Caste Census: 'आजादी के बाद SC-ST के अलावा किसी की गणना नहीं'; कांग्रेस के एलान के बीच सरकार ने साफ की स्थिति
नित्यानंद राय ने कहा कि जनगणना में उन जातियों और जनजातियों की गणना की जाती है जिन्हें संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 और समय-समय पर संशोधित संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 के अनुसार विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के रूप में अधिसूचित किया गया है।
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देश में एक बार फिर जातिगत जनगणना को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस बार इसका कारण कांग्रेस का एक एलान है। दरअसल, कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले घोषणा की है कि पार्टी की सरकार बनने पर प्रदेश में जातिगत जनगणना कराई जाएगी। इसी बीच, जातिगत जनगणना को लेकर केंद्र ने लोकसभा में साफ कर दिया है कि आजादी के बाद से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन-जाति को छोड़कर किसी भी जाति की जनगणना नहीं हुई है।
लोकसभा में सरकार ने दिया जवाब
एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए मंगलवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों और कुछ संगठनों ने आगामी जनगणना में जाति विवरण एकत्र करने का अनुरोध किया है। भारत सरकार ने आजादी के बाद से जनगणना में एससी और एसटी के अलावा अन्य जाति-वार जनसंख्या की गणना नहीं की है।
इस दौरान नित्यानंद राय ने जनगणना में शामिल की जाने वाली जातियों को भी बताया। उन्होंने कहा कि जनगणना में उन जातियों और जनजातियों की गणना की जाती है जिन्हें संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 और समय-समय पर संशोधित संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 के अनुसार विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के रूप में अधिसूचित किया गया है।
बिहार में जातिगत सर्वे
बिहार सरकार ने दो चरणों में जातीय सर्वे का काम पूरा करने का एलान किया था। पहला फेज जनवरी में पूरा हो गया था। फिर 15 अप्रैल से दूसरे फेज की शुरुआत हुई, जिसे 15 मई तक पूरा होना था। पहले चरण में लोगों के घरों की गिनती की गई। दूसरे चरण में जाति और आर्थिक जनगणना का काम शुरू हुआ। इसमें लोगों के शिक्षा का स्तर, नौकरी (प्राइवेट, सरकारी, गजटेड, नॉन-गजटेड आदि), गाड़ी (कैटेगरी), मोबाइल, किस काम में दक्षता है, आय के अन्य साधन, परिवार में कितने कमाने वाले सदस्य हैं, एक व्यक्ति पर कितने आश्रित हैं, मूल जाति, उप जाति, उप की उपजाति, गांव में जातियों की संख्या, जाति प्रमाण पत्र से जुड़े सवाल पूछे जा गए। दूसरा चरण 15 मई तक चलना था। जिस पर चार मई को पटना हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। इस फैसले के खिलाफ नीतीश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की लेकिन कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। 21 जुलाई को कोर्ट ने कहा पटना उच्च न्यायालय ने सात जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
राज्य सरकारों को जनणना को लेकर क्या अधिकार है?
बिहार सरकार की जातीय जनगणना पर रोक लगाते वक्त पटना हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था, 'प्रथम दृष्टया हमारी राय है कि राज्य के पास जाति-आधारित सर्वेक्षण करने की कोई शक्ति नहीं है।' साथ ही अदालत ने कहा कि जिस तरह से यह अब चलन में है, जो जनगणना की तरह होगा, इस प्रकार संसद की विधायी शक्ति का उल्लंघन होगा।'वहीं, कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों की राय है कि चूंकि जनगणना प्रक्रिया संघ सूची के अंतर्गत आती है, इसलिए राज्यों को इसे संचालित करने का अधिकार नहीं है। वे केवल जनसंख्या के आंकड़े या डेटा एकत्र कर सकते हैं।
'2023 में जून के अंत तक जम्मू-कश्मीर में कोई घुसपैठ नहीं'
इस दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ को लेकर भी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इस साल 30 जून तक जम्मू-कश्मीर में कोई भी घुसपैठ नहीं हुई है। वहीं, 2022 में 14 आतंकवादियों की घुसपैठ दर्ज की गई थी। उन्होंने कहा कि ये आंकड़ा साल 2021 में 34, 2020 में 51 और 2019 में 141 था।
राय ने कहा कि सीमा पार से होने वाली घुसपैठ से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से उल्लेखनीय गिरावट सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने सीमा पार से होने वाली घुसपैठ से निपटने के लिए अच्छी तरह से समन्वित और बहु-आयामी रणनीति अपनाई है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बलों की सामरिक तैनाती, निगरानी कैमरे, नाइट विजन कैमरे, हीट सेंसिंग गैजेट्स आदि जैसी तकनीक का उपयोग, आईबी और एलओसी पर बहु-स्तरीय तैनाती और सीमा बाड़ लगाना शामिल है।
वहीं, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के जवाब में भारत की जनसंख्या के बारे में जानकारी दी। उन्होंने एक लिखित उत्तर में कहा कि संयुक्त राष्ट्र, आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में चीन की कुल अनुमानित जनसंख्या लगभग 142 करोड़ थी। उन्होंने कहा कि एक अन्य अनुमान के अनुसार भारत की जनसंख्या 139 करोड़ होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस साल एक जुलाई तक भारत की अनुमानित जनसंख्या चीन से कम थी।
केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में मंगलवार को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र , इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स डिपार्टमेंट, पॉपुलेशन डिवीजन के ऑनलाइन पब्लिकेशन और वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्टस 2022 के मुताबिक चीन की जनसंख्या 1 जुलाई 2023 को 142,56,71,000 अनुमानित की गई थी।
वहीं, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग द्वारा प्रकाशित जनसंख्या अनुमान पर तकनीकी समूह की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जुलाई, 2023 को भारत की अनुमानित जनसंख्या 139,23,29,000 है।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय एक सवाल कि क्या सरकार जनगणना और समय सीमा आयोजित करने का प्रस्ताव रखती है? इस पर मंत्री ने कहा कि जनगणना 2021 आयोजित करने के लिए सरकार की मंशा 28 मार्च, 2019 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित की गई थी।
अनधिकृत वेबसाइटें ई-वीजा दिलाने के झांसे में फंसा रहीं
भारत का ई-वीजा दिलवाने का प्रयास कर रहीं अनधिकृत वेबसाइटें कई फर्जी तरीके अपना रही हैं। इन्हें रोकने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि कई वेबसाइटें indianvisaonline.gov.in से मिलते जुलते प्रारूप में बनाई गई हैं। वहीं, सर्च इंजन पर भी इनमें से कई विज्ञापन दे रही हैं। इन्हें रोकने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने गूगल सर्च इंजन से समन्वय किया है। सर्च के दौरान गूगल भारत की आधिकारिक वेबसाइट को प्रमुखता से प्रदर्शित कर रहा है। इसके अलावा, सभी भारतीय मिशन व केंद्रों को सलाह दी गई है कि वे अपनी वेबसाइटों व सोशल मीडिया माध्यमों पर एडवाइजरी व सजगता-नोटिस जारी करें। विदेशों में भारतीय मिशन में अनधिकृत एजेंसियों व दलालों को भी एक साथ कई वीजा आवेदन जमा करने की अनुमति नहीं है। भारतीय मिशन से जोड़े गए सेवा प्रदाताओं को भी आवेदन की गहन जांच करने के लिए कहा गया है।
कीटनाशकों पर प्रतिबंध को लेकर सरकार के रवैये पर शीर्ष कोर्ट ने चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट ने कीटनाशकों पर प्रतिबंध की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार के बार-बार विशेषज्ञ समितियां गठित करने के रवैये पर चिंता जताई। अदालत ने पूछा, जब प्रारंभिक विशेषज्ञ समिति ने पहले ही 27 कीटनाशकों पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी तो उसके बाद कई समितियों की नियुक्ति का क्या औचित्य है? पीठ ने कहा, इससे ऐसा लगता है कि जब तक अनुकूल निर्णय नहीं मिल जाता, केंद्र सरकार बार बार समितियां गठित करती रहती है। शीर्ष अदालत हानिकारक रसायनों और कीटनाशकों को खत्म करने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने सरकार के कार्यों का बचाव करते हुए कहा, उन्होंने वैज्ञानिक सलाह के आधार पर एक व्यवस्थित प्रक्रिया का पालन किया। हमारे पास एक प्रक्रिया है। हम विज्ञान पर भरोसा करते हैं। समिति ने तीन पर प्रतिबंध लगाया और फिर आपत्तियां मांगी।
यह है मामला
2015 में डॉ. अनुपम वर्मा समिति ने 66 में से 13 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। कीटनाशक उद्योग संघ ने आपत्तियां उठाईं तो सरकार ने 2017 में डॉ. एसके मल्होत्रा समिति बनाई। उसने 27 कीटनाशकों पर निरंतर प्रतिबंध की आवश्यकता दोहराई। इसके बाद कई और समितियां बनाई गईं।