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Hindi News ›   India News ›   Centre Initiative, Make in India products should be used in paramilitary forces

अब 'मेक इन इंडिया' से होगी बॉर्डर की सुरक्षा, विदेशी कंपनियों के उपकरणों का इस्तेमाल होगा बंद!

Mon, 17 Feb 2020 08:20 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 17 Feb 2020 08:20 PM IST
सार

  • स्वदेशी कंपनियों के बनाए उत्पाद ही हों इस्तेमाल
  • सुरक्षा बल खर्चे में करें कटौती
  • केवीआईसी उत्पादों के प्रयोग में तेजी लाएं

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Centre Initiative, Make in India products should be used in paramilitary forces
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विस्तार

केंद्र सरकार के नारे 'मेक इन इंडिया' के जरिए अब बॉर्डर की सुरक्षा होगी। वहां पर तैनात जवानों को अपनी दिनचर्या से लेकर ड्यूटी के दौरान इस्तेमाल होने वाले तमाम उपकरणों में भी यह ध्यान रखना है कि वह सामान किसी विदेशी कंपनी द्वारा निर्मित न हों। मतलब, वे स्वदेशी उत्पाद हों।
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सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बाबत सभी अर्धसैनिक बलों को अवगत करा दिया है। इन बलों में खरीददारी के दौरान यह ध्यान रखा जाएगा कि जो भी सामान लें, वह स्वदेशी कंपनियों ने बनाएं हुए हों।

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केंद्र सरकार की इस मुहिम को सार्थक बनाने के लिए गृह सचिव और सीमा प्रबंधन सचिव से कहा गया है कि वे भी कीमतों में कमी लाने की ओर ध्यान दें। साथ ही स्वदेशी कंपनियों के उत्पादों का इस्तेमाल सुनिश्चित करें।
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बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों की बैठक ली थी। खासतौर पर, सीआईएसएफ मुख्यालय में हुई बैठक के दौरान शाह ने यह बात स्पष्ट तौर पर कही कि खरीदारी प्रक्रिया केवल स्वदेशी कंपनियों के साथ हो।


बैठक के बाद जो रिपोर्ट तैयार हुई, उसमें सभी बलों को यह हिदायत दी गई है कि वे मौजूदा खर्च में कटौती करें और जो कुछ भी खरीदें, वह स्वदेशी कंपनी से ही लें। खादी विकास और ग्रामोद्योग आयोग 'केवीआईसी' की वस्तुओं का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।


विभिन्न बलों से कहा गया है कि वे केवीआईसी उत्पादों के प्रयोग में तेजी लाएं। सभी अर्धसैनिक बल केवीआईसी के सामान की टेस्टिंग करा लें। यह केवल एक एक्सरसाइज बनकर न रहे, इसका खास ध्यान रखा जाए।

सीमा पर तैनात जवानों को जो भी उपकरण, भले ही वह तकनीक से जुड़ा क्यों न हो, उसमें भी स्वदेशी यानी मेक इन इंडिया, उत्पादों का इस्तेमाल हो।

 

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