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Hindi News ›   India News ›   Pegasus Snooping Case: Centre Files Affidavit in Supreme Court On Pegasus Spyware Issues

पेगासस कांड: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा- छिपाने के लिए कुछ नहीं

Mon, 16 Aug 2021 01:02 PM IST
प्रशांत कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार झा Updated Mon, 16 Aug 2021 01:02 PM IST
सार

पेगासस जासूसी कांड पर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने पेगासस मामले पर जवाब दाखिल किया। सरकार की ओर से दो पन्ने के संक्षिप्त हलफनामे में जासूसी के आरोपों का खंडन किया गया है।

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Pegasus Snooping Case: Centre Files Affidavit in Supreme Court On Pegasus Spyware Issues
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि पेगासस जासूसी के आरोपों में छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह इस मामले के सभी पहलुओं के निरीक्षण के लिए प्रमुख विशेषज्ञों की एक विशेषज्ञ समिति बनाएगा।प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की तीन सदस्यीय पीठ को सरकार ने बताया कि यह मुद्दे काफी तकनीकी है और इसके सभी पहलुओं की विशेषज्ञों द्वारा जांच की जरूरत है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। विशेषज्ञों की समिति से इसकी जांच की जरूरत है। यह बेहत तकनीकी मुद्दा है। हम इस क्षेत्र के प्रमुख तटस्थ विशेषज्ञों की नियुक्ति करेंगे।

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जासूसी के आरोपों की जांच को लेकर याचिका दायर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार का हलफनामा यह नहीं बताता कि सरकार या उसकी एजेंसियों ने जासूसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया या नहीं।
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सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कहा, 'हम नहीं चाहते कि सरकार, जिसने पेगासस का इस्तेमाल किया हो या उसकी एजेंसी जिसने हो सकता है इसका इस्तेमाल किया हो, अपने आप एक समिति गठित करें।'
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इससे पहले, दिन में केंद्र ने हलफनामा दायर कर सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि पेगासस जासूसी के आरोपों को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाएं “अटकलों, अनुमानों” और मीडिया में आई अपुष्ट खबरों पर आधारित हैं।

हलफनामे में सरकार ने कहा कि केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही कथित पेगासस जासूसी मुद्दे पर संसद में उसका रुख स्पष्ट कर चुके हैं।

हलफनामे में कहा गया, उपर्युक्त याचिका और संबंधित याचिकाओं के अवलोकन भर से यह स्पष्ट हो जाता है कि वे अटकलों, अनुमानों तथा अन्य अपुष्ट मीडिया खबरों तथा अपूर्ण या अप्रमाणिक सामग्री पर आधारित हैं।

हलफनामे में कहा गया कि कुछ निहित स्वार्थों द्वारा दिए गए किसी भी गलत विमर्श को दूर करने और उठाए गए मुद्दों की जांच करने के उद्देश्य से विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया जाएगा।

शीर्ष अदालत ने 10 अगस्त को कुछ याचिकाकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया पर जासूसी मुद्दे पर समानांतर कार्यवाही और बहस को अपवाद स्वरूप लेते हुए कहा था कि अनुशासन कायम रखा जाना चाहिए और याचिकाकर्ताओं को व्यवस्था में थोड़ा भरोसा होना चाहिए।


गौरतलब है कि पांच अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पेगासस से जासूसी कराए जाने संबंधी खबरें अगर सही हैं तो यह आरोप गंभीर प्रकृति” के हैं। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से यह भी जानना चाहा था कि क्या उन्होंने इस मामले में कोई आपराधिक शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया।
 

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