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दो साल बाद मिलने लगेगा हर महीने का रोजगार इंडेक्स, केंद्र सरकार कर रही तैयारी
शशिधर पाठक/नई दिल्ली
Updated Mon, 05 Sep 2016 03:17 PM IST
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अभी केन्द्र सरकार के पास ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं है, जिससे वह हर साल युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में मिलने वाले रोजगार के अवसर, उसके ट्रेंड और गैर रोजगार प्राप्त युवाओं की सटीक जानकारी दे सके। लेकिन केन्द्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है और केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव शंकर अग्रवाल का कहना है कि दो साल बाद रोजगार ट्रेंड को लेकर सरकार के पास हर महीने की हर तररह की जानकारी उपलब्ध रहेगी।
केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव के अनुसार अभी केवल यही कहा जा सकता है कि हर साल एक करोड़ युवा रोजगार के क्षेत्र में आते हैं। इसमें संगठित और असंगठित क्षेत्र दोनों शामिल हैं। लेकिन यह नहीं बताया जा सकता है कि इनमें कितने युवाओं को हर साल किस क्षेत्र में और उनकी योग्यता की तुलना में किस स्तर का रोजगार मिलता है। इतना ही नहीं केन्द्र सरकार के पास इस तरह का कोई कारगर मैकेनिज्म नहीं है, जिससे वह हर साल विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की छूटने वाली नौकरियों का डेटा दे सके या रोजगार का सटीक ट्रेंड बता पाए।
श्रम एवं रोजगार सचिव के अनुसार सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। ऐसा अनुमान है कि दो साल में हम रोजगार इंडेक्स को दे सकेंगे। हर महीने के रोजगार के ट्रेंड के बारे में जान सकेंगे और इस जानकारी के आधार पर युवाओं को शिक्षित प्रशिक्षित करने की कारगर योजनाएं बनाई जा सकेंगी। यह बताया जा सकेगा कि किस तरह से बाजार, उद्योग और रोजगार का क्षेत्र बदल रहा है और कैसी योग्यता के लोगों की मांग है। आने वाले समय में हमें कितने इंजीनियर, एमबीए, टेक्नीशियन या किस तरह के अन्य प्रफेशनल चाहिए।
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केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव के अनुसार अभी केवल यही कहा जा सकता है कि हर साल एक करोड़ युवा रोजगार के क्षेत्र में आते हैं। इसमें संगठित और असंगठित क्षेत्र दोनों शामिल हैं। लेकिन यह नहीं बताया जा सकता है कि इनमें कितने युवाओं को हर साल किस क्षेत्र में और उनकी योग्यता की तुलना में किस स्तर का रोजगार मिलता है। इतना ही नहीं केन्द्र सरकार के पास इस तरह का कोई कारगर मैकेनिज्म नहीं है, जिससे वह हर साल विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की छूटने वाली नौकरियों का डेटा दे सके या रोजगार का सटीक ट्रेंड बता पाए।
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श्रम एवं रोजगार सचिव के अनुसार सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। ऐसा अनुमान है कि दो साल में हम रोजगार इंडेक्स को दे सकेंगे। हर महीने के रोजगार के ट्रेंड के बारे में जान सकेंगे और इस जानकारी के आधार पर युवाओं को शिक्षित प्रशिक्षित करने की कारगर योजनाएं बनाई जा सकेंगी। यह बताया जा सकेगा कि किस तरह से बाजार, उद्योग और रोजगार का क्षेत्र बदल रहा है और कैसी योग्यता के लोगों की मांग है। आने वाले समय में हमें कितने इंजीनियर, एमबीए, टेक्नीशियन या किस तरह के अन्य प्रफेशनल चाहिए।
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न तो दक्ष युवा और न ही सम्मानजनक रोजगार
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केन्द्रीय सचिव ने मौजूदा युवाओं की योग्यता और उसकी तुलना में मिलने वाले रोजगार पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मांग के अनुरुप न तो बाजार को और न ही उद्योगों को युवा मिल पा रहे हैं और न ही जो डिग्री या डिप्लोमा लेकर युवा रोजगार के लिए आ रहे हैं, उसके अनुरुप उन्हें काम मिल पा रहा है।
श्रम एवं रोजगार सचिव ने कहा कि वह इसे रोजगार भी नहीं मानते, क्योंकि यह सम्मानजनक रोजगार की अवधारणा को पूरा नहीं करता। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इस स्थिति को लेकर विचार कर रही है। इसी को ध्यान में रखकर स्किल इंडिया का कार्यक्रम चलाया जा रहा है और चौथे औद्योगिक रिवोल्यूशन को ध्यान में रखकर इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
श्रम एवं रोजगार सचिव ने कहा कि वह इसे रोजगार भी नहीं मानते, क्योंकि यह सम्मानजनक रोजगार की अवधारणा को पूरा नहीं करता। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार इस स्थिति को लेकर विचार कर रही है। इसी को ध्यान में रखकर स्किल इंडिया का कार्यक्रम चलाया जा रहा है और चौथे औद्योगिक रिवोल्यूशन को ध्यान में रखकर इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।