{"_id":"5c05acf5bdec2241836bb2b7","slug":"center-not-objection-on-two-sit-members-to-monitor-1984-sikh-riots-cases","type":"story","status":"publish","title_hn":"1984 सिख दंगा मामलों की निगरानी एसआईटी के दो सदस्यों के करने पर केंद्र को आपत्ति नहीं","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
1984 सिख दंगा मामलों की निगरानी एसआईटी के दो सदस्यों के करने पर केंद्र को आपत्ति नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 04 Dec 2018 03:54 AM IST
विज्ञापन
Sikh riots 1984
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यदि एसआईटी के दो सदस्य 1984 सिख दंगा मामलों की जांच की निगरानी जारी रखते हैं तो उसे इस पर कोई आपत्ति नहीं है। साथ ही उसने कहा कि तीन सदस्यीय एसआईटी से अलग हुए सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजदीप सिंह की जगह किसी अन्य की नियुक्ति जरूरी नहीं है।
सिंह ने निजी कारणों से एसआईटी से अलग होने का फैसला किया है। तीन सदस्यीय एसआईटी सिख दंगों के 186 मामलों की जांच की निगरानी कर रही है। इसके दो अन्य सदस्य दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस एसएन ढींगरा और आईपीएस अधिकारी अभिषेक दुलार हैं।
जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि 11 जनवरी के आदेश के तहत तीन सदस्यीय एसआईटी बनाने का फैसला तीन सदस्यीय पीठ ने लिया था। ऐसे में दो जजों की पीठ इसे संशोधित नहीं कर सकती है। पीठ ने मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए टाल दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील एचएस फुलका ने कहा कि अगर एसआईटी में दो सदस्य भी रहे तो कोई दिक्कत नहीं है।
विज्ञापन
इस प्रस्ताव पर केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि उन्हें सुझाव पर कोई आपत्ति नहीं है। इससे पहले उन्होंने पीठ से कहा कि राजदीप सिंह की जगह पूर्व आईपीएस अधिकारी नवनीत रंजन वासन को सदस्य बनाया जा सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि आप अपनी मर्जी का सदस्य नहीं चुन सकते। इस पर उन्होंने कहा कि अदालत किसी भी व्यक्ति को अपने हिसाब से सदस्य चुन सकती है।
विज्ञापन
सिंह ने निजी कारणों से एसआईटी से अलग होने का फैसला किया है। तीन सदस्यीय एसआईटी सिख दंगों के 186 मामलों की जांच की निगरानी कर रही है। इसके दो अन्य सदस्य दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस एसएन ढींगरा और आईपीएस अधिकारी अभिषेक दुलार हैं।
विज्ञापन
जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि 11 जनवरी के आदेश के तहत तीन सदस्यीय एसआईटी बनाने का फैसला तीन सदस्यीय पीठ ने लिया था। ऐसे में दो जजों की पीठ इसे संशोधित नहीं कर सकती है। पीठ ने मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए टाल दिया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील एचएस फुलका ने कहा कि अगर एसआईटी में दो सदस्य भी रहे तो कोई दिक्कत नहीं है।
विज्ञापन
इस प्रस्ताव पर केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि उन्हें सुझाव पर कोई आपत्ति नहीं है। इससे पहले उन्होंने पीठ से कहा कि राजदीप सिंह की जगह पूर्व आईपीएस अधिकारी नवनीत रंजन वासन को सदस्य बनाया जा सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि आप अपनी मर्जी का सदस्य नहीं चुन सकते। इस पर उन्होंने कहा कि अदालत किसी भी व्यक्ति को अपने हिसाब से सदस्य चुन सकती है।