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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- जॉनसन के खराब इम्प्लांट को यूपीए ने दी थी मंजूरी

Fri, 14 Dec 2018 09:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 14 Dec 2018 09:54 AM IST
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Central government told Supreme Court that UPA allowed import of faulty J&J implants
सुप्रीम कोर्ट

केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि जब दुनिया के विभिन्न देशों के लोग जॉनसन एंड जॉनसन (जेएंडजे) के दोषपूर्ण हिप रिप्लेसमेंट इम्प्लांट की शिकायत कर रहे थे तब यूपीए सरकार ने फरवरी 2010 में उसे भारत में आयात करने की इजाजत दी। जबकि कुछ महीनों पहले ही कंपनी ने अपने इन रिप्लेसमेंट इम्प्लांट को ऑस्ट्रेलिसा से वापस मंगवा लिया था। 

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अपने हलफनामे में केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएसओ) का कहना है कि बेशक हिप रिप्लेसमेंट इम्प्लांट उत्पाद को ऑस्ट्रेलिया में मिली कई शिकायतों के बाद दिसंबर 2009 में ही वापस ले लिया गया था, जेएंडजे ने भारत में आयात लाइसेंस के लिए 11 जनवरी 2010 में आवेदन किया। जिसे कि सरकार ने 18 फरवरी 2010 को मंजूर कर लिया।
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सीडीएसओ को 23 सितंबर 2009 में सूचित करने के बाद कि उसके हिप इम्प्लांट उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर पिछले तीन सालों में कोई शिकायत नहीं आई है जेएंडजे ने 8 मार्च 2010 को एक फील्ड सेफ्टी नोटिस जमा करवाया। इसमें उसने सीडीएसओ को बताया कि हिप इम्प्लांट के उत्पादों की सर्जरी की दरों को बढ़ा दिया गया है।
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अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ब्राजील से अगस्त 2010 में जेएंडजे ने मेटलिक हिप इम्प्लांट के उत्पादों को वापस मंगवा लिया था। इसके बाद उसने सीडीएसओ को 24 अगस्त 2010 को सूचित किया कि वह भारत से अपने उत्पादों को वापसी कर रहा है। डॉक्टर अरुण अग्रवाल की समिति ने जिन्होंने इस मसले की जांच की, उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जेएंडजे उन मरीजों को पर्याप्त मुआवजा नहीं दे रही है जिनका दोषपूर्ण हिप इम्प्लांट हुआ था।


समिति ने फरवरी 2018 की अपनी रिपोर्ट में कहा, 'कंपनी सभी मरीजों को चिकित्सा प्रबंधन प्रदान करने में विफल रही है। अभी तक मौजूद रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी ने अभी तक किसी भी मरीज को मुआवजा नहीं दिया है।' केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने हर उस व्यक्ति को 30 लाख से लेकर 1.2 करोड़ रुपये तक मुआवजा देने की सिफारिश की थी जिसका दोषपूर्ण इम्प्लांट हुआ था।

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