पिछड़े जिलों पर प्राथमिकता से काम करेगी सरकार, इस आधार पर होगी रैंकिंग
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सबका साथ सबका विकास नारे को चरितार्थ करते हुए मोदी सरकार ने अब देश के आर्थिक रूप से अत्यंत पिछड़े 101 जिलों को मॉडल जिले के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है। इसकी जिम्मेदारी नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर ट्रांस्फोर्मिंग इंडिया यानी नीति आयोग को दी गई है।
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत के मुताबिक आजादी केसात दशक बाद भी विकास की दौड़ में पीछे छूट गए देश के इन जिलों की रैंकिंग शुरू कर दी गई है। इन जिलों के प्रदर्शन में सुधार के लिए अति पिछड़े जिलों की सूची बनाई गई है। अभी जो पहली सूची बनी है, उसमें देश के ऐसे 101 जिलों को स्थान मिला है, जिन पर अब प्राथमिकता से काम होगा और वहां क्या प्रगति हुई है, उसकी आवधिक समीक्षा की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने देश के पिछड़े जिलों के विकास के लिए इसी साल जनवरी में ट्रांसफोर्मेशन ऑफ एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स नाम से योजना की शुरुआत की थी। नीति आयोग ने जिन 101 जिलों का चयन किया है, उन्हें अब पिछड़ा नहीं बल्कि एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट कहा जाएगा।
आगे बढ़ने के लिए होगी आपस में ही प्रतिस्पर्धा
अमिताभ कांत का कहना है कि नीति आयोग ने अब ऐसे जिलों के विकास के लिए एक बेसलाइन रैंकिंग शुरू की है, जिसमें 49 संकेतकों को आधार बनाया गया है। ये संकेतक स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि तथा जल संसाधन, वित्तीय समावेशन तथा कौशल विकास और ढांचागत संरचना क्षेत्र से संबंधित हैं। इन क्षेत्रों में ही प्रदर्शन के आधार पर अब इन जिलों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा होगी।
जिलों की होगी निगरानी
नीति आयोग के मुताबिक इन जिलों में चुनिंदा संकेतकों पर कितना काम हो रहा है, इसकी निगरानी के लिए आयोग एक निगरानी तंत्र भी बना रहा है जो इन जिलों की रैंकिंग के दौरान रीयल टाइम आंकड़े इकट्ठा करेगा। इस पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग के लिए आयोग अगले वित्त वर्ष की पहली तारीख यानी एक अप्रैल से एक डैश बोर्ड भी शुरू कर रहा है।
कांत का कहना है कि इस कार्यक्रम के तहत केंद्र एवं राज्यों की योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल, केंद्र और राज्य स्तर के प्रभारी अधिकारियों तथा जिला कलेक्टरों के बीच गठजोड़ एवं जिलों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम में प्रत्येक जिलों को मजबूत बनाने, प्रगति को गति देने तथा उनकी रैंकिंग पर ध्यान दिया जाएगा।
आर्थिक प्रगति के लिए रैंकिंग
नीति आयोग का कहना है कि देश के ये जिले जब तक आगे नहीं बढ़ेंगे, आर्थिक प्रगति की रफ्तार तेज नहीं हो सकती। अमिताभ कांत कहते हैं कि अर्थव्यवस्था में तेज वृद्धि दर आ भी जाए, लेकिन जब तक उसका लाभ निचले स्तर तक नहीं जाता, उसका कोई मतलब नहीं है। इसलिए आयोग ने इसी साल मई से जिलों में होने वाली प्रगति के आधार पर उनकी रैंकिंग जारी करने की भी व्यवस्था की है। इसे आधिकारिक तौर पर डेल्टा रैंकिंग का नाम दिया गया है।
एक- दूसरे से सीख सकेंगे जिले
अमिताभ कांत का कहना है कि जब सभी जिलों की रैंकिंग आम की जाएगी तो इससे पिछड़े जिले एक- दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं। आयोग की इस रैंकिंग में पश्चिम बंगाल और केरल को छोड़कर देश के सभी राज्य शामिल हैं। उन्होंने संभावना जताई कि रैंकिंग से छूटे दोनों राज्यों के भी जल्दी ही इससे जुड़ने की संभावना है।
आधार रैंकिंग में आंध्र प्रदेश आगे, हरियाणा सबसे पीछे
नीति आयोग की आधार रैंकिंग के तहत आंध्र प्रदेश का विजयनगरम सर्वाधिक 48.13 अंक के साथ सर्वोच्च स्थान पर है, वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटा हरियाणा का मेवात 26.02 अंक के साथ सबसे पीछे है।
शीर्ष स्थान पर आने वाले अन्य जिलों में छत्तीसगढ़ का राजनंदगांव, महाराष्ट्र का उस्मानाबाद, आंध्र प्रदेश का कुडप्पा, तमिलनाडु का रामनाथपुर, उत्तराखंड का उधम सिंह नगर, छत्तीसगढ़ का महासमुंद, तेलांगाना का खम्मम और आंध्र प्रदेश का विशाखापत्तनम शामिल है। यदि सूची के निचले पायदान पर नजर डालें तो तेलांगाना का आसिफाबाद, मध्य प्रदेश का सिंगरौली, उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती, सिद्घार्थ नगर और बलरामपुर तथा अरुणाचल प्रदेश के नामसाई और सुकमा जिले शामिल हैं।