधेयक मुद्दे पर विचार करने के लिए सात न्यायाधीशों की पीठ का गठन करेगी।

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Centre opposes in Supreme Court submission seeking priority in hearing to Money Bill case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार ने धन विधेयक मामले की सुनवाई में प्राथमिकता की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अपना विरोध दर्ज कराया है। केंद्र ने याचिका की सुनवाई को प्राथमिकता देने के अनुरोध का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में राजनीतिक आवश्यकताओं के आधार पर  प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए।  

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दरअसल, गुरुवार को शीर्ष कोर्ट की  डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात-जजों की पीठ नौ-न्यायाधीशों और सात-न्यायाधीशों की पीठ के कुछ मामलों में प्रक्रियात्मक निर्देश पारित करने पर विचार करने के लिए इकट्ठी हुई थी। इस पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। इसी दौरान, याचिका में एक पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात-न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि अदालत इस मामले को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकती है क्योंकि यह एक जीवंत मुद्दा है।
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वहीं, केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इसमें निर्णय वरिष्ठता के आधार पर लिया जाना चाहिए।इस पर मेहता ने कहा कि प्राथमिकता "राजनीतिक जरूरतों" के आधार पर तय नहीं की जा सकती। आखिर में पीठ ने कहा कि यह तय करना हमारा काम है। इसे हम पर ही छोड़ दें।
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 वहीं, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह धन विधेयक और विधायकों को अयोग्य ठहराने की स्पीकर की शक्ति सहित नौ-न्यायाधीशों और सात-न्यायाधीशों की पीठ के कई मामलों में एक सामान्य आदेश पारित करेगी।  इससे पहले, शीर्ष अदालत ने 6 अक्टूबर को कहा था कि वह धन विधेयक मुद्दे पर विचार करने के लिए सात न्यायाधीशों की पीठ का गठन करेगी।

यह मामला, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत परिभाषित धन विधेयक, कराधान, सार्वजनिक व्यय आदि जैसे वित्तीय मामलों से संबंधित है। धन विधेयक प्रावधान उस समय विवाद में आ गया, जब सरकार ने आधार विधेयक जैसे कुछ विधेयकों को धन विधेयक के रूप में पेश करने की मांग की थी। चुनावी बॉन्ड योजना को इस आधार पर भी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है कि संशोधन धन विधेयक के माध्यम से पेश किए गए।


बता दें कि धन विधेयक को केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है।  राज्यसभा इसमें संशोधन या अस्वीकार नहीं कर सकती है। उच्च सदन केवल सिफारिशें कर सकता है जिन्हें निचला सदन स्वीकार भी कर सकता है और नहीं भी।

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